धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोप वाला TCS नासिक कांड अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। गुरुवार (16 अप्रैल 2026) को मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में ऐसे गंभीर मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों से सख्त कदम उठाने और जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की माँग की गई है। साथ ही ऐसे संगठित और जबरन धर्मांतरण को टेररिस्ट एक्ट की श्रेणी में शामिल करने की अपील की गई है।
इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित स्वत: संज्ञान मामले के तहत पेश किया गया है। याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि TCS नासिक धर्मांतरण रैकेट ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित और व्यवस्थित अभियान का हिस्सा है।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसे संगठित धर्मांतरण मामलों को विदेशों से फंडिंग मिलती है, जिसका मकसद देश की डेमोग्राफी को बदलना और भारत की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करना है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, पिछले दिनों महाराष्ट्र के नासिक में TCS के बीपीओ यूनिट से हिंदू महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, शारीरिक दुर्व्यवहार और धर्म के आधार पर भेदभाव का एक बेहद परेशान करने वाला मामला सामने आया था। यहाँ तक कि इन महिलाओं को इस्लाम कबूलने का भी दबाव डाला गया था। मामले में 5 पुरुष कर्मचारियों ने FIR दर्ज करवाई थी।
इन मामलों में आरोपित शाहरुख कुरैशी, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, तौसीफ अत्तर और शफी शेख के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए। इस मामले ने कॉरपोरेट में सक्रिय धर्मांतरण रैकेट को उजागर किया।

