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आतंकवाद, ड्रग्स, साइबर ठगी, क्रिप्टो स्कैम और कट्टरपंथ… Telegram आखिर अपराधियों की पहली पसंद क्यों बन गया?

यूजरनेम के जरिए बातचीत, सीक्रेट चैट, ऑटो डिलीट मैसेज और तेज स्पीड जैसी सुविधाओं की वजह से भी करोड़ों लोग टेलीग्राम को पसंद करते हैं। यही फीचर्स आम यूजर्स के लिए सुविधाजनक हैं, लेकिन गलत हाथों में पड़ने पर इनका दुरुपयोग भी हो रहा है।

दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स में शामिल टेलीग्राम एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गया है। एक तरफ ऑस्ट्रेलिया ने इस ऐप के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, तो दूसरी तरफ रूस ने इसके संस्थापक पावेल ड्यूरोव पर आतंकवादी गतिविधियों में मदद करने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए हैं।

दोनों देशों के आरोप अलग-अलग हैं लेकिन सवाल एक ही है कि आखिर टेलीग्राम पर ऐसा क्या हो रहा है कि दुनिया की सरकारें इस पर लगातार सख्त होती जा रही हैं।

पिछले कुछ सालों में टेलीग्राम सिर्फ दोस्तों और परिवार से बातचीत करने वाला ऐप नहीं रह गया है। आज इसका इस्तेमाल करोड़ों लोग पढ़ाई, बिजनेस, न्यूज और कम्युनिटी बनाने के लिए करते हैं। लेकिन इसके साथ ही साइबर ठग, हैकर, ऑनलाइन स्कैम चलाने वाले गिरोह, कट्टरपंथी संगठन और दूसरे अपराधी भी इस प्लेटफॉर्म का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी वजह है टेलीग्राम के कुछ ऐसे फीचर्स, जो आम लोगों के लिए तो सुविधाजनक हैं लेकिन गलत हाथों में पड़कर बड़े खतरे की वजह बन रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया ने टेलीग्राम के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाया?

ऑस्ट्रेलिया की ऑनलाइन सुरक्षा एजेंसी ई-सुरक्षा आयुक्त ने टेलीग्राम के खिलाफ संघीय न्यायालय में कानूनी कार्रवाई शुरू की है। एजेंसी का आरोप है कि टेलीग्राम ने कई बार शिकायत मिलने के बावजूद आतंकवाद और चरमपंथ से जुड़ी सामग्री समय पर नहीं हटाई।

ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि प्लेटफॉर्म पर ऐसे वीडियो और पोस्ट लंबे समय तक उपलब्ध रहे, जिनका संबंध दुनिया के कुछ सबसे चर्चित आतंकी हमलों से था। इनमें न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च मस्जिद हमला, अमेरिका के बफेलो सुपरमार्केट शूटिंग और ISIS द्वारा जारी किए गए सिर कलम करने वाले वीडियो जैसी सामग्री भी शामिल बताई गई है।

ई-सुरक्षा आयुक्त जूली इनमैन ग्रांट का कहना है कि टेलीग्राम को इन पोस्ट के बारे में पहले ही जानकारी दे दी गई थी। इसके बावजूद प्लेटफॉर्म ने इन्हें हटाने में काफी देर कर दी।

उनका मानना है कि जब किसी प्लेटफॉर्म को इस तरह की सामग्री की जानकारी मिल जाती है, तब उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह तुरंत कार्रवाई करे ताकि ऐसी सामग्री लोगों तक न पहुँचे और किसी तरह के कट्टरपंथ या हिंसा को बढ़ावा न मिले।

अगर अदालत टेलीग्राम को दोषी मानती है तो कंपनी पर 54.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। यह मामला सिर्फ टेलीग्राम तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इससे यह भी तय होगा कि भविष्य में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की कानूनी जिम्मेदारी कितनी होगी।

टेलीग्राम ने आरोपों पर क्या कहा?

टेलीग्राम ने ऑस्ट्रेलिया के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लगातार कार्रवाई करती रही है और उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक है।

टेलीग्राम के मुताबिक उसने केवल साल 2026 में ही आतंकवाद से जुड़े डेढ़ लाख से ज्यादा चैनलों और कम्युनिटी पर कार्रवाई की है। कंपनी का दावा है कि उसके पास ऐसी टीम और सिस्टम मौजूद हैं जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट की पहचान करके उसे हटाते हैं। टेलीग्राम का कहना है कि वह अदालत में इन आरोपों का जवाब देगा और कानूनी लड़ाई लड़ेगा।

हालाँकि ऑस्ट्रेलियाई एजेंसी का कहना है कि कार्रवाई तभी मायने रखती है जब वह समय पर की जाए। अगर किसी हिंसक या आतंकी वीडियो को लाखों लोग पहले ही देख चुके हों, तो बाद में उसे हटाने का फायदा बहुत कम रह जाता है। यही बात अब अदालत में भी अहम मुद्दा बनने वाली है।

रूस ने टेलीग्राम के संस्थापक पर क्या आरोप लगाए?

ऑस्ट्रेलिया की कार्रवाई के एक दिन पहले रूस ने भी टेलीग्राम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल ड्यूरोव के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस यानी FSB का कहना है कि टेलीग्राम पर ऐसे कई चैनल, चैट और बॉट चल रहे थे जिनका इस्तेमाल यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसियाँ रूस के अंदर लोगों की भर्ती करने, तोड़फोड़ की घटनाओं की योजना बनाने, साइबर अपराध और आतंकी गतिविधियों के लिए कर रही थीं।

रूस का आरोप है कि टेलीग्राम ने सरकार की ओर से भेजे गए बड़ी संख्या में अनुरोधों के बावजूद ऐसे चैनलों और कंटेंट को नहीं हटाया। FSB का दावा है कि साल 2022 के बाद से टेलीग्राम से जुड़े डेढ़ लाख से ज्यादा मामलों की जाँच की गई है।

इसी आधार पर रूस ने पावेल ड्यूरोव के खिलाफ आतंकवाद में मदद करने का मामला दर्ज किया है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

अगर रूस के कानून के तहत ये आरोप साबित होते हैं तो ड्यूरोव को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। हालाँकि अभी यह मामला जाँच और कानूनी प्रक्रिया के दौर में है।

पहले भी विवादों में रह चुका है टेलीग्राम

यह पहली बार नहीं है जब टेलीग्राम और उसके संस्थापक कानूनी मुश्किलों में फंसे हैं। साल 2024 में फ्रांस ने भी पावेल ड्यूरोव को हिरासत में लिया था। आरोप था कि टेलीग्राम का इस्तेमाल ड्रग तस्करी, बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री और दूसरे गैरकानूनी कामों के लिए किया जा रहा है तथा कंपनी इन मामलों में पर्याप्त सहयोग नहीं कर रही।

बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन फ्रांस में जाँच अब भी जारी है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में टेलीग्राम पर अलग-अलग देशों की नजर लगातार बनी हुई है।

आखिर टेलीग्राम पर बार-बार सवाल क्यों उठते हैं?

टेलीग्राम को दुनिया भर में एक ऐसा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म माना जाता है जो यूजर की निजता को काफी महत्व देता है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और सबसे बड़ा विवाद भी।

एक तरफ आम यूजर चाहते हैं कि उनकी निजी बातचीत सुरक्षित रहे और कोई उस पर नजर न रख सके। दूसरी तरफ सरकारों और जाँच एजेंसियों का कहना है कि इसी गोपनीयता का फायदा उठाकर अपराधी, साइबर ठग और कट्टरपंथी संगठन अपने नेटवर्क चलाते हैं।

यही वजह है कि हर बार जब किसी बड़े अपराध, ऑनलाइन ठगी या आतंकवादी नेटवर्क का खुलासा होता है तो टेलीग्राम का नाम भी चर्चा में आ जाता है। हालाँकि कंपनी का कहना है कि वह अपराधियों का साथ नहीं देती, बल्कि यूजर की प्राइवेसी और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है। अब अदालतें और जाँच एजेंसियाँ तय करेंगी कि इन दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

लेकिन आखिर अपराधियों की पहली पसंद क्यों बन गया टेलीग्राम?

यही सबसे बड़ा सवाल है। आखिर ऐसा क्या है जो साइबर ठग, हैकर, ऑनलाइन स्कैम चलाने वाले गिरोह और कट्टरपंथी संगठन WhatsApp या दूसरे ऐप्स की बजाय टेलीग्राम को ज्यादा पसंद करते हैं? इसके पीछे कई तकनीकी और सिस्टम से जुड़े कारण बताए जाते हैं।

इनमें यूजर की पहचान छिपाने की सुविधा, सीक्रेट चैट, ऑटो डिलीट मैसेज, बड़े चैनल, लाखों लोगों तक एक साथ पहुँच और आसान अकाउंट बनाने जैसी कई सुविधाएँ शामिल हैं। इन्हीं वजहों से पिछले कुछ वर्षों में टेलीग्राम अपराधियों के बीच भी तेजी से लोकप्रिय हुआ है।

पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध से जुड़े कई मामलों की जाँच में टेलीग्राम का नाम सामने आया है। इसका मतलब यह नहीं है कि टेलीग्राम सिर्फ अपराधियों के लिए बना है, लेकिन इसकी कुछ सुविधाएँ ऐसी हैं जिनका गलत इस्तेमाल करना दूसरे प्लेटफॉर्म की तुलना में आसान माना जाता है।

यही वजह है कि ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह, हैकर, फर्जी निवेश योजनाएँ चलाने वाले लोग और कई बार कट्टरपंथी संगठन भी इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते पाए गए हैं।

सबसे पहले बात करें पहचान छिपाने की। टेलीग्राम पर किसी से बातचीत करने के लिए हमेशा मोबाइल नंबर दिखाना जरूरी नहीं होता। यूजर सिर्फ अपने यूजरनेम के जरिए भी दूसरे लोगों से जुड़ सकता है।

इसका फायदा यह होता है कि आम लोग अपनी प्राइवेसी बनाए रख सकते हैं, लेकिन दूसरी तरफ साइबर अपराधी भी अपनी असली पहचान छिपाकर कई अलग-अलग अकाउंट बना लेते हैं।

अगर किसी कारण से एक अकाउंट बंद भी हो जाए तो वे कुछ ही मिनटों में दूसरा अकाउंट तैयार कर लेते हैं। इससे जाँच एजेंसियों के लिए असली व्यक्ति तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है।

टेलीग्राम की एक और खासियत सीक्रेट चैट और ऑटो डिलीट मैसेज हैं। इस फीचर में भेजे गए मैसेज तय समय के बाद अपने आप डिलीट हो जाते हैं। इसका फायदा उन लोगों को भी मिलता है जो अपनी निजी बातचीत सुरक्षित रखना चाहते हैं, लेकिन कई अपराधी इसी सुविधा का इस्तेमाल इसलिए करते हैं ताकि बातचीत का कोई स्थायी रिकॉर्ड न बचे।

जाँच एजेंसियों के लिए ऐसे मामलों में सबूत जुटाना काफी मुस्किल हो जाता है। इसके अलावा टेलीग्राम पर बड़े-बड़े चैनल और ग्रुप बनाना भी बेहद आसान है। यहाँ लाखों लोगों तक एक साथ जानकारी पहुँचाई जा सकती है।

कई रिपोर्टों में सामने आया है कि कुछ कट्टरपंथी संगठन और साइबर ठगी करने वाले गिरोह इसी सुविधा का इस्तेमाल अपने प्रचार या फर्जी योजनाओं को फैलाने के लिए करते हैं। अगर उनका एक चैनल बंद हो जाता है तो वे पहले से तैयार दूसरे चैनल पर अपने सभी सदस्यों को भेज देते हैं और उनका नेटवर्क लगभग बिना रुके चलता रहता है।

टेलीग्राम के सुपरग्रुप में दो लाख तक सदस्य जोड़े जा सकते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों तक एक साथ पहुँच बनाना किसी भी संगठन के लिए आसान हो जाता है। यही वजह है कि कई साइबर ठग हजारों लोगों को एक साथ जोड़कर फर्जी निवेश योजनाएँ, ऑनलाइन लोन, क्रिप्टोकरेंसी में जल्दी पैसा कमाने का लालच या दूसरी ठगी से जुड़ी जानकारी फैलाते हैं।

टेलीग्राम का सर्च सिस्टम भी अपराधियों के लिए मददगार माना जाता है। वे क्रिप्टोकरेंसी, फॉरेक्स ट्रेडिंग, ऑनलाइन जॉब्स, क्विक मनी जैसे शब्दों को खोजकर ऐसे लोगों तक पहुँच जाते हैं जो जल्दी पैसा कमाने के लालच में आ सकते हैं। इसके बाद उन्हें निजी ग्रुप या चैनल में जोड़कर तरह-तरह की योजनाओं में फंसाया जाता है।

एक और बड़ी वजह यह है कि टेलीग्राम पर किसी कंपनी जैसा नाम, लोगो और प्रोफाइल बनाना ज्यादा मुश्किल नहीं है। कई ठग खुद को बैंक, सरकारी संस्था या किसी बड़ी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। कई बार लोग उन्हें असली समझ लेते हैं और अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या पैसे उनके साथ साझा कर देते हैं।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि टेलीग्राम का कंटेंट मॉडरेशन दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की तुलना में कम सख्त माना जाता है। आरोप यह है कि कई बार अवैध चैनल, ठगी से जुड़े ग्रुप या आपत्तिजनक सामग्री लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनी रहती है।

हालाँकि टेलीग्राम इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि वह लगातार आतंकवाद, हिंसा और गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़े कंटेंट पर कार्रवाई करता है। टेलीग्राम का इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है। डार्क वेब की तरह यहाँ किसी विशेष तकनीकी जानकारी या अलग सॉफ्टवेयर की जरूरत नहीं पड़ती।

कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल में ऐप डाउनलोड करके कुछ ही मिनटों में इसका इस्तेमाल शुरू कर सकता है। इसी कारण नए लोग भी आसानी से ऐसे नेटवर्क तक पहुँच जाते हैं जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी करते हैं।

कई रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल नए लोगों की भर्ती के लिए किया जाता है। शुरुआत में उन्हें वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन कमाई या घर बैठे पैसे कमाइए जैसे आकर्षक ऑफर दिए जाते हैं।

जब लोग इन ऑफरों में रुचि दिखाते हैं तो उन्हें निजी चैनलों में जोड़कर फर्जी निवेश, साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और दूसरे ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके सिखाए जाते हैं। यही कारण है कि कई देशों की जांच एजेंसियाँ टेलीग्राम पर लगातार नजर बनाए रखती हैं।

टेलीग्राम बाकी मैसेजिंग ऐप्स से अलग कैसे है?

टेलीग्राम सिर्फ विवादों की वजह से लोकप्रिय नहीं हुआ है। इसकी कई ऐसी सुविधाएँ हैं जो इसे दूसरे मैसेजिंग ऐप्स से अलग बनाती हैं। इस प्लेटफॉर्म पर बड़ी-बड़ी फाइलें आसानी से भेजी जा सकती हैं, क्लाउड स्टोरेज की सुविधा मिलती है, एक ही अकाउंट को कई डिवाइस पर एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है और बड़े ग्रुप तथा अनलिमिटेड चैनल बनाए जा सकते हैं।

यूजरनेम के जरिए बातचीत, सीक्रेट चैट, ऑटो डिलीट मैसेज और तेज स्पीड जैसी सुविधाओं की वजह से भी करोड़ों लोग टेलीग्राम को पसंद करते हैं। यही फीचर्स आम यूजर्स के लिए सुविधाजनक हैं, लेकिन गलत हाथों में पड़ने पर इनका दुरुपयोग भी हो रहा है।

क्या टेलीग्राम पूरी तरह दोषी है?

इस पूरे विवाद का दूसरा पक्ष भी है। टेलीग्राम लगातार यह कहता आया है कि उसका मकसद लोगों की निजता और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा करना है। कंपनी का दावा है कि वह हर साल लाखों आपत्तिजनक पोस्ट, चैनल और आतंकवादी समूहों को हटाती है।

उसका यह भी कहना है कि केवल 2026 में ही आतंकवाद से जुड़े डेढ़ लाख से ज्यादा समुदायों पर कार्रवाई की गई है। दूसरी तरफ कई देशों की सरकारों और जाँच एजेंसियों का कहना है कि जब किसी प्लेटफॉर्म को किसी आपत्तिजनक या आतंकवादी सामग्री की जानकारी दी जाती है तो उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि अगर ऐसी सामग्री लंबे समय तक ऑनलाइन रहती है तो उससे हिंसा और कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल सकता है।

यही वजह है कि आज दुनिया भर में यह बहस चल रही है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यूजर की निजता ज्यादा महत्वपूर्ण है या समाज और देश की सुरक्षा। आने वाले समय में अदालतों के फैसले इस सवाल का जवाब काफी हद तक तय करेंगे।

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विवेकानंद मिश्र
विवेकानंद मिश्र
एक पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर। राजनीति, संस्कृति, समाज से जुड़ी अनसुनी कहानियाँ सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध।

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