70 घटनाएँ, 8 चेहरे और CCTV की सारी फुटेज: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT रिपोर्ट सार्वजनिक, जानिए कैसे गायब हुई नोटों की गड्डियाँ

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जाँच कर रहे एसआईटी ने सोमवार (6 जुलाई 2026) रात अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक की। इसमें बताया गया है कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच के करीब 70 घटनाएँ सीसीटीवी में संदिग्ध पाई गई।

एसआईटी के अहम खुलासे

राम मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चला है कि 8 आरोपितों ने नोटों की गड्डियों को अपनी जेबें और जूतों-मौजों में छिपा कर बाहर ले गए। पहले मंदिर के चढ़ावे को गिनने के लिए बगैर जेब वाले कपड़े पहनने का नियम था और जूते-मौजे उतारकर अंदर आना होता था। इसकी अनदेखी की गई। यूनिफॉर्म तय नहीं होने से धीरे-धीरे लोगों ने अपने-अपने हिसाब से कपड़े पहनकर चढ़ावा गिनती में शामिल होने लगे और चोरी शुरू हुई।

मंदिर परिसर में बायोमैट्रिक एटेंडेंस लागू नहीं थी

राम मंदिर का चढ़ावा गिनने वाले कमरे में सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए थे। कमरे में प्रतिबंधित एंट्री के बावजूद पहचान के लिए बायोमैट्रिक आइडेंटिटी वाली व्यवस्था नहीं की गई। दानपेटियों और उनसे निकलने वाले रकम का रिकॉर्ड, डेली रिपोर्ट जैसी व्यवस्था नहीं थी। कमजोर निगरानी की वजह से आरोपितों को चोरी करने का मौका मिला।

चढ़ावे की गिनती की पूरी प्रक्रिया ही खामियों से भरी थी। डॉ अनिल मिश्रा नकदी लेनदेन और वित्तीय मामलों का प्रबंधन देखते थे। बैंकों के साथ सामंजस्य बनाने में भी उनकी अहम भूमिका थी इसलिए अनिल मिश्रा को इसको लेकर जिम्मेदार बताया गया है। उन्हें गिनती करने वाले कर्मचारियों की तलाशी नहीं लिए जाने की बात आंतरिक रूप से बताई गई थी, इसके बावजूद उन्होंने कोई लिखित आदेश नहीं दिया। यहाँ तक कि पहले से चली आ रही सिस्टम में भी गड़बड़ी के लिए वह जिम्मेदार हैं।

एग्जिट के समय चेकिंग नहीं, गड्डियाँ निकालकर जाते थे लोग

एसआईटी जाँच के दौरान 70 ऐसे मामले सामने आए जिसमें देखा गया कि आरोपित नोटों की गड्डियाँ जेबों- जूतों में छिपाकर जा रहे हैं और उन्हें कर्मचारी इशारों-इशारों में सतर्क कर रहे हैं।

चंपत राय का करीबी टिन्नू यादव बिना किसी आदेश के गिनती वाले कमरे की चाबी अपने पास रखता था। इतना ही नहीं उसने अपने रिश्तेदार मनीष यादव को भी चढ़ावा गिनने के काम में लगा दिया था। राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी की जाँच के लिए योगी सरकार ने एसआईटी का गठन किया था जिसने अपनी शुरुआती रिपोर्ट 23 जून को दी थी।

आरोपित सीधे तौर पर दोषी पाए गए

एसआईटी के मुताबिक, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, टिन्नू यादव, कल्पेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा पहली नजर में चढ़ावा चोरी में शामिल दिखे। इनके खिलाफ चोरी समेत कई धाराओं में केस दर्ज किए गए। रिपोर्ट के आधार पर ही ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने केस दर्ज कराया था।

अविनाश से पास मिले 20.39 लाख रुपए, 1121 डॉलर

जानकारी के मुताबिक, आरोपित अविनाश ने पूछताछ में माना है कि उसने 19 लाख रुपए खर्च कर दिए। अपने भाई को 5 लाख दिए, दूसरे भाई की शादी में 6 लाख खर्च किए। अपने दोस्त को 2.5 लाख रुपए ट्रांसफर किए और एक व्यक्ति को मोबाइल गिफ्ट किए।

हुंडियों की चाबियाँ टिन्नू के पास मिलीं

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में ये भी बताया है कि हुंडियों की चाबियाँ टिन्नू यादव के पास बिना किसी औपचारिक लिखित आदेश के थी। वह हर जगह दखलंदाजी करता था उसकी सिफारिश पर ही उसके भतीजे मनीष यादव को चढ़ावा गणना कार्य में लगाया गया, जो चोरी में संलिप्त पाया गया है।