दिल्ली EV पॉलिसी पर CM रेखा गुप्ता का मेगा प्लान, 2030 तक 30% EV और 32000+ चार्जिंग पॉइंट का टारगेट: राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने का रोडमैप तैयार

दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी लागू होने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि सरकार अब प्रदूषण कम करने के लिए बड़े स्तर पर काम करने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ नई नीति नहीं है, बल्कि दिल्ली को धीरे-धीरे साफ, आधुनिक और बेहतर शहर बनाने का रोडमैप है।

सरकार का लक्ष्य 31 मार्च 2030 तक दिल्ली में कम से कम 30 प्रतिशत वाहन इलेक्ट्रिक करना है। इसके लिए चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने, लोगों को सब्सिडी देने, सरकारी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक बनाने और पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर काम करने की योजना तैयार की गई है।

चार्जिंग स्टेशन, सब्सिडी और लोगों को EV अपनाने के लिए पूरा प्लान

रेखा गुप्ता ने कहा कि किसी भी EV पॉलिसी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि लोगों को चार्जिंग की सुविधा आसानी से मिले। उन्होंने बताया कि अभी दिल्ली में करीब 9 हजार चार्जिंग पॉइंट हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य इन्हें बढ़ाकर 32 हजार करना है।

इसके लिए दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (DTL), वाहन बनाने वाली कंपनियाँ (OEMs) और दूसरे सरकारी विभाग मिलकर काम करेंगे। सोसायटी और घरों में भी चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए आसान व्यवस्था बनाई गई है, ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि लोग बिना किसी झिझक के इलेक्ट्रिक वाहन खरीदें। इसी वजह से दोपहिया EV खरीदने पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। अगर कोई अपना पुराना वाहन स्क्रैप कराता है तो उसे 10 हजार रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी।

इसके अलावा रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस भी माफ रहेगी। उन्होंने कहा कि यह पूरी राशि तय समय के भीतर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए लोगों के बैंक खाते में भेजी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने बैटरी डिस्पोजल और ई-वेस्ट मैनेजमेंट की तैयारी भी शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में पर्यावरण पर कोई नया बोझ न पड़े।

प्रदूषण कम करने के लिए कई मोर्चों पर एक साथ काम करेगी सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण सिर्फ गाड़ियों से नहीं होता, इसलिए सरकार कई स्तरों पर एक साथ काम कर रही है। उन्होंने बताया कि अब सरकार जो भी नई गाड़ियां खरीदेगी या किराये पर लेगी, वे सभी इलेक्ट्रिक होंगी। इसमें पानी के टैंकर, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें और दूसरे सरकारी वाहन भी शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले से 4,500 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक इलेक्ट्रिक बनाया जाएगा। EV की संख्या बढ़ने से बिजली की माँग भी बढ़ेगी, इसलिए सरकार अभी से बिजली के ग्रिड और सब-स्टेशनों को मजबूत कर रही है।

ऐसा इसलिए ताकि लोगों को चार्जिंग के दौरान किसी तरह की दिक्कत न हो। रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार इस साल 70 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके अलावा धूल कम करने, सड़कों की सफाई बेहतर करने और प्रदूषण फैलाने वाले दूसरे कारणों पर भी लगातार काम किया जाएगा।

उन्होंने माना कि अभी यह बताना संभव नहीं है कि प्रदूषण कितने प्रतिशत कम होगा, लेकिन सरकार को भरोसा है कि इन सभी कदमों का असर धीरे-धीरे साफ दिखाई देगा।

NCR के साथ मिलकर काम, विंटर एक्शन प्लान और दिल्ली के लिए तीन बड़े लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली का प्रदूषण सिर्फ दिल्ली की वजह से नहीं है। इसका असर और कारण NCR के दूसरे राज्यों से भी जुड़े हैं। इसलिए केंद्र सरकार, हरियाणा, राजस्थान और दूसरे राज्यों के साथ मिलकर साझा रणनीति बनाई जा रही है। पुराने ट्रकों और बसों को इलेक्ट्रिक बनाने के लिए भी कई योजनाएं शुरू की गई हैं, ताकि पूरे क्षेत्र में प्रदूषण कम हो सके।

उन्होंने बताया कि इस बार सरकार ने सर्दियों से कई महीने पहले ही विंटर एक्शन प्लान जारी कर दिया है। इससे लोगों और सरकारी विभागों को पहले से पता रहेगा कि किस समय कौन-से नियम लागू होंगे। सभी विभागों, पुलिस और पर्यावरण एजेंसियों को एक साथ जोड़कर निगरानी की व्यवस्था भी मजबूत की गई है।

जब उनसे पूछा गया कि वह अपने कार्यकाल में किस काम के लिए याद की जाना चाहेंगी, तो उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता दिल्ली की कूड़ा समस्या का समाधान करना है। दूसरी प्राथमिकता सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाकर यमुना को साफ करना है और तीसरी प्राथमिकता सड़क, स्कूल, अस्पताल और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना है।