गौतम अडानी पर अमेरिकी न्याय विभाग का बड़ा खुलासा, कहा- छवि खराब करने के लिए पिछली बाइडन सरकार ने दर्ज किया था फर्जी केस: बताया पूरी तरह से विदेशी मामला

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने शनिवार (4 जुलाई 20256) को भारतीय उद्योगपति और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने के अपने फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। पिछले महीने अमेरिकी जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफ़िस ने सरकारी वकीलों से इस मामले को बंद करने की वजह पूछी थी, जिसके जवाब में विभाग ने यह कदम उठाया।

यह मामला पिछले बाइडन प्रशासन के दौरान कथित रिश्वतखोरी से जुड़े प्रतिभूति (सिक्योरिटीज) और वायर फ्रॉड के आरोपों के तहत शुरू किया गया था।

अदालत में दायर 10 पन्नों के अपने जवाब में न्याय विभाग ने साफ किया कि यह मामला पूरी तरह विदेशी है, जिसे साबित करना बेहद मुश्किल है और यह एजेंसी की वर्तमान प्राथमिकताओं के अनुकूल नहीं है। विभाग ने साफ शब्दों में कहा कि बाइडन प्रशासन के तहत सरकारी वकीलों ने भारतीय अरबपति की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने के इरादे से एक निराधार मुकदमा शुरू किया था, जिसके सफल होने की संभावना न के बराबर थी।

अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में दिए बयान में कहा, “यह अभियोग पिछले प्रशासन के अंतिम दिनों में जल्दबाजी में खोला गया था, जिसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से सिर्फ ‘नाम और बदनाम’ करना (नेम एंड शेम) था। इसे किसी मुकदमे की वास्तविक संभावना के बिना केवल आरोप लगाने के लिए तैयार किया गया था।” विभाग ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस पूरे मामले में अमेरिका के किसी भी हित को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है।

विभाग ने आगे स्पष्ट करते हुए अपने बयान में कहा, “इस मामले में कथित ‘भुगतान’ भारतीय नागरिकों द्वारा, भारतीय कंपनियों के लिए काम करते हुए, भारत सरकार को किए गए थे, जिसमें किसी भी तरह से कोई अमेरिकी हित शामिल नहीं था।”

यह मामला साल 2024 में लगे उन आरोपों से जुड़ा था जिसमें कहा गया था कि अडानी समूह की एक सहायक कंपनी को सौर ऊर्जा संयंत्र विकसित करने की मंजूरी दिलाने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत देने की बात कही गई थी। अडानी समूह ने शुरू से ही इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था।