मध्य प्रदेश के भोपाल के काजी कैंप इलाके से गिरफ्तार किए गए मोहम्मद फराज उर्फ खालिद सैफुल्लाह से पूछताछ में जाँच एजेंसियों को कई ऐसे इनपुट मिले हैं, जिनसे मामले की गंभीरता बढ़ गई है। जाँच एजेंसियों के अनुसार, फराज और नईम अब्दुल्ला साल 2047 तक देश में शरिया कानून लागू करने की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे।
फराज को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स की ओर से मध्य प्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, बैचलर युवकों का ब्रेन वॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। वह आर्थिक रूप से कमजोर, बेरोजगार, अविवाहित और आसानी से प्रभावित होने वाले युवाओं को अपने प्रभाव क्षेत्र में लाने की कोशिश कर रहा था।
एजेंसियों का दावा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं तक पहुँच बनाकर उन्हें जिहादी बनाने की योजना पर काम किया जा रहा था।
सोशल मीडिया बना नेटवर्क का माध्यम, डिजिटल जाँच तेज
जाँच एजेंसियों की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि फराज पिछले करीब चार वर्षों से टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। आरोप है कि वह अलग-अलग ग्रुप्स बनाकर युवाओं को जोड़ता था और उनमें वीडियो व अन्य सामग्री साझा करता था। इसी के जरिए युवाओं को प्रभावित करने और नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।
ATS ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया है और फोरेंसिक जाँच शुरू कर दी गई है। मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियाँ, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और संपर्क सूची की जाँच की जा रही है। साथ ही बैंकिंग रिकॉर्ड और विदेशी फंडिंग के पहलू भी जाँच के दायरे में हैं।
देवबंद कनेक्शन और नईम की गिरफ्तारी से खुलीं नई परतें
फराज की निशानदेही पर उत्तर प्रदेश के देवबंद से नईम अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया गया। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, नईम की भूमिका फराज को विदेशी संपर्कों तक पहुँचाने और विचारधारात्मक रूप से जोड़ने में अहम मानी जा रही है। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद 16 जून तक रिमांड पर भेजा गया है।
जाँच में यह भी सामने आया कि फराज ने देवबंद में मजहबी तालीम हासिल की थी और इसी दौरान उसकी मुलाकात नईम से हुई थी। बाद में दोनों संपर्क में बने रहे। ATS ने गुरुवार (11 जून 2026) की तड़के करीब 3:30 बजे भोपाल के काजी कैंप इलाके में फराज के घर पर कार्रवाई की।
करीब एक दर्जन अधिकारियों की टीम, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं, पहले घर के पास पहुँची और फिर अंदर जाकर उसे हिरासत में लिया। अगले दिन उसके घर और जिस क्लीनिक में वह काम करता था, दोनों जगह ताले लगे मिले। फराज लंबे समय से बैटरी रिपेयरिंग का काम करता था और साथ ही एक क्लीनिक में कंपाउंडर के रूप में भी कार्यरत था।
स्थानीय पहचान, पारिवारिक जीवन और गतिविधियों की पड़ताल जारी
स्थानीय लोगों के अनुसार, फराज इलाके में मजहबी गतिविधियों में सक्रिय माना जाता था। बताया गया कि वह घर पर बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता था और परिवार के साथ रहता था। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि घर पर समय-समय पर मजहबी कक्षाएँ आयोजित होती थीं।
जाँच एजेंसियाँ अब उसके परिचितों, सामाजिक दायरे, कार्यस्थल और संपर्कों से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही हैं। यह भी जाँच की जा रही है युवाओं तक पहुँच बनाने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया गया और वास्तव में उससे कितने लोग जुड़े थे। फिलहाल एजेंसियाँ पूरे मामले की अलग-अलग एंगल से जाँच कर रही हैं।

