पाकिस्तान सरकार का एक बार फिर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का कारनामा सामने आया है। मुल्क के पंजाब प्रांत में सिखों के 125 साल पुराने गुरुद्वारा श्री सिंह सभा को ढहा दिया गया। सामने आई तस्वीरों में गुरुद्वारा का ढाँचा मलबे में तब्दील होता दिखा। ये गुरुद्वारा कभी पाकिस्तान की ऐतिहासिक धरोहरों की लिस्ट में शामिल हुआ करता था।
इस शर्मनाक हरकत के बाद पाकिस्तान की उस नौटंकी का भी पर्दाफाश हो गया जिसमें वह गलियों और इमारतों के पुराने हिंदू नामों को बहाल कर रहा था। इन कदमों को पाकिस्तान के कुछ लोगों ने सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की कोशिश बताया था लेकिन अब गुरुद्वारा तोड़ने की हरकत के बाद सामने आ गया कि पाकिस्तान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों की भी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता है।
गुरुद्वारा ढहाने के बाद से दुनियाभर से सिख संगत पाकिस्तान की इस हरकत का विरोध में जुट गई हैं। पाकिस्तान में भी सिखों ने गुरुद्वारा को ढहाने का विरोध किया तो प्रशासन ने फिलहाल उसे सील कर दिया और किसी भी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक लगा दी।
कुछ रिपोर्ट्स से यह भी पता लगा कि इस गुरुद्वारे की गुंबद को चार साल पहले ही कुछ भूमाफियाओं ने तोड़ दिया था। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था। सिखों का कहना है कि उस वक्त भी पुलिस से शिकायत की गई थी लेकिन बावजूद इसके न तो इवैक्युएशन ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड और न ही पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए।

