बॉलीवुड की फिल्मी कहानी हकीकत में बेंगलुरु की हाई-सिक्योरिटी परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल में देखने को मिली है। सुप्रीम कोर्ट के रिहाई आदेश के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर एक उम्रकैद का कैदी 8 साल पहले जेल से शान से बाहर निकल गया था। अब जेल प्रशासन को पता चला है कि जिस अदालती आदेश पर कैदी को छोड़ा गया था, वह पूरी तरह से जाली था। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है और आरोपी के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है।
यह मामला तब सामने आया जब कर्नाटक जेल विभाग के महानिदेशक (DG Prisons) आलोक कुमार को एक याचिका मिली। इसमें बताया गया कि साल 2018 में जेल से रिहा हुआ पूर्व कैदी शंकर अरुमुगम फर्जी दस्तावेज जमा करके बाहर निकला था। याचिका मिलने के बाद जब जेल अधिकारियों ने केस फाइल की दोबारा जाँच की, तो उनके होश उड़ गए। शंकर को बेंगलुरु की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फिरौती के लिए अपहरण (IPC 364A) और आपराधिक साजिश (IPC 120B) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
जाँच में पता चला कि शंकर की रिहाई के लिए जो दस्तावेज जेल प्रशासन को सौंपे गए थे, उनमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 10,000 रुपए के जुर्माने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया है। आम तौर पर अदालत के आदेश जेलों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजे जाते हैं, लेकिन शंकर के मामले में रिहाई के दस्तावेज ‘हैंड डिलीवर’ यानी हाथ से लाकर अधिकारियों को दिए गए थे। इसके बाद 13 नवंबर 2018 को जुर्माना भरकर उसे जेल से रिहा कर दिया गया था।
बेंगलुरु पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब उन्होंने रिहाई के दस्तावेजों को स्कैन किया और कोर्ट के अधिकारियों से आदेश संख्या की क्रॉस-चेकिंग की, तो कोर्ट ने साफ किया कि ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था। पुलिस ने इसे जेल अधिकारियों की एक बड़ी लापरवाही माना है, क्योंकि उन्होंने दस्तावेज का सत्यापन किए बिना ही इतने गंभीर अपराधी को छोड़ दिया। अब इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्या इस साजिश में जेल का कोई कर्मचारी भी शामिल था।
परप्पना अग्रहारा सेंट्रल जेल के प्रभारी अधीक्षक कर्ण बी. क्षत्री की शिकायत पर पुलिस ने कैदी नंबर 12503 (शंकर ए.) के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का नया मामला दर्ज किया है।

