भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर के जिक्र किए जाने का जोरदार विरोध किया है। भारत ने साफ कहा है कि जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से हैं और इस मामले पर किसी दूसरे देश का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विदेश मंत्रालय (MEA) प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत चीन-पाकिस्तान संयुक्त बयान में भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में किए गए बेवजह के जिक्र को पूरी तरह खारिज करता है।
MEA Spokesperson Randhir Jaiswal tweets, "India categorically rejects unwarranted references to the Union Territory of Jammu & Kashmir in the Joint Statement between China and Pakistan. India's position is consistent and well-known to the concerned parties. The Union Territories… pic.twitter.com/fsQki71a0M
— ANI (@ANI) May 27, 2026
26 मई, 2026 को विदेश मंत्रालयल ने आधिकारिक जवाब दिया है और चीन पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू कश्मीर को लेकर कही गई बातों को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पर भारत के पुराने रुख को दोहराया और इस बात पर जोर दिया कि देश की संप्रभुता और अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बयान में कहा गया, “भारत का रुख एक जैसा रहा है और संबंधित पक्षों को इसकी पूरी जानकारी है। जम्मू-कश्मीर और केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख भारत के अभिन्न और अटूट हिस्से रहे हैं, हैं और हमेशा रहेंगे। इस मामले पर टिप्पणी करने का अधिकार किसी अन्य देश को नहीं है।”
नई दिल्ली ने तथाकथित चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का फिर से विरोध किया। भारत का कहना है कि इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले इलाके से होकर गुजरता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने CPEC से जुड़ी गतिविधियों के बारे में अपनी आपत्तियाँ पाकिस्तानी और चीनी, दोनों अधिकारियों तक कई बार पहुँचाई हैं।
सरकार ने चीन-पाकिस्तान बयान में ‘सीमा पार जल संसाधन सहयोग’ के बारे में किए गए जिक्र पर भी आपत्ति जताई। भारत ने तर्क दिया कि यह आधार ही गलत है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान के बीच उन इलाकों में कोई सीधी सीमा नहीं लगती, जिन पर पाकिस्तान अपना दावा करता है।
भारत ने कहा कि उसने पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 में हुए तथाकथित सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी का कुछ इलाका चीन को सौंप दिया गया था। भारत का हमेशा से यह रुख रहा है कि इस समझौते की कोई कानूनी वैधता नहीं है, क्योंकि यह इलाका पहले की रियासत जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था।
भारत का यह जवाब कश्मीर को लेकर जारी भू-राजनीतिक संवेदनशीलता और विवादित इलाकों में चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है। ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत किसी भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय संदर्भ या पहल का विरोध करेगा, जो भारत के क्षेत्रीय दावों या संप्रभुता को चुनौती देता हो।

