राम मंदिर चंदा चोरी केस में प्रियंका गाँधी-केजरीवाल-संजय सिंह से भी हो पूछताछ: VHP ने अयोध्या के DSP को लिखा पत्र

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जाँच अधिकारी (IO) को पत्र लिखकर माँग की है कि विपक्षी नेताओं द्वारा लगाए गए सार्वजनिक आरोपों की भी जाँच की जाए।

VHP ने किन नेताओं के बयानों की जाँच की माँग की?

आलोक कुमार ने अपने पत्र में समाजवादी पार्टी के नेता प्रो राम गोपाल यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा के बयानों का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने सार्वजनिक मंचों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पत्र के अनुसार, राम गोपाल यादव ने करीब 20000 करोड़ रुपए के कथित घोटाले और सोना-चाँदी समेत कीमती चढ़ावे के गायब होने का दावा किया था। वहीं अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह ने लगभग 200 करोड़ रुपए नकद और हीरे-जवाहरात चोरी होने के आरोप लगाए थे।

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भी सवाल उठाया था कि क्या इतने बड़े स्तर की गड़बड़ी छोटे कर्मचारी अकेले कर सकते हैं या इसके पीछे बड़े लोगों की मिलीभगत हो सकती है।

आलोक कुमार ने कहा है कि यदि इन नेताओं के पास अपने आरोपों के समर्थन में कोई तथ्य, दस्तावेज या अन्य सबूत हैं तो उन्हें जाँच एजेंसी के सामने पेश करना चाहिए। उनका कहना है कि इससे जाँच सही दिशा में आगे बढ़ेगी और सच्चाई सामने आएगी।

SIT जाँच में अब तक क्या सामने आया?

राम मंदिर चढ़ावा मामले की SIT जाँच कई पहलुओं पर चल रही है। जाँच टीम मंदिर के बैंक खातों का मिलान कर रही है और दान राशि का रिकॉर्ड खंगाल रही है। जाँच के दौरान यह भी सामने आया है कि चोरी का मामला सामने आने से पहले मंदिर के खातों में प्रतिदिन लगभग 16 से 18 लाख रुपए जमा हो रहे थे।

जबकि मामला सामने आने के बाद यह राशि बढ़कर 24 से 26 लाख रुपए प्रतिदिन तक पहुँच गई। इसके अलावा जाँच एजेंसियाँ CCTV फुटेज की भी फोरेंसिक जाँच करा रही हैं। टीम को कुछ नए CCTV फुटेज मिले हैं, जिनसे महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

आलोक कुमार ने अपने पत्र में कहा है कि यदि जाँच में विपक्षी नेताओं के आरोप सही साबित होते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप बेबुनियाद या झूठे पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

उनका कहना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मामले में हर दावे और हर आरोप की निष्पक्ष जाँच होना जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।