जिनके कल्याण के नाम पर बना राज्य, वही लोग उस गड्ढे से पानी पीने को मजबूर जिसमें लोटते हैं सूअर: Video वायरल होने के बाद जगे झारखंड के CM हेमंत सोरेन, फिर पहुँचा ट्यूबवेल

जन कल्याण के नाम पर बिहार से अलग हुए झारखंड को 26 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी यहाँ जनता के कल्याण की तस्वीर धुंधली है। यहाँ जनजातीय समाज के लोग वही पानी पीने को मजबूर हैं, जहाँ जंगली सूअर नहाते हैं। कोडरमा जिले से इसका वीडियो सामने आया है, जो कई सवाल खड़े कर रहा है। यहाँ जो पानी पीते हैं, वही पानी जंगली सूअर भी पीते और नहाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, मरकच्चो प्रखंड के डगरनवां पंचायत स्थित कारी पहाड़ी चटनिया दह गाँव में रहने वाले जनजातीय समाज के 100 लोग रहते हैं, जो पिछले 20 वर्षों से पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन ग्रामीणों के पास पीने का पानी के लिए कोई स्रोत नहीं है, मजबूरन इन्हें जोरिया, डोभा और नदी के किनारे गड्ढा खोदकर पानी निकालना पड़ता है। चिंताजनक बात यह है कि इसी पानी में जंगली सूअर नहाते और पानी पीते हैं।

इतना ही नहीं दूषित पानी से लोग बीमार पड़ते हैं, तो गाँव में कोई अस्पताल भी नहीं है। ऐसा डगरनवां पंचायत के सभी गाँवों में हैं, यहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। आसपास कोई स्वास्थ्य केंद्र नहीं है, बीमार पढ़ने पर कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

सुतिब्रो गोस्वामी नाम के पत्रकार ने ग्रामीणों की आवाज बनकर सोशल मीडिया पर उनकी इस हालत की वीडियो शेयर की है। वीडियो वायरल होने के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वीडियो पर संज्ञान लेते हुए कोडरमा के जिलाधिकारी से ग्रामीणों को मदद पहुँचाने के आदेश दिए हैं। हालाँकि, अब तक जिला प्रशासन की कार्रवाई को लेकर कोई अपडेट सामने नहीं आया है।