अमेरिका में इन दिनों एक ऐसा मुद्दा तेजी से चर्चा में है जिसे कभी सिर्फ रहस्यमयी कहानियों या साजिश की थ्योरी मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता था- UFO यानी अनपहचाने उड़ने वाले ऑब्जेक्ट (Unidentified Flying Object)। अब हालात बदल चुके हैं। यह विषय सिर्फ बंद फाइलों या गुप्त रिपोर्ट्स तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुले मंच पर लाकर इसे बहस का हिस्सा बना दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि UFO से जुड़ी दिलचस्प फाइलों को जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर कुछ ऐसे बयान भी सामने आए हैं जो यह इशारा करते हैं कि इस मामले की हकीकत जितनी दिलचस्प है, उतनी ही संवेदनशील और खतरनाक भी हो सकती है।
UFO को लेकर इस चर्चा के बीच एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। पिछले कुछ वक्त में अमेरिका में NASA, परमाणु और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई वैज्ञानिकों की रहस्यमयी गुमशुदगी और अचानक हुई मौतें। इन घटनाओं ने इस पूरे मुद्दे को और ज्यादा उलझा दिया है और कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका में इस समय UFO को लेकर अचानक इतनी हलचल क्यों है? क्या यह सिर्फ तकनीकी रहस्य है, या इसके पीछे कोई बड़ी और छिपी हुई सच्चाई है, जिसे अब सामने लाया जा रहा है? यही समझने की कोशिश इस लेख में की जाएगी।
राष्ट्रपति ट्रंप का बयान और UFO फाइलों के खुलासे की शुरुआत
इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए उस बयान से शुरुआत करनी होगी जिसने बहस को अब अचानक तेज कर दिया। ट्रंप ने एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा है कि उन्होंने रक्षा विभाग को UFO और अनआईडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना (UAP) से जुड़ी सरकारी फाइलों को जारी करने का निर्देश दिया है।
उन्होंने कहा, “आप लोग इस विषय में काफी दिलचस्पी रखते हैं, इसलिए मैंने सोचा कि यही सही मंच है यह बताने के लिए कि प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार को कई बेहद दिलचस्प दस्तावेज मिले हैं और अब उनकी रिलीज जल्द शुरू होगी। इससे आप देख सकते हैं कि क्या वह घटना सही है।”
JUST IN: President Trump has directed Secretary of Defense Pete Hegseth to release government documents related to UFOs:
— Fox News (@FoxNews) April 17, 2026
“We found many very interesting documents, I must say. And the first releases will begin very, very soon. So you can go out and see if that phenomena is… pic.twitter.com/rDqUF8iPJk
यह बयान कई वजहों से अहम है। पहली तो ये कि यह सीधे-सीधे इस बात को स्वीकार करता है कि सरकार के पास UFO से जुड़ी जानकारी बड़ी मात्रा में मौजूद है। दूसरी ये कि यह संकेत देता है कि इन फाइलों को अब सार्वजनिक करने का एक सुनियोजित प्रयास चल रहा है। इतिहास को देखें तो अमेरिकी सरकार ने हमेशा UFO से जुड़े मामलों को सीमित तरीके से ही साझा किया है।
20वीं सदी में Project Blue Book जैसे प्रोग्राम चलाए गए, जिनमें हजारों मामलों की जाँच हुई लेकिन अंत में यही कहा गया कि एलियन से जुड़ा कोई ठोस सबूत नहीं मिला। अब अगर दशकों बाद फिर से फाइलें खोलने की बात हो रही है, तो यह अपने आप में बड़ा बदलाव है।
पेंटागन, संसद और UFO वीडियो: जिज्ञासा नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का बना मुद्दा
ट्रंप के बयान के बाद अमेरिकी संसद की एक टास्क फोर्स ने पेंटागन को पत्र लिखकर 45 से अधिक वीडियो और दस्तावेज माँगे। ये वीडियो 2019 के बाद की घटनाओं से जुड़े हैं और इनमें कथित तौर पर ऐसे ऑब्जेक्ट्स दिखाई देते हैं जो पारंपरिक तकनीक से मेल नहीं खाते।
इनमें ‘सिगार आकार’ की लंबी वस्तुएँ, गोलाकार उड़ती संरचनाएँ और समूह में उड़ने वाले अज्ञात ऑब्जेक्ट्स शामिल हैं। कई मामलों में यह भी दावा किया गया है कि ये वस्तुएँ हवा में स्थिर रह सकती हैं, बिना आवाज के चलती हैं और अचानक तेज गति से दिशा बदल सकती हैं। ऐसी क्षमताएँ जो मौजूदा सार्वजनिक तकनीक से मेल नहीं खातीं।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इन घटनाओं को सामान्य इलाकों में नहीं बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों, जैसे सैन्य ठिकानों, अमेरिकी एयरस्पेस और मिडिल ईस्ट में तैनात बेस के पास देखा गया। यही वजह है कि अब सांसदों ने इसे केवल रहस्य या जिज्ञासा का विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा माना है।
अगर कोई अज्ञात तकनीक अमेरिकी सैन्य क्षेत्रों के आसपास सक्रिय है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वह किसकी है और उसका उद्देश्य क्या है। हालाँकि, पेंटागन की एजेंसी AARO पहले यह कह चुकी है कि ज्यादातर UFO sightings गलत पहचान का परिणाम हैं।
लेकिन फिर भी इतने बड़े पैमाने पर वीडियो माँगे जाना और उन्हें सार्वजनिक करने की तैयारी, यह एक ऐसा विरोधाभास है जो इस पूरे मामले को और रहस्यमयी बना देता है।
‘आप मर भी सकते हैं’: UFO की सच्चाई को लेकर चौंकाने वाले दावे
UFO पर चर्चा को और सनसनीखेज बनाने वाले कुछ बयान भी सामने आए हैं। एक अमेरिकी सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि UFO से जुड़ी जानकारी इतनी संवेदनशील हो सकती है और इसके बारे में जानना लोगों के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है और जो इसको जानता है वो निशाने पर आ जाता है।
I have seen evidence so classified that just knowing it exists makes you a target. #thetruthisoutthere https://t.co/tDKbKiEtox
— Rep. Andy Ogles (@RepOgles) April 17, 2026
उन्होंने एक्स पर लिखा, “मैंने ऐसे सबूत देखे हैं जो इतने ज्यादा गोपनीय हैं कि सिर्फ यह जानना भी कि वे मौजूद हैं, आपको एक निशाना बना देता है।”
ऐसे बयान आधिकारिक रिपोर्ट का हिस्सा नहीं होते लेकिन वे यह जरूर दिखाते हैं कि इस विषय को लेकर अंदरखाने किस स्तर की गंभीरता या चिंता हो सकती है। इस तरह के दावे दो तरह के संकेत देते हैं। पहला ये कि जानकारी की चौंकाने वाली हो सकती है और दूसरा यह कि उसका असर केवल वैज्ञानिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक भी हो सकता है।
इसी बीच बराक ओबामा जैसे नेताओं के पुराने बयान भी फिर चर्चा में आ गए हैं, जिनमें उन्होंने UFO के अस्तित्व को पूरी तरह खारिज नहीं किया था लेकिन किसी बड़े एलियन षड्यंत्र से इनकार किया था। यानी एक तरफ आधिकारिक संस्थाएँ सावधानी बरत रही हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक बयान इस विषय को और रहस्यमयी बना रहे हैं।
वैज्ञानिकों की गुमशुदगी और Daily Mail की रिपोर्ट से बढ़ा संदेह
UFO बहस के बीच जो दूसरी बड़ी कहानी उभरकर आई है, वह है वैज्ञानिकों की रहस्यमयी गुमशुदगी और मौत। Daily Mail की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में करीब 11 ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें NASA, एयरफोर्स, न्यूक्लियर और हाई-टेक रिसर्च से जुड़े लोग या तो अचानक गायब हो गए या संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। इनमें UFO से जुड़े लोग भी शामिल थे।
इनमें रिटायर्ड जनरल विलियम नील मैककासलैंड का मामला सबसे चर्चित है। वे एयर फोर्स रिसर्च लेबोरेटरी के पूर्व प्रमुख रहे हैं और अचानक बिना फोन, बिना ट्रैकिंग डिवाइस के घर से निकलने के बाद लापता हो गए। इसी तरह एयरोस्पेस इंजीनियर मोनिका जैसिंटो रेजा जो एडवांस एयरोस्पेस प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही थीं, एक हाइकिंग ट्रिप के दौरान गायब हो गईं थीं।
आज तक उनका कोई सुराग नहीं मिला। इसके अलावा फ्यूजन एनर्जी, केमिकल बायोलॉजी और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े कई वैज्ञानिक या तो मारे गए या रहस्यमयी हालात में उनकी मौत हुई। हर केस में अलग-अलग परिस्थितियाँ बताई जा रही हैं, लेकिन जब इन्हें एक साथ देखा जाता है, तो सवाल उठता है कि यह सिर्फ संयोग है या फिर किसी बड़े पैटर्न का हिस्सा।
इनमें UFO क्षेत्र से जुड़ीं 34 साल की उम्र में मृत मिलीं एमी एस्क्रिड्ज भी शामिल हैं। एंटी-ग्रेविटी टेक पर एक्सपेरिमेंट कर रही एमी ने कहा था कि उनकी जान खतरे में पड़ सकती है। एमी की जून 2022 में अलबामा में कथित तौर पर उनके सिर में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। हालाँकि, न तो पुलिस और न ही मेडिकल जाँच करने वालों ने कभी हुई जाँच की कोई जानकारी सबके सामने जारी की है।
अपनी मौत से पहले वह एंटी-ग्रेविटी टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रही थीं और उसे डेवलप करने की कोशिश कर रही थीं जो ग्रेविटी को कंट्रोल करने या कैंसल करने का एक तरीका है। UFO रिसर्चर्स ने एंटी-ग्रेविटी प्रोपल्शन पर भी काफी चर्चा की और उन्होंने दावा किया है कि यह एडवांस्ड टेक्नोलॉजी ही एलियन स्पेसक्राफ्ट को नामुमकिन स्पीड तक पहुँचने में मदद करती है। कॉन्स्पिरेसी थ्योरिस्ट्स ने यह भी दावा किया है कि US मिलिट्री सालों से इस टेक्नोलॉजी पर एक्सपेरिमेंट कर रही है लेकिन सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि एलियन टेक्नोलॉजी मौजूद है।
अमेरिका की सीक्रेट लैब की सीक्रेट फाइल्स
डेली मेल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका की सबसे गुप्त परमाणु प्रयोगशालाओं में शामिल लॉस एलामोस नेशनल लेबोरेटरी (LANL) के एक वरिष्ठ साइबर सुरक्षा अधिकारी की मौत के बाद उनके पीछे कुछ सीक्रेट फाइलें मिली हैं। इन फाइलों में यह दिखाया गया है कि अमेरिकी सरकार लंबे समय से UFO का अध्ययन कर रही है।
इन सीक्रेट फाइल्स में आंतरिक मेमो, वैज्ञानिक रिपोर्ट और तस्वीरें शामिल हैं। यह लैब उत्तरी न्यू मैक्सिको में स्थित है जो सांता फे से लगभग 35 मील उत्तर-पश्चिम में है। यह जगह UFO से जुड़ी कहानियों के कारण भी चर्चा में रहती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अधिकारी की मौत के बाद जब उनके बेटे जॉनी जब उनका सामान देख रहे थे तब उन्हें कुछ फाइलें मिलीं जिन पर ‘एटमॉस्फेरिक एनॉमलीज’ (वायुमंडलीय असामान्य घटनाएँ) लिखा हुआ था। इसके बाद एक खोजी पत्रकार जेरेमी कॉर्बेल ने इनका अध्ययन किया और उन्होंने डेली मेल से कहा, “यह हमारे सैन्य तंत्र के अंदर UFO पर किया गया एक असली और उच्च स्तर का वैज्ञानिक अध्ययन है।”
कॉर्बेल ने दावा किया कि इन दस्तावेजों में सरकार के उच्च स्तरीय बैठकों के रिकॉर्ड और UFO के प्रोपल्शन सिस्टम (उड़ान तकनीक) से जुड़े वैज्ञानिक अध्ययन शामिल हैं। कॉर्बेल ने कहा, “लॉस एलामोस हमेशा से एक ऐसी जगह रही है, जहां UFO से जुड़े अध्ययन के तत्व मौजूद थे… ये दस्तावेज 100 प्रतिशत सबूत हैं कि लॉस एलामोस इस विषय को बहुत गंभीरता से ले रहा था।”

FBI ने शुरू की जाँच, व्हाइट हाउस की सक्रियता और विदेशी साजिश की आशंका
इन घटनाओं के बाद अमेरिकी सरकार ने जाँच तेज कर दी है और फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) को इसमें शामिल किया गया है। व्हाइट हाउस ने साफ कहा है कि सभी मामलों को एक साथ जोड़कर देखा जाएगा ताकि यह समझा जा सके कि क्या इनके बीच कोई संबंध है।
पूर्व FBI अधिकारी क्रिस स्वेकर ने यह संभावना जताई है कि विदेशी ताकतें अमेरिकी वैज्ञानिकों को निशाना बना सकती हैं, ताकि संवेदनशील जानकारी हासिल की जा सके। यह थ्योरी पूरी तरह नई नहीं है। कोल्ड वॉर (शीत युद्ध) के समय से ही वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों को टारगेट करने के मामले सामने आते रहे हैं।
हालाँकि अभी तक इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि मौजूदा घटनाएँ इसी तरह की किसी साजिश का हिस्सा हैं, लेकिन जिन लोगों को निशाना बनाया गया, उनका काम और प्रोफाइल इस आशंका को पूरी तरह खारिज भी नहीं होने देता।
UFO साइटिंग्स, वायरल वीडियो और सच्चाई बनाम कल्पना की जंग
इसी दौरान UFO साइटिंग्स के कुछ नए वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा राइट-पैटर्सन एयरफोर्स बेस के पास देखी गई रोशनियों की हो रही है। वीडियो में ट्रैंगल पैटर्न में उड़ती लाइट्स दिखाई देती हैं, जो बाद में अलग-अलग दिशाओं में बँट जाती हैं।

कुछ लोगों ने इसे एलियन गतिविधि बताया जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैराशूट फ्लेयर्स या सैन्य अभ्यास का हिस्सा हो सकता है। एक तरफ वैज्ञानिक और सैन्य विशेषज्ञ तार्किक स्पष्टीकरण देते हैं, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया और कुछ स्वतंत्र शोधकर्ता इसे एलियन या अज्ञात तकनीक से जोड़ते हैं।
अगर आने वाले समय में UFO से जुड़ी फाइलें वास्तव में सार्वजनिक होती हैं और FBI की जाँच में कोई कड़ी सामने आती है, तो यह मामला दुनिया के सबसे बड़े खुलासों में बदल सकता है। फिलहाल यह कहानी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ सच्चाई और रहस्य के बीच की दूरी अभी भी बनी हुई है।


