संसद में महिला आरक्षण यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन बिल समेत 3 संविधान संशोधन बिल सदन की पटल पर चर्चा के लिए रखे गए। चर्चा में हिस्सा लेते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वह राज्यों से वादा करते हैं और गारंटी देते हैं कि किसी की राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा।
महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर उन्होंने कहा कि देश में जब भी चुनाव हुए हैं, उसमें महिलाओं के अधिकारों का जिन लोगों ने विरोध किया है, उनका हाल बुरा हुआ है।
परिसीमन पर उत्तर-दक्षिण की राजनीति करने वालों को PM मोदी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा, अन्याय नहीं होगा। पहले के अनुपात को मेंटेन करने का आश्वासन और गारंटी भी दिया।
Speaking in the Lok Sabha. https://t.co/AsiBPaaoEg
— Narendra Modi (@narendramodi) April 16, 2026
मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए- पीएम
पीएम ने कहा कि अगर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विपक्ष विरोध करेगा, तो इसका राजनीतिक लाभ मुझे होगा। लेकिन अगर सभी साथ चले तो किसी का भी फायदा नहीं होगा। मुझे क्रेडिट नहीं चाहिए। ये पास हो गया, तो मैं सरकारी खर्चे से फोटो छपवाकर क्रेडिट दे दूँगा। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूँ।
संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ आँकड़ों का खेल या लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुधार तक सीमित नहीं है। बल्कि लोकतंत्र की जननी के रूप में ये निर्णय भारत का कमिटमेंट है। ये सांस्कृतिक कमिटमेंट है। इसी कमिटमेंट के कारण 20 से अधिक राज्यों की पंचायतों में 50% आरक्षण मिला है।
पीएम मोदी ने कहा, “मैं सदन के साथियों को कहना चाहता हूँ कि साथियों, हम भ्रम में न रहें। हम उस अहंकार में न रहे, कि देश की नारीशक्ति को हम कुछ दे रहे हैं। जी नहीं, ये नारीशक्ति का हक है। हमने कई दशकों से उसे रोका हुआ है, आज उसका प्रायाश्चित करके उसे पाप से मुक्ति पाना होगा।
हर बार कोई तकनीकी पेंच लगाकर महिला आरक्षण को रोका गया। हिम्मत नहीं है उसे रोकने के लिए, लेकिन रोकना भी है। ऐसे में टेक्निकल चीजें लगाई जाती रही। अब ये भाँति-भाँति की बहाने बाजी, टेक्निकल चीजों से नहीं रुकने वाली”
पीएम ने आगे कहा कि समय की माँग है कि अब हम ज्यादा विलंब न करें। इस दरमियान राजनीतिक दल के लोगों से, संविधान के जानकारों से, महिला अधिकार समूहों से जुड़े लोगों से लगातार बात की गई। उनके मुद्दों को समझा गया। इसके बाद ये रास्ता निकाला गया, ताकि माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ा जा सके। आज हमारे निर्णय ही नहीं, नीयत पर भी नारी शक्ति की नजर है। अगर किसी की नीयत सही नहीं रही, तो महिला शक्ति उसे स्वीकार नहीं करेगी।
मैं खुद अति पिछड़े समाज से आता हूँ- पीएम
सांसद के रूप में दायित्व की बात करते हुए उन्होंने कहा कि सदन में बैठकर हममें किसी को संविधान ने देश के टुकड़े के रूप में सोचने का विकल्प नहीं दिया। हमें पूरे देश के बारे में सोचना है। हम न टुकड़ों में सोच सकते हैं और न ही निर्णय कर सकते हैं। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारे लिए समान सोच है।
सभी राज्यों को समान अवसर की बात कहते हुए उन्होंने कहा, “मैं जिम्मेदारी के साथ इस सदन में कहना चाहता हूँ कि दक्षिण हो या उत्तर, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य। निर्णय प्रक्रिया में किसी के साथ भी भेदभाव-अन्याय नहीं होगा। ये बात मैं जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। भूतकाल में जो प्रक्रिया जिस अनुपात में चल रही है, उसी अनुपात आगे भी प्रक्रिया चलेगी”
समाजवादी पार्टी के पिछड़ा कार्ड और सांसद धर्मेंद्र यादव को जवाब देते हुए उन्होंने
कहा- मैं तो अति पिछड़े समाज से आता हूँ, लेकिन मेरी जिम्मेदारी पूरे देश के प्रति है। मेरे लिए सभी लोग समान हैं। आज संविधान की वजह से मैं यहाँ हूँ। आज जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में हमारी माताएँ-बहनें कमाल कर रही हैं। इतना बड़ा सामर्थ्य, उन्हें क्यों रोक रहे हैं? उनके आने से सामर्थ्य बढ़ेगा। ये राष्ट्रहित का निर्णय है।
महिलाएँ अब ज्यादा जागरूक- पीएम
पुराने दिनों को याद करते हुए पीएम मोदी बोले कि 30 साल पहले महिलाएँ इतनी वोकल नहीं थी, लेकिन अब महिलाएँ जागरुक हैं। वो अब निर्णय प्रक्रिया में जुड़ने को तैयार हैं। ये प्रक्रिया संसद-विधानसभा में होती है।
जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें ये मानकर चलना पड़ेगा कि बीते 25 साल में महिलाएँ राजनीतिक रूप से मजबूत हो चुकी हैं। जो विरोध करेगा, उसे नुकसान उठाना पड़ेगा।
ऐसे में समझने की जरूरत है कि ग्रास रूट पर महिलाओं की जो लीडरशिप खड़ी हुई है, उन्हें अब आगे बढ़ाना पड़ेगा।
महिला आरक्षण में पिछड़ों को आरक्षण देने की बात पर पीएम मोदी ने कहा, “एक बार 33% बहनों को यहाँ आने दें, फिर वो किसे कितना प्रतिशत आरक्षण देना है, वो खुद फैसला कर लेंगी। उन्हें आने तो दें।”
महिलाओं की भागीदारी की बात करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत का मतलब सिर्फ इन्फ्रा, अच्छी रेल, अच्छी सड़कें ही नहीं हैं, हम चाहते हैं कि विकसित भारत में सबका साथ सबका विकास का मंत्र समाहित हो। देश की 50% जनता देश की नीति-निर्धारण का हिस्सा बने, ये समय की माँग है। हम पहले ही देर कर चुके हैं, इस सच्चाई को हमें स्वीकार करना होगा


