अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका-ईरान शांति समझौता पूरा हो गया है। ईरान ने भी सीजफायर की पुष्टि की है। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि युद्धविराम के बाद आगे की बातचीत जारी रहेगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी कहा है कि समझौते का अंतिम मसौदा तैयार है और 19 जून को स्विटजरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।
इसके साथ ही पश्चिम एशिया में युद्ध और सैन्य कार्रवाई बंद हो गई है। बातचीत में तत्काल अमेरिका और ईरान सैन्य कार्रवाई रोकने की बात कही गई है। इसके बाद युद्ध विराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश की जाएगी। बातचीत में लेबनान मोर्चे पर भी तनाव कम करने की बात की गई है, हालाँकि इस पर अमेरिका, ईरान और इजरायल के बयान पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं।
“The Deal with Islamic Republic of Iran is now complete. Congratulations to all!” President Donald J. Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/RdSwyEdEtO
— The White House (@WhiteHouse) June 14, 2026
ईरान ने शांति समझौते पर क्या कहा
शांति समझौते पर ईरान ने युद्ध के सभी मोर्चों पर ‘स्थायी और तत्काल युद्धविराम’ की घोषणा की है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने टेलीविजन के माध्यम से पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने युद्ध को तत्काल रोक दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को सभी के लिए खोलने और तेल की आपूर्ति करने के लिए तैयार है
दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा जिस समुद्री मार्ग से गुजरता है, वह फिर से खोला जाएगा। यह समझौते का सबसे अहम पहलू इसे माना जा रहा है। युद्ध विराम पर सहमति के बाद दुनियाभर में तेल कीमतों में गिरावट देखी जा रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों और समुद्री व्यापार पर लगी अपनी नाकाबंदी हटाने को तैयार है। हालाँकि 60 दिन की अलग से बातचीत का वक्त रखा गया है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत दूसरे अहम मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने की प्रतिबद्धता दिखाई है। परमाणु कार्यक्रम पर अलग से बातचीत के लिए तैयार है। समृद्ध यूरेनियम (enriched uranium) के भंडार पर चर्चा के लिए भी तैयार है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमति दे दी है। हालाँकि ईरान ने अभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि वह अपने पूरे परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करेगा। यही सबसे बड़ा विवादित मुद्दा बना हुआ है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसके बदले में अमेरिका हॉर्मुज की नौसैनिक नाकाबंदी हटा देगा। कुछ आर्थिक प्रतिबंधों से राहत पर चर्चा करेगा। ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों का कुछ हिस्सा जारी करेगा। आगे भविष्य में हर तरह के प्रतिबंध से राहत को लेकर बातचीत करने को तैयार है।
कुछ रिपोर्टों में 12 अरब डॉलर से 25 अरब डॉलर तक की ईरानी संपत्तियाँ मुक्त करने की चर्चा है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इजरायल वार्ता में सीधा शामिल नहीं है
इजरायल इस वार्ता में सीधा शामिल नहीं है। यही सबसे संवेदनशील बात है, क्योंकि उसने लेबनान पर हमला जारी रखे हुए हैं। कई रिपोर्टों में कहा गया है कि इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा प्रतिबंध लगाना चाहता है। लेबनान में हाल में हुए इजरायल के हमलों को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच भी मतभेद भी सामने आए थे।
इस पूरे समझौते में पाकिस्तान का दावा है कि उसने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ लगातार दावा कर रहे हैं कि इस समझौते का अंतिम मसौदा तैयार करवाने में पाकिस्तान की अहम भूमिका रही।
युद्धविराम समझौते के बावजूद सबसे मुश्किल और अहम मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम सीमित किया जाएगा या पूरी तरह खत्म होगा, ईरान को प्रतिबंधों में वास्तव में कितनी राहत दी जाएगी, इजरायल इस युद्ध विराम पर कैसा रुख अपनाएगा, ये मुद्दे अहम होंगे। इन्हीं मुद्दों पर अगले 60 दिनों में बातचीत होने की संभावना है।

