“अपने हथियार डाल दो, लियोनिडास।” फ़ारस का सम्राट ज़र्क्सीस अपने सामने खड़े स्पार्टा के राजा से कहता है।
लियोनिडास बिना विचलित हुए उसकी ओर देखते हैं। उनके चेहरे पर न भय है, न संशय। फिर वह केवल चार शब्द कहते हैं- “आओ… और उन्हें ले जाओ।”
480 ईसा पूर्व।
पश्चिम की सभ्यता अपने सबसे कठिन इम्तिहान के सामने खड़ी थी।
फ़ारसी साम्राज्य अपने उत्कर्ष पर था। सम्राट ज़र्क्सीस लगभग दो से तीन लाख सैनिकों की विराट सेना लेकर संपूर्ण यूनान को अपने अधीन करने निकल पड़ा था। उसके सामने छोटे-छोटे यूनानी नगर-राज्यों के पास न उतनी सेना थी, न उतने संसाधन और न ही इतना समय कि वे उस महायुद्ध की तैयारी कर सकें, जो उनके अस्तित्व का निर्णय करने वाला था।
ऐसे समय में स्पार्टा का राजा लियोनिडास आगे बढ़ता है।
विजय की आशा लेकर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्र के लिए समय खरीदने के संकल्प के साथ।
वह अपने मात्र तीन सौ स्पार्टन योद्धाओं और लगभग सात हजार यूनानी सैनिकों के साथ थर्मोपाइले के उस दुर्गम पहाड़ी दर्रे पर मोर्चा संभाल लेता है, जहाँ संख्या का अहंकार पहली बार भूगोल से टकराने वाला था।
दो दिनों तक यूनानी योद्धा फ़ारसी सेना को वहीं रोके रखते हैं। हर बीतता हुआ क्षण यूनान के लिए अमूल्य था। हर गिरता हुआ योद्धा अपने पीछे अपने राष्ट्र के लिए कुछ और समय छोड़ जाता था।
लेकिन इतिहास केवल वीरों से नहीं, विश्वासघात से भी लिखा जाता है।
एक देशद्रोही फ़ारसी सेना को वह गुप्त पहाड़ी मार्ग बता देता है, जिससे स्पार्टनों को पीछे से घेरा जा सकता था। उसी क्षण लियोनिडास समझ जाते हैं कि अब यह युद्ध जीता नहीं जा सकता।
मगर अभी भी एक विजय शेष थी- कर्तव्य की विजय।
वह अधिकांश यूनानी सैनिकों को तत्काल अपने-अपने नगर लौट जाने का आदेश देते हैं, ताकि आने वाले निर्णायक युद्ध के लिए यूनान जीवित रह सके। स्वयं पीछे हटने से इंकार कर देते हैं।
अपने तीन सौ स्पार्टन योद्धाओं के साथ वे अंतिम सांस तक रणभूमि में डटे रहते हैं। वे जानते थे कि सूर्य का अगला उदय शायद उनके लिए नहीं होगा। फिर भी किसी ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
उस दिन थर्मोपाइले में तीन सौ मनुष्य मरे थे…
लेकिन अमर हो गया था उनका साहस।
लियोनिडास और उनके तीन सौ स्पार्टन योद्धाओं ने संसार को यह सिखा दिया कि इतिहास केवल विजेताओं का नहीं होता; कभी-कभी इतिहास उन लोगों का भी होता है, जो पराजय निश्चित जानकर भी रणभूमि छोड़ने से इनकार कर देते हैं।
कुछ ऐसा ही दृश्य आज मियामी के हार्ड रॉक स्टेडियम में भी देखने को मिला।
सामने थी विश्व विजेता अर्जेंटीना। दूसरी ओर था छोटा-सा द्वीपीय देश; काबो वर्दे।
परिणाम अंततः अर्जेंटीना के पक्ष में गया, लेकिन उस रात दुनिया ने केवल एक विजेता नहीं देखा। उसने एक ऐसी टीम भी देखी, जिसने अपनी सीमित ताकत के बावजूद विश्व चैंपियन को आख़िरी क्षण तक संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया और अपने साहस से इतिहास में अपनी जगह हमेशा के लिए सुरक्षित कर ली।
मियामी में बीती रात सबकी चहेती अंडरडॉग टीम काबो वर्दे का सामना विश्व चैंपियन अर्जेंटीना से था। यह मुकाबला केवल दो टीमों का नहीं था; एक ओर फुटबॉल के महानायक लियोनेल आंद्रेस मेस्सी थे, तो दूसरी ओर काबो वर्दे के अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा, जिन पर आज पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं।
निर्धारित समय पर रेफरी ड्रू फिशर की सीटी के साथ मुकाबला शुरू होता है। अर्जेंटीना अपनी पारंपरिक अल्बीसेलेस्ते, हल्की नीली और सफेद धारियों वाली जर्सी, पहने मैदान में उतरती है। दूसरी ओर काबो वर्दे की टीम थी, जिसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था और पाने के लिए पूरा इतिहास।
सातवें मिनट में मैच का पहला अटैकिंग मूव काबो वर्दे की ओर से आता है। पंद्रहवें मिनट में लियोनेल मेस्सी पहली बार गोल पर निशाना साधते हैं, लेकिन उनका प्रयास लक्ष्य से दूर निकल जाता है।
पहले हाफ के हाइड्रेशन ब्रेक के बाद जैसे ही दोनों टीमें मैदान में लौटती हैं, लियोनेल मेस्सी अपना जादू बिखेर देते हैं। मैदान की हाफ लाइन के पास से डिफेंडर लिसांद्रो मार्टिनेज़ एक लंबा और बेहद सटीक पास डालते हैं। गेंद काबो वर्दे की डिफेंसिव लाइन और गोलकीपर के बीच आकर गिरती है। मेस्सी बिजली जैसी तेजी से गेंद तक पहुंचते हैं, शानदार फर्स्ट टच से उसे अपने नियंत्रण में लेते हैं और गोलकीपर संभल पाते, उससे पहले ही गेंद को नज़दीकी पोस्ट के पास से नेट में भेज देते हैं। अर्जेंटीना मुकाबले में 1-0 की बढ़त बना चुका था। यह ऐसा गोल था जिसे बार-बार देखा जा सकता था।
अधिकांश लोगों को उम्मीद थी कि काबो वर्दे की टीम आज केवल अनुशासित रक्षात्मक फुटबॉल खेलती दिखाई देगी। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग थी। सभी को चौंकाते हुए काबो वर्दे मौका मिलते ही अर्जेंटीना के बॉक्स की ओर तेजी से बढ़ने की कोशिश कर रही थी। अड़तीसवें मिनट में स्टीवन मोरेरा अर्जेंटीना के गोल पर हमला करते हैं, लेकिन उनका शॉट निशाने पर नहीं रहता। पैंतालीसवें मिनट में एंज़ो फर्नांदेज़ एक जोरदार शॉट लगाते हैं, मगर वोजिन्हा शानदार बचाव करते हुए गेंद को गोल में जाने से रोक देते हैं।
कुछ ही क्षण बाद पहले हाफ की समाप्ति की सीटी बजती है। अर्जेंटीना 1-0 की बढ़त के साथ ड्रेसिंग रूम की ओर लौटता है। हालांकि स्कोरबोर्ड अर्जेंटीना के पक्ष में था, लेकिन काबो वर्दे ने यह साफ कर दिया था कि वह केवल मुकाबला खेलने नहीं, बल्कि विश्व चैंपियन को हर गेंद के लिए संघर्ष करने पर मजबूर करने आई है।
दूसरे हाफ की शुरुआत होती है। काबो वर्दे पूरे आत्मविश्वास और अदम्य साहस के साथ मैदान में उतरती है। वह लगातार कभी कॉर्नर तो कभी तेज़ अटैकिंग मूव्स के ज़रिए अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही थी। चौवनवें मिनट में डिरोए दुआर्ते गोल पर निशाना साधते हैं, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं हो पाता।
मगर केवल पाँच मिनट बाद ही पूरा स्टेडियम स्तब्ध रह जाता है।
मैदान की बाईं ओर से काबो वर्दे के खिलाड़ी रयान मेंडेज़ अर्जेंटीना के बॉक्स में एक शानदार क्रॉस डालते हैं। डिरोए दुआर्ते अपने मार्कर को चकमा देते हुए गेंद तक पहुँचते हैं और बड़ी चपलता से उसे एमिलियानो मार्टिनेज़ के गोल में पहुंचा देते हैं। काबो वर्दे ने मुकाबला 1-1 से बराबर कर दिया था।
यह केवल एक गोल नहीं था। यह उस छोटे से द्वीपीय देश का एलान था कि वह विश्व विजेता के सामने झुकने नहीं आया है।
इस गोल के तुरंत बाद अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी सक्रिय हो जाते हैं। वे अब तक अपेक्षाकृत शांत रहे अपने दो अटैकर्स—लाउतारो मार्टिनेज़ और थियागो अल्माडा—को बाहर बुलाकर उनकी जगह हूलियन अल्वारेज़ और नीको गोंज़ालेज़ को मैदान में भेजते हैं।
कुछ ही देर बाद एंज़ो फर्नांदेज़ एक बार फिर दूर से गोल पर निशाना साधते हैं, लेकिन गेंद पोस्ट से काफी दूर निकल जाती है। दूसरी ओर काबो वर्दे के कोच बूबिस्ता भी तुरंत जवाबी रणनीति अपनाते हुए दो नए खिलाड़ियों को मैदान में उतारते हैं।
तिहत्तरवें मिनट में मेस्सी एक शानदार शॉट लगाते हैं, लेकिन वोजिन्हा एक बार फिर दीवार बनकर सामने खड़े हो जाते हैं और गेंद को गोल में जाने से रोक देते हैं।
समय लगातार बीत रहा था।
अस्सी मिनट तक स्कोर 1-1 से बराबर था। अब यह पूरी तरह संभव दिखाई देने लगा था कि मुकाबला अतिरिक्त समय तक जाएगा। अपनी टीम में नई ऊर्जा भरने के लिए बूबिस्ता फिर दो और बदलाव करते हैं। दूसरी ओर छियासीवें मिनट में स्कालोनी भी दो नए खिलाड़ियों को मैदान में उतारते हैं।
अठ्ठासी मिनट का खेल पूरा हो चुका था।
स्कोर अब भी बराबरी पर था।
काबो वर्दे के खिलाड़ी पूरे साहस के साथ डटे हुए थे। अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की बेचैनी अब साफ़ दिखाई देने लगी थी। विश्व चैंपियन की हर कोशिश का जवाब काबो वर्दे के खिलाड़ी पूरी ताकत से दे रहे थे। आज इस छोटी-सी टीम ने टूर्नामेंट के सबसे बड़े दावेदारों को खुलकर चुनौती दी थी।
90+5वें मिनट में मेस्सी एक शानदार हेडर लगाते हैं, लेकिन वोजिन्हा फिर एक असाधारण बचाव कर लेते हैं।
90+8 मिनट।
रेफरी ड्रू फिशर अंतिम सीटी बजाते हैं। निर्धारित नब्बे मिनट का खेल समाप्त हो चुका था। स्कोर 1-1 से बराबर था और अब मुकाबला अतिरिक्त समय में प्रवेश कर चुका था।
एक्स्ट्रा टाइम का पहला हाफ शुरू होता है।
दो मिनट के भीतर ही अर्जेंटीना को एक कॉर्नर मिलता है। लियोनेल मेस्सी गेंद लेने आगे आते हैं। उनका कॉर्नर सीधे बॉक्स के भीतर पहुँचता है। एलेक्सिस मैकएलिस्टर गेंद को हेडर से आगे बढ़ाते हैं और लिसांद्रो मार्टिनेज़ उसे बेहद करीब से गोल में पहुंचा देते हैं।
अर्जेंटीना एक बार फिर मुकाबले में बढ़त बना चुका था।
हार्ड रॉक स्टेडियम नीली और सफेद जर्सियों से गूंज उठता है। हजारों अर्जेंटीनी समर्थक राहत की सांस लेते हैं। पूरे स्टेडियम में जश्न का माहौल बन जाता है।
लेकिन काबो वर्दे अब भी हार मानने को तैयार नहीं था।
खेल दोबारा शुरू होता है। काबो वर्दे को भी एक कॉर्नर मिलता है, मगर वे उसका फायदा नहीं उठा पाते। इसके तुरंत बाद स्टीवन मोरेरा गोल की दिशा में एक और शॉट लगाते हैं, लेकिन गेंद लक्ष्य से बाहर निकल जाती है। दूसरी ओर मेस्सी भी तेज़ अटैक के बाद गोल पर निशाना साधते हैं, पर उनका प्रयास भी सफल नहीं होता।
कुछ ही देर बाद हूलियन अल्वारेज़ तेज़ रफ्तार से गेंद लेकर आगे बढ़ते हैं और गोल पर शॉट लगाते हैं, मगर गेंद फिर पोस्ट के बाहर चली जाती है।
इसके बाद अर्जेंटीना लगातार दबाव बनाए रखती है। एक के बाद एक उसे कॉर्नर मिलते रहते हैं और काबो वर्दे की रक्षापंक्ति लगातार परीक्षा देती रहती है।
मगर मैच ने अभी अपना सबसे बड़ा रोमांच दिखाना बाकी रखा था।
102वाँ मिनट।
काबो वर्दे गेंद लेकर अर्जेंटीना के बॉक्स की ओर बढ़ती है। हाफ लाइन से कुछ आगे मैदान के मध्य में मौजूद यानिक सेमेडो एक लंबा पास मैदान की बाईं ओर दौड़ रहे अपने साथी खिलाड़ी सिडनी लोपेज़ काबराल की दिशा में भेजते हैं।
काबराल अपने सामने मौजूद अर्जेंटीनी डिफेंडर को शानदार तरीके से छकाते हैं और बॉक्स की सीमा से ही दाएं पैर से एक जोरदार शॉट लगाते हैं।
एमिलियानो मार्टिनेज़ पूरी ताकत से हवा में छलांग लगाते हैं, लेकिन गेंद उनकी पहुँच से बहुत दूर निकल चुकी थी।
गेंद सीधी नेट में समा जाती है।
काबो वर्दे ने एक बार फिर मुकाबला बराबरी पर ला दिया था।
पूरा स्टेडियम कुछ क्षणों के लिए स्तब्ध रह जाता है। अर्जेंटीना के खिलाड़ियों के चेहरों पर तनाव साफ़ दिखाई देता है, जबकि काबो वर्दे के खिलाड़ी पूरे जोश के साथ अपने समर्थकों की ओर दौड़ पड़ते हैं। उस क्षण उन्होंने पूरी दुनिया को बता दिया था कि वे अंतिम सांस तक लड़ने वाले हैं।
कोच लियोनेल स्कालोनी तुरंत एक और दांव चलते हैं। वे पेनाल्टी विशेषज्ञ गोंज़ालो मोंटिएल को मैदान में उतारते हैं। मैदान में आते ही मोंटिएल विरोधी गोल की दिशा में तेज़ शॉट लगाते हैं, लेकिन उनका प्रयास भी निशाने से चूक जाता है।
इसके कुछ ही क्षण बाद एक्स्ट्रा टाइम का पहला हाफ समाप्त हो जाता है।
अब केवल पंद्रह मिनट शेष थे।
दूसरे अतिरिक्त हाफ की शुरुआत होती है।
गेंद का अधिकांश समय काबो वर्दे के हाफ में बीत रहा था। अर्जेंटीना लगातार हमले कर रही थी, जबकि काबो वर्दे हर अवसर पर जवाबी हमला करने की कोशिश कर रहा था।
111वाँ मिनट।
अर्जेंटीना को एक और कॉर्नर मिलता है।
मेस्सी गेंद को बॉक्स के भीतर भेजते हैं। क्रिस्टियन रोमेरो ऊँची छलांग लगाकर शानदार हेडर लगाते हैं। गेंद काबो वर्दे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस (Diney Borges) से डिफ्लेक्ट होकर दिशा बदल देती है और गोल में चली जाती है।
आधिकारिक रिकॉर्ड में यह गोल अर्जेंटीना के पक्ष में डाइनी बोर्जेस के ओन गोल के रूप में दर्ज किया गया।
अर्जेंटीना एक बार फिर 3-2 से आगे था।
इसके बाद काबो वर्दे ने हार नहीं मानी। उसने लगातार अर्जेंटीना के गोल पर हमले किए। कुछ क्षणों के लिए विश्व चैंपियन की टीम बैकफुट पर भी दिखाई दी। अंतिम मिनटों तक काबो वर्दे बराबरी की तलाश में पूरी ताकत से लड़ता रहा।
लेकिन 120+4 मिनट पर रेफरी ड्रू फिशर अंतिम सीटी बजा देते हैं।
अर्जेंटीना ने बेहद कठिन संघर्ष के बाद यह मुकाबला 3-2 से अपने नाम कर लिया था।
मैदान में कुल 64,478 दर्शक मौजूद थे, जिन्होंने आज कुछ ऐतिहासिक घटित होते देखा था। छोटे-से द्वीपीय देश काबो वर्दे ने विश्व विजेता अर्जेंटीना को ऐसी टक्कर दी कि एक समय के लिए स्वयं अर्जेंटीनी खिलाड़ियों को भी समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मैदान पर हो क्या रहा है। उन्होंने पूरे साहस, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मुकाबला खेला।
अर्जेंटीना ने पूरे मैच में 62 प्रतिशत समय गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। उसके खिलाड़ियों ने कुल 822 पास पूरे किए और विरोधी गोलपोस्ट की ओर 22 शॉट लगाए, जिनमें से 10 निशाने पर रहे। इतने आक्रामक खेल के बावजूद अर्जेंटीना केवल तीन गोल ही कर सकी। दूसरी ओर मजबूत इरादों के साथ मैदान में उतरी काबो वर्दे ने अर्जेंटीना के गोल पर कुल 15 शॉट लगाए, जिनमें से 5 निशाने पर रहे। यही नहीं, पिछले विश्व कप के गोल्डन ग्लव विजेता गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज़ के खिलाफ वह दो गोल दागने में भी सफल रही। यह आँकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि काबो वर्दे ने विश्व चैंपियन को आख़िरी क्षण तक संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया था।
मैच समाप्त होने के बाद लियोनेल मेसी आगे बढ़कर वोजिन्हा को गले लगाते हैं और उनके शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हैं। इसके बाद काबो वर्दे के खिलाड़ियों के आग्रह पर वह एक-एक कर सभी के साथ तस्वीरें भी खिंचवाते हैं। यह दृश्य अपने आप में बेहद भावुक था। जीत अर्जेंटीना की हुई थी, लेकिन सम्मान दोनों टीमों के हिस्से आया।
वोजिन्हा ने आज पूरे मैच में कुल आठ शानदार सेव किए, जिनमें से चार सीधे लियोनेल मेसी के प्रयासों पर थे। उन्होंने इससे पहले स्पेन और उरुग्वे जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ भी अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा था, लेकिन आज उन्हें फुटबॉल के महानतम खिलाड़ियों में से एक के सामने झुकना पड़ा। हार के बावजूद स्टेडियम में मौजूद 64,478 दर्शकों, विशेषकर अर्जेंटीनी समर्थकों, ने काबो वर्दे के खिलाड़ियों के लिए तालियाँ बजाईं। यह पल खेल भावना का एक सुंदर उदाहरण बन गया।
हमने पिछली मैच रिपोर्ट में घाना के स्वयंभू काले जादू के तांत्रिक नाना क्वाकू बोनसाम का जिक्र किया था। उन्होंने दावा किया था कि अर्जेंटीना काबो वर्दे के खिलाफ अपना मुकाबला हार जाएगी। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि लियोनेल मेसी अब इस विश्व कप में कोई और गोल नहीं कर पाएंगे।
लेकिन मैदान पर कहानी बिल्कुल अलग लिखी गई।
मेसी ने न केवल शानदार गोल किया, बल्कि पूरे मुकाबले में अर्जेंटीना के आक्रमण का नेतृत्व किया, कई बेहतरीन मौके बनाए और अपनी टीम को लगातार आगे बढ़ाते रहे। उनके कॉर्नर से दूसरा गोल बना और पूरे मैच के दौरान उन्होंने अर्जेंटीना के हमलों की धुरी की भूमिका निभाई। नाना क्वाकू बोनसाम का दावा मैदान की वास्तविकता के सामने पूरी तरह ध्वस्त हो गया।
इस गोल के साथ लियोनेल मेसी अब विश्व कप के विभिन्न संस्करणों में कुल 20 गोल कर चुके हैं। इसके साथ ही वह विश्व कप इतिहास में लगातार आठ मैचों में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी भी बन गए हैं। फुटबॉल के सबसे बड़े मंच पर उन्होंने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली।
उधर, राउंड ऑफ 32 के दो अन्य मुकाबले भी खेले गए।
एक ओर मिस्र का सामना ऑस्ट्रेलिया से था। इमाम अशूर के गोल की बदौलत मिस्र ने मैच के तेरहवें मिनट में ही बढ़त बना ली थी। लेकिन दूसरे हाफ में एक आत्मघाती गोल के कारण उसकी बढ़त समाप्त हो गई और मुकाबला 1-1 की बराबरी पर पहुंच गया। निर्धारित समय के बाद भी कोई टीम बढ़त हासिल नहीं कर सकी, जिसके चलते मैच अतिरिक्त समय तक खिंच गया। एक्स्ट्रा टाइम की समाप्ति के बाद भी स्कोर 1-1 ही रहा और आखिरकार मुकाबले का फैसला पेनाल्टी शूटआउट से हुआ। वहां मिस्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की और राउंड ऑफ 16 में अपनी जगह पक्की कर ली। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया भले ही टूर्नामेंट से बाहर हो गया, लेकिन पूरे अभियान के दौरान उसने जिस जुझारू फुटबॉल का प्रदर्शन किया, उसने निश्चित रूप से अपने देशवासियों का दिल जीत लिया। कंगारू टीम सिर ऊँचा करके अपने वतन लौटेगी।
दूसरे मुकाबले में कन्सास सिटी स्टेडियम में कोलंबिया का सामना घाना से हुआ। झॉन आरियास के गोल की बदौलत कोलंबिया ने यह मुकाबला 1-0 से अपने नाम कर लिया और राउंड ऑफ 16 में प्रवेश कर गया। अब सात जुलाई को उसका सामना स्विट्जरलैंड से होगा।
अब आज से विश्व कप के राउंड ऑफ 16 चरण के मुकाबलों का रोमांच शुरू होने जा रहा है।
आज रात भारतीय समयानुसार साढ़े दस बजे कनाडा अपने घरेलू समर्थकों के बीच एटलस लायंस यानी मोरक्को का सामना करेगी। कागज़ों पर मोरक्को इस मुकाबले की प्रबल दावेदार जरूर है, लेकिन कनाडा ने भी अब तक अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। आज उसकी अब तक की सबसे कठिन परीक्षा होगी।
इसके बाद रात ढाई बजे लेस ब्ल्यूज़ यानी फ्रांस का सामना पराग्वे से होगा। आज के मुकाबले में गोल करने के बाद लियोनेल मेसी टूर्नामेंट में अपने गोलों की संख्या सात तक पहुंचा चुके हैं। ऐसे में कीलिएन एमबाप्पे निश्चित ही गोल्डन बूट की दौड़ में उनसे पीछे नहीं रहना चाहेंगे। एक ओर फ्रांस का विस्फोटक आक्रमण होगा, तो दूसरी ओर पराग्वे की दृढ़ रक्षापंक्ति। यह मुकाबला भी बेहद दिलचस्प रहने की पूरी उम्मीद है।
तो फिलहाल अगली मैच रिपोर्ट तक के लिए अनुमति दीजिए। फुटबॉल का महासमर पूरे रोमांच पर है। साथ बने रहिएगा।


