काशी रेलवे स्टेशन के सामने की अवैध ‘गंज शहीदा’ मस्जिद को हटाने का मिला नोटिस तो पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने घुसेड़ी नाक: भारत सरकार ने रगड़ दिया, जानिए पूरा मामला

उत्तर प्रदेश में वाराणसी जिले की गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस मिलने के मामले को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की कोशिश की गई। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को अल्पसंख्यकों के हक की चिंता हो गई। लेकिन भारत ने पाकिस्तान को देश के अंदरूनी मामलों में दखल देने को लेकर लताड़ा और ‘अल्पसंख्यक उत्पीड़न’ को लेकर आईना दिखा दिया।

दरअसल, वाराणसी में काशी काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है। इस परियोजना के तहत रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार के पास गंज शहीदा मस्जिद को रेलवे ने 20 जून 2026 तक खाली करने का नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कहा गया कि रेलवे की जमीन पर अवैध मस्जिद का निर्माण हुआ है, जो कि काशी रेलवे स्टेशन के विकास कार्य में बाधा बना हुआ है इसीलिए 20 जून 2026 तक मस्जिद को हटाने की माँग की गई है।

अब इस मामले पर पाकिस्तान के राष्ट्रपित आसिफ अली जरदारी ने इस गंज शहीदा मस्जिद को 1000 साल पुराना होने का दावा करते हुए मस्जिद को हटाने की निंदा की। अली जरदारी ने दावा किया कि उन्होंने भारत से मस्जिद पर एक्शल को रुकवाने की माँग की है और चेतावनी भी दी कि इससे भारत में टूट और अराजकता फैलने का खतरा है।

(फोटो साभार: X-PresOfPakistan)

अली जरदारी ने एक्स पर पोस्ट में यह भी कहा कि उन्होंने भारत से ऐसी गतिविधियों को तुरंत रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों व साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने का आग्रह किया। पाकिस्तान के राष्ट्रपति के इस पोस्ट पर भारतीय ने उन्हें भारत की आंतरिक मुद्दों पर दखल देने को लेकर जमकर घेरा। इसके बाद पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने पोस्ट पर कमेंट्स करने का ऑप्शन बंद कर दिया।

साथ ही पाकिस्तानी राष्ट्रपति के बयान पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी प्रतिक्रिया दी। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा पाकिस्तान के राष्ट्रपति की बेमतलब टिप्पणियों को भारत पूरी तरह से खारिज करता है। उन्होंने आगे कहा, “वैसे भी, उन्हें भारत के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है।”

रणधीर जायसवाल ने साफ कहा, “ये टिप्पणियाँ इसलिए भी बेतुकी हैं क्योंकि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती रही है। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है।”

पाकिस्तान की असलियत बताते हुए रणधीर जायसवाल ने कहा, “इस सच्चाई को देखते हुए, राष्ट्रपति की बातों को सिर्फ एक सोची-समझी राजनीतिक हमले के तौर पर ही देखा जा सकता है, जो कट्टरता और नफरत की पाकिस्तान की राष्ट्रीय नीतियों से प्रेरित है।”