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यमाल मुस्कुराया, सालाह चमके और काबो वर्दे ने दुनिया रोक दी: FIFA विश्व कप में अंडरडॉग्स की रात

फुटबॉल की खूबसूरती यही है कि यहां हर रात एक नई कहानी जन्म लेती है। कहीं स्पेन का दबदबा दिखा, कहीं सालाह का जादू चला, तो कहीं छोटे से काबो वर्दे ने दिग्गज उरुग्वे के सामने हार मानने से इनकार कर दिया।

गुजरे दिनों फीफा (FIFA) विश्व कप में जो खेल प्रेमियों को देखने मिला, वह किसी जादू से कम नहीं था। एक के बाद एक लगातार रोमांचक मुकाबले, जो आपको रात भर सोने न दें।

सर्वप्रथम, बीती रात अटलांटा स्टेडियम में 2010 विश्व कप विजेता स्पेन का मुकाबला पिछले संस्करण में अर्जेंटीना को चौंका चुकी सऊदी अरब की टीम से था। पिछले मैच में हुई गलतियों से सबक लेते हुए स्पेनिश टीम के कोच लुई डे ला फुएन्ते ने अपनी प्लेइंग इलेवन में कुछ बदलाव किए। मिडफील्ड में दानी ओल्मो को अधिक आक्रामक भूमिका दी गई, जिससे पेड्री को आगे बढ़कर खेल रचने की अधिक स्वतंत्रता मिली।

वहीं लेफ्ट विंग पर गावी की जगह एलेक्स बाएना को मौका दिया गया। साथ ही चोट से उबरकर लामीन यमाल भी टीम में वापसी कर रहे थे।

इस बार स्पेनिश टीम अपने पिछले मैच की तुलना में कहीं अधिक संतुलित और आत्मविश्वास से भरी नजर आ रही थी। मैच के शुरुआती मिनटों से ही स्पेन ने विपक्षी गोलपोस्ट पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। रोड्री, पेड्री और दानी ओल्मो लगातार फॉरवर्ड लाइन के लिए मौके तैयार कर रहे थे।

मैच के दसवें मिनट में ही लामीन यमाल ने शानदार गोल दागकर स्पेन को बढ़त दिला दी। इसके बाद सऊदी अरब की टीम कुछ संभल पाती, उससे पहले ही सेंट्रल फॉरवर्ड मिकेल ओयारजाबाल ने दो गोल दागकर मैच के पच्चीसवें मिनट से पहले ही स्पेन को 3-0 से आगे कर दिया।

स्पेन का दबदबा पूरे मैच में साफ दिखाई दे रहा था। पहले हाफ में ही उसने मुकाबले की दिशा लगभग तय कर दी थी। दूसरे हाफ की शुरुआत में एक और गोल के साथ स्पेन की बढ़त 4-0 हो गई। लामीन यमाल की वापसी ने टीम के आक्रमण को अतिरिक्त धार दी थी। यह मैच 4-0 से जीतकर स्पेन ग्रुप एच में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया।

मैं खबर पढ़ रहे तमाम साथियों का ध्यान एक उन्नीस वर्षीय खिलाड़ी की ओर भी दिलाना चाहूंगा, जिसे शायद उतनी चर्चा नहीं मिलती जितनी वह डिजर्व करता है। इस खिलाड़ी का नाम है पाऊ कुबार्सी।

कम उम्र में ही पाऊ कुबार्सी स्पेन की रक्षापंक्ति के महत्वपूर्ण सदस्य बन चुके हैं। डिफेंस में उनका संयम, पोजिशनिंग और खेल की समझ उन्हें अपनी पीढ़ी के सबसे प्रतिभाशाली सेंटर-बैक खिलाड़ियों में शामिल करती है। बड़े मंच पर जिस परिपक्वता के साथ वह खेलते हैं, वह वाकई प्रशंसनीय है।

आगे, रात साढ़े बारह बजे लॉस एंजिलिस स्टेडियम में केविन डी ब्रुएना की बेल्जियम का मुकाबला ईरान की टीम से था। यहां एक ऐसा परिणाम सामने आया जिसकी बहुत कम लोगों ने कल्पना की होगी। ईरान ने बेल्जियम जैसी मजबूत टीम को 0-0 की बराबरी पर रोक दिया। इस नतीजे के बाद ग्रुप जी की स्थिति और भी रोचक हो गई।

इसके बाद मियामी में ग्रुप एच के एक अन्य मुकाबले में मार्सेलो बिएल्सा की उरुग्वे को काबो वर्दे का सामना करना था। उरुग्वे के लिए यह मैच जीतना बेहद जरूरी था। दूसरी ओर, काबो वर्दे पहले ही इस विश्व कप में स्पेन के खिलाफ प्रभावशाली प्रदर्शन कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच चुकी थी।

मार्सेलो बिएल्सा ने अपनी टीम को 4-2-3-1 फॉर्मेशन के साथ मैदान में उतारा। उगार्ते और वालवर्दे टीम के लिए यह मैच जीतना चाहते थे। वहीं काबो वर्दे के गोल की जिम्मेदारी एक बार फिर उनके अनुभवी गोलकीपर वोज़िन्हा के कंधों पर थी।

मैच शुरू होते ही काबो वर्दे ने भी आक्रामक इरादे दिखाए। दोनों टीमें लगातार हमले करती नजर आईं। मैच के इक्कीसवें मिनट में काबो वर्दे को उरुग्वे के गोलपोस्ट से लगभग तीस मीटर दूर फ्री-किक मिली। डिफेंसिव मिडफील्डर केविन पीना ने शानदार राइट-फुटेड शॉट लगाया और गेंद सीधे गोलपोस्ट में जा समाई। पूरी दुनिया को चौंकाते हुए काबो वर्दे ने बढ़त हासिल कर ली।

हालांकि उरुग्वे ने हार नहीं मानी। मैच के चवालीसवें मिनट में मैक्सिमिलियानो अराउजो ने हेडर के जरिए बराबरी दिलाई। इसके ठीक एक मिनट बाद अराउजो के पास पर अगुस्तिन कानोब्बियो ने गोल कर उरुग्वे को 2-1 की बढ़त दिला दी। पहला हाफ समाप्त होते-होते उरुग्वे वापसी कर चुका था।

दूसरे हाफ में काबो वर्दे ने तीन बदलाव किए और उनका असर भी दिखा। सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी हेलियो वरेला ने गोल कर स्कोर 2-2 कर दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने जीत के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन कोई और गोल नहीं हो सका।

मैच 2-2 की बराबरी पर समाप्त हुआ। उरुग्वे के लिए यह निराशाजनक परिणाम था, जबकि काबो वर्दे के लिए विश्व कप इतिहास का एक यादगार क्षण। जिस साहस और अनुशासन के साथ उन्होंने पूरे मैच में संघर्ष किया, वह प्रशंसा के योग्य है।

आगे, वैंकूवर में ग्रुप जी के मुकाबले में मिस्र ने न्यूज़ीलैंड को 3-1 से हराकर अपने समूह में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। स्टार खिलाड़ी मोहम्मद सालाह ने भी गोल दागकर दर्शकों को झूमने का मौका दिया।

अब आज रात विश्वविजेता अर्जेंटीना भारतीय समयानुसार रात साढ़े दस बजे डल्लास में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैदान में उतरेगी। एक बार फिर दुनिया की निगाहें लियो मेस्सी पर होंगी। वहीं पिछले संस्करण की उपविजेता फ्रांस रात ढाई बजे फिलाडेल्फिया में इराक का सामना करेगी।

इन सभी मुकाबलों पर आपकी नजर बनी रहनी चाहिए क्योंकि इस बार विश्व कप में शानदार फुटबॉल देखने को मिल रही है। आगे भी कई रोमांचक मुकाबले बाकी हैं। बने रहिए साथ। फुटबॉल की खबरों का सिलसिला जारी रहेगा।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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