मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार (27 मई 2026) को रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को उनकी बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में ट्रायल कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत रद्द कर दी।
यह मामला 33 साल की मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदेहास्पद मौत से जुड़ा है, जो शादी के छह महीने के अंदर ही 12 मई की रात को अपने पति के घर में लटकी हुई पाई गईं। ट्विशा के माता-पिता के अनुसार, उनके पति और सास उनके साथ क्रूरता करते हैं और दहेज के लिए परेशान करते हैं।
इसको लेकर पति-सास के खिलाफ 15 मई को FIR दर्ज की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों में उसकी सास गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी, जबकि पति समर्थ सिंह CBI की कस्टडी में है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस देवनारायण मिश्रा की सिंगल बेंच की सुनवाई के बाद ये फैसला सुनाया। इस दौरान सास गिरिबाला सिंह द्वारा सहयोग नहीं करने की बात सामने आई। अपराध का गंभीर होना, और ट्रायल कोर्ट का सबूतों पर विचार न करना भी जमानत आदेश को रद्द करने की अहम वजह बना।
कोर्ट ने कहा, “BNS, 2023 की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दंडनीय अपराध के लिए 10वें एडिशनल सेशंस जज, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम ज़मानत आदेश रद्द किया जाता है।”
कोर्ट ने ये भी कहा है कि अंतरिम बेल मिलने के बाद गिरिबाला सिंह जाँच दल के साथ सहयोग नहीं कर रही हैं, हालाँकि उन्हें अपना स्टेटमेंट रिकॉर्ड करने और एजेंसी के साथ सहयोग करने के लिए कई नोटिस जारी किए गए थे।”
हाईकोर्ट ने ट्विशा की प्रेग्नेंसी को लेकर भी कहा, “यह भी माना हुआ फैक्ट है कि मृतक प्रेग्नेंट हो गई थी और दो महीने के अंदर उसे टर्मिनेट कर दिया गया था। कंप्लेंट करने वाली पार्टी ने आरोपी पर आरोप लगाया है, जबकि गिरिबाला सिंह ने कहा है कि मृतक खुद प्रेग्नेंसी टर्मिनेट करना चाहती थी। WhatsApp चैट से भी यह नहीं कहा जा सकता कि आरोप सिर्फ समर्थ सिंह के खिलाफ हैं, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इन सभी फैक्ट्स पर विचार नहीं किया।”

