उल्लेखनीय है कि टीएमसी के 80 विधायक हैं। इनमें से 60 विधायक पिछले दिनों ममता बनर्जी की बुलाई गई कोलकाता की बैठक में शामिल नहीं हुए थे। इस ख्याल से दो-तिहाई बहुमत यानी 52 विधायकों से अधिक होने पर इन विधायकों पर दलबदल कानून नहीं लगेगा और इन्हें अलग ग्रुप के रूप में मान्यता मिल जाएगी। इतना ही नहीं ये ग्रुप मूल टीएमसी होने का भी दावा कर सकता है।
इससे बंगाल में TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के भविष्य पर सस्पेंस पैदा हो गया है। टीएमसी के पूर्व प्रवक्ता दत्ता ने ANI न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में तृणमूल से निकाले गए दो MLA, रीताब्रत बंदोपाध्याय और संदीपन साहा के बारे में बात की। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल असेंबली में जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स में उनके सिग्नेचर जाली थे। ये मुद्दा भी विधानसभा स्पीकर के सामने विधायक उठाने जा रहे हैं।
बंगाल में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ की एंट्री
रिजू दत्ता ने कहा कि बंगाल में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ लागू है। उन्होंने दावा किया कि असेंबली में दो-तिहाई बहुमत बनाने के लिए लगभग 50 MLA एकजुट हैं। दत्ता ने कहा, “हम दो-तिहाई बहुमत वाले हैं। लगभग 50 MLA हमारे साथ हैं। चूँकि हम असली तृणमूल कॉन्ग्रेस हैं, इसलिए विपक्ष के नेता रीताब्रत बंदोपाध्याय होंगे, न कि शोभनदेब चट्टोपाध्याय।” उन्होंने आगे कहा कि चूँकि बहुमत इन्हीं विधायकों द्वारा बनाया जाएगा, इसलिए उन्हें पार्टी का सिंबल भी रखने की इजाजत दी जानी चाहिए।

