NRC, पैन कार्ड, वोटर कार्ड…15 ‘सबूत’ कोर्ट में भारतीय नागरिक साबित करने में नाकाफी रहे, फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने सही ठहराया

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम के एक व्यक्ति को विदेशी घोषित करने के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया है। उस व्यक्ति ने भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए 15 अलग-अलग दस्तावेज पेश किए, इसके बावजूद कोर्ट ने नागरिकता के दावे को खारिज कर दिया।

व्यक्ति गुवाहाटी में एक किराए के मकान में रहता है और NRC, 1966 से अब तक वोटर लिस्ट में उसके नाम और वोटर आईडी, जमीन के कागजात, पैन कार्ड समेत कुल 15 दस्तावेज कोर्ट में पेश किए, लेकिन विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 9 के तहत उसे भारतीय नागरिक साबित करने में असफल रहे।

क्यों खारिज हुए सबूत

गुवाहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस कल्याण राय सुराना और जस्टिस शमीमा जहाँ की खंठपीठ ने कहा कि पैन कार्ड और वोटर आईकार्ड नागरिकता के सबूत नहीं है। इसके अलावा जितने दस्तावेजों कोर्ट में पेश किए गए, सबमें कुछ न कुछ कमी पाई गई। कोर्ट ने कहा कि 1951 का NRC रिकॉर्ड कम्प्यूटर से निकाला गया है, जो कानूनी एविडेंस नहीं हो सकता।

साल 2017 का स्कूल सर्टिफिकेट भी कोर्ट ने नहीं माना क्योंकि याचिकाकर्ता अपने स्कूल के हेडमास्टर, जिसका उस पर हस्ताक्षर था, उन्हें कोर्ट में पेश करने में असमर्थ रहा।

याचिकाकर्ता की उम्र को लेकर रिकॉर्ड में गड़बड़ी थी। परिवार के एक सदस्य की उम्र 1979 में 25 साल दिखाई गई थी, उसे 1989 में सिर्फ 29 साल दर्ज थी।

याचिकाकर्ता का परिवार तीन जगहों-धोबाकुरा, घुगुदोबा और हाशदोबा में रहा, लेकिन कोर्ट के सामने जो सबूत रखे गए थे, उसके मुताबिक इन तीनों पते पर रहने वाला परिवार अलग-अलग थे। इनका आपस में कोई संबंध भी नहीं था।

हालाँकि याचिकाकर्ता के पिता ने कोर्ट में गवाही दी थी, लेकिन कोर्ट बयानों के साथ-साथ लिखित सबूत पेश करने को कह रहा था। इस दौरान पिता ने जो बयान दिए, उससे वोटर लिस्ट वाले सबूत में अंतर भी था।

सभी सबूतों और गवाहों को सुनने के बाद कोर्ट इस नतीजे पर पहुँची कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल का फैसला सही है क्योंकि 15 दस्तावेज देने के बावजूद याचिकाकर्ता अपनी नागरिकता साबित करने में असमर्थ रहा।