नई दिल्ली में आयोजित ‘जनजाति संस्कृति समागम’ कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस दौरान उन्होंने उन दावों और आशंकाओं को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि UCC लागू होने से जनजातीय समाज की परंपराएँ, संस्कृति और अधिकार प्रभावित होंगे।
अमित शाह ने साफ कहा कि UCC का जनजातीय समुदायों की परंपराओं और धार्मिक जीवन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने गुजरात और उत्तराखंड में UCC लागू करते समय जनजातीय समुदायों को विशेष छूट दी है और भविष्य में भी उनकी सांस्कृतिक पहचान और अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
आज दिल्ली में देश के कोने-कोने से आए 550 से अधिक जनजातीय समाजों के भाइयों-बहनों के साथ भगवान बिरसा मुंडा जी के 150वें जयंती वर्ष समारोह में संवाद किया।
— Amit Shah (@AmitShah) May 24, 2026
धरती आबा ने उलगुलान आंदोलन के जरिए एक ओर जनजातीय समाज को एकजुट कर मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रेरित किया, तो दूसरी ओर उन्हें… pic.twitter.com/A8x80kNPqJ
UCC से जनजातीय समाज को डरने की जरूरत नहीं: अमित शाह ने दिया भरोसा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि कुछ लोग समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड जनजातीय समुदायों की परंपराओं को खत्म कर देगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। अमित शाह ने कहा, “मैं चाहता हूँ कि आप पूरे देश में यह संदेश लेकर जाएँ। लोगों से कहें कि UCC से डरने की कोई जरूरत नहीं है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनजातीय समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा जाएगा और उनके रीति-रिवाजों में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। शाह ने कहा कि जल, जंगल और जमीन जनजातीय समाज की पहचान हैं और उनकी संस्कृति को संरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “जनजातीय समाज प्रकृति की पूजा करता है और यही हमें सनातन परंपरा से जोड़ता है। आज हमें संकल्प लेना होगा कि हम अपने धर्म और आस्था की रक्षा करेंगे। यही आस्था हमें अपनी संस्कृति और देश से जोड़कर रखेगी।”
अमित शाह ने कहा कि भारत का जनजातीय समाज ‘एकता में विविधता और विविधता में एकता’ का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान निर्माताओं ने हर नागरिक को सम्मानपूर्वक अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी है और किसी को भी लालच, दबाव या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

