कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मोहन भागवत से पूछे RSS के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग पर सवाल, जानें- संघ प्रमुख ने क्या दिया जवाब?

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। गृह मंत्री खरगे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को दो पन्नों की एक आधिकारिक चिट्ठी भेजी है। इस चिट्ठी में उन्होंने संघ से उसके कानूनी दर्जे, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग के सोर्स और खर्चों का ब्योरा माँगा है। इस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कहा है कि संघ को किसी रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है, क्योंकि वह सरकार से कोई फंड नहीं लेता।

प्रियांक खरगे ने उठाए कानूनी दर्जे पर सवाल

प्रियांक खरगे ने अपनी चिट्ठी में संघ के बड़े नेटवर्क का हल दिया है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में संघ की 4,127 दैनिक आयोजन, 1,3 संग्रहण साप्ताहिक मिलन और मासिक मंडलियाँ चल रही हैं। इसके अलावा करीब 2,194 सम्मेलन और बैठकों से ज्यादा रूट मार्च भी आयोजित किए गए हैं।

प्रियांक खरगे का तर्क है कि इतने बड़े पैमाने पर जनता के बीच काम करने वाले संगठन को कानूनी जाँच के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने पूछा कि जब देश में अलीगढ़, ट्रस्ट, मंदिर और कंपनियाँ कानून के तहत रजिस्टर होती हैं, तो संघ को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए?

कर्नाटक के गृह मंत्री ने माँग की है कि संघ अपनी संस्थागत संरचना, पदाधिकारियों के नाम, मिलने वाले दान (Donations) और संपत्ति की पूरी जानकारी जनता के सामने रखे। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या संघ देश के नियमानुसार टैक्स चुकाता है और बिना किसी औपचारिक रजिस्ट्रेशन के इतनी बड़ी गतिविधियाँ चलाने का उसका कानूनी आधार क्या है? खरगे ने कहा कि संविधान में कोई भी संगठन कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

संघ प्रमुख मोहन भागवत का जवाब

केरल में एक कार्यक्रम के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक सरकार के इन सवालों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह सिर्फ जनता के बीच भ्रम फैलाने का एक तरीका है। RSS प्रमुख ने कहा, “भारत में कई संगठन बिना रजिस्ट्रेशन के काम करते हैं, यहाँ तक कि हिंदू धर्म का भी कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है।” उन्होंने कहा कि रजिस्ट्रेशन की जरूरत उन्हें होती है जो सरकार से पैसा लेते हैं, जबकि संघ सरकारी फंड नहीं लेता।

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने याद दिलाया कि संघ की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी और इसे चलते हुए 100 साल हो रहे हैं। आज तक किसी भी सरकार या अधिकारी ने इसके रजिस्ट्रेशन पर दबाव नहीं डाला। उन्होंने बताया कि 1960 के दशक में ही संघ ने अपना लिखित संविधान सरकार को सौंप दिया था, जिसे तब स्वीकार भी कर लिया गया था।

संघ प्रमुख ने कहा कि आयकर विभाग और अदालतों ने हमेशा RSS को व्यक्तियों का एक संगठन (एसोसिएशन ऑफ इंडिविजुअल्स) माना है और इसे टैक्स से छूट मिली हुई है। उन्होंने कहा कि संघ की सभी गतिविधियाँ खुलेआम होती हैं और इसमें कुछ भी छिपा हुआ नहीं है।