Homeराजनीति'आप कौन हैं?' वाला सवाल अरविंद केजरीवाल पर पड़ा भारी, AAP नेता को याद...

‘आप कौन हैं?’ वाला सवाल अरविंद केजरीवाल पर पड़ा भारी, AAP नेता को याद दिलाई गई उनके ‘भ्रष्टाचारों’ की गिनती: शायद इसीलिए ‘कर्मठ’ BJP अध्यक्ष नितिन नवीन को पहचानने से कर रहे इनकार

एक तरफ नितिन नवीन हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर पार्टी संगठन और सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निभाते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर तय किया। दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से अपनी राजनीति शुरू की, लेकिन बाद में खुद भ्रष्टाचार के आरोपों से लद गए।

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद में विपक्षी नेताओं के राजनीतिक स्वर बदल रहे हैं। कभी इसी राम मंदिर को बनने के विरोध में रहे इन विपक्षी नेताओं को अचानक ‘हिंदुओं की आस्था’ की चिंता सताने लगी है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने इन्हीं विपक्षी नेता राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल को आईना दिखाया है।

लखनऊ में शक्ति केंद्र संयोजक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने कहा, “आज मैं राहुल गाँधी, अखिलेश यादव और केजरीवाल से कहना चाहता हूँ कि हिंदू धर्म को इतना कमजोर मत समझिएगा कि लोग आपके साँझे में आ जाएँगे।” उन्होंने आगे कहा, “क्योंकि जब आपके लोग हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं, तो आप लोग मौन रहते हैं। सनातन का अपमान यूपी और देश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। हमने विरासत को संजोया है, इसके लिए हमारे पुरखों ने कुर्बानियाँ तक दी हैं।”

नितिन नवीन के इस बयान पर आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने टिप्पणी की है। बीजेपी के ‘एक्स’ हैंडल से शेयर हुए नितिन नवीन के बयान पर कमेंट करते हुए केजरीवाल ने नितिन नवीन से पूछा कि आप कौन हैं? लेकिन अरविंद केजरीवाल को उनकी यह टिप्पणी भारी पड़ गई क्योंकि सिर्फ बीजेपी के नेता ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया यूजर्स तक केजरीवाल को उनकी ‘औकात’ दिखाने लगे।

अपने ही सवाल पर घिरे केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल से दिल्ली की मुख्यमंत्री की कुर्सी छीनने वालीं रेखा गुप्ता ने खुद मोर्चा संभाला और इसे केजरीवाल का ‘अहंकार’ बताया। रेखा गुप्ता ने नितिन नवीन का परिचय देते हुए केजरीवाल से सीधे तौर पर कहा, “आप हताश और निराश हैं, इस बात से सभी अवगत हैं। लेकिन लगता है, आपका अहंकार अभी भी सातवें आसमान पर है!”

रेखा गुप्ता ने याद दिलाया कि यही सवाल एक बार तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और मौजूदा केंद्रीय मंत्री अमित शाह से भी पूछा था और कहा कि समय हर प्रश्न का उत्तर देता है। उन्होंने केजरीवाल से यह भी कहा कि अहंकार तो रावण का भी नहीं टिका, आप कौन?

दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश शर्मा ने भी केजरीवाल के सवाल पर तंज कसते हुए कहा, “मैं याद हूँ कि नहीं?” बता दें कि प्रवेश वर्मा ने ही दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में नई दिल्ली विधानसभा सीट से अरविंद केजरीवाल को हराकर दिल्ली से बाहर का रस्ता दिखाया था।

वहीं दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने तो केजरीवाल की इज्जत उतारकर रख दी। उन्होंने कहा, “दारू के नशे में कुछ ऐसे डूबे AAP, बाप से ही पूछ बैठे कौन हैं आप।”

यहाँ तक की AAP की बागी नेता स्वाती मालीवाल भी केजरीवाल को आइना दिखाने से पीछे नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि जो सवाल केजरीवाल ने नितिन नवीन से पूछा है, वही सवाल आज पंजाब की जनता केजरीवाल से भी पूछ रही है। स्वाती मालीवाल ने पंजाब की AAP सरकार में अपराध, भ्रष्टाचार, ड्रग्स पर सवाल उठाए।

स्वाती मालीवाल ने नितिन नवीन को मेहनती और विश्व की सबसे बड़ी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए कहा कि AAP में केवल केजरीवाल को तर्जी दी जाने पर भी सवाल किया, “AAP में केजरीवा ही अध्यक्ष है, वही सरकार है और वही सुपर CM है।” साथ ही केजरीवाल के सवाल को अहंकार बताते हुए स्वाती ने कहा, “इतना अहंकार अच्छा नहीं है, पहले दिल्ली में टूटा था, अब पंजाब में टूटेगा।”

सिर्फ नेता ही नहीं, केजरीवाल को आम जनता ने भी लताड़ा। एक्स पर कल्पना श्रीवास्तव ने केजरीवाल से कहा, “यह सवाल पूछने वाले आप स्वयं कौन हैं? जो दिल्ली की जनता ने नौकर बनाया था, मालिक बन बैठे। आप वो हैं जिनकी पार्टी में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान होने पर मौन रह जाते हैं। आप वो हैं जो राम मंदिर पर चढ़ावे की चोरी पर भी राजनीति करते हैं, लेकिन सनातन के अपमान पर “आप कौन हैं” कहकर बच निकलना चाहते हैं।”

अर्पित मिश्र ने कहा, “लगातार भ्रष्टाचार के आरोप में जेल और अदालतों के चक्कर लगाने वाले, झूठ और मक्कारी के प्रत्यक्ष प्रमाण अरविंद केजरीवाल का गुरूर 7वें आसमान पर है या यह मात्र सुर्खियों में बने रहने का इसका वही पुराना राग है। केजरीवाल के नीचे जमीन ही नहीं है, लेकिन कमाल है इसको अभी भी यकीन ही नहीं है।”

आनंद शंकर झा ने केजरीवाल के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “तेरे जैसे गिरगिट को जिस पार्टी ने तेरी सही औकात बता दी उसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं!”

केजरीवाल के लिए जानिए, कौन हैं नितिन नवीन?

अरविंद केजरीवाल ने जिस नितिन नवीन से ‘आप कौन हैं?’ पूछा है, वे बीजेपी के कोई साधारण नेता नहीं हैं। हर कोई उन्हें जानता है लेकिन केजरीवाल को शायद इसकी जानकारी नहीं है इसीलिए उनकी जानकारी में लाने के लिए नितिन नवीन का परिचय जरूरी है। 45 वर्षीय नितिन नवीन के पास इस समय बीजेपी की कमान है यानी वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पार्टी के सबसे कम उम्र में इस पद तक पहुँचने वाले नेताओं में शामिल हैं। वे बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और लंबे समय तक संगठन से लेकर सरकार तक अहम जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं।

नितिन नवीन बिहार के पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार पाँच बार के विधायक हैं। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधायक थे। पिता के निधन के बाद नितिन नवीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और साल 2006 में महज 26 साल की उम्र में उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। परिसीमन के बाद बनी बांकीपुर सीट से वे लगातार चुनाव जीतते रहे और अब तक पाँच बार विधानसभा पहुँच चुके हैं।

सिर्फ चुनावी राजनीति ही नहीं, नितिन नवीन का संगठन में भी लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की और प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय महासचिव तक की जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें छत्तीसगढ़ का सह-प्रभारी और फिर प्रभारी बनाया। संगठन में लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों के बाद पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।

बिहार सरकार में भी नितिन नवीन कई जरूरी विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वे पथ निर्माण मंत्री रहने के साथ-साथ कानून एवं न्याय और शहरी विकास एवं आवास जैसे विभागों का भी नेतृत्व कर चुके हैं। संगठन और सरकार, दोनों स्तर पर उनके अनुभव को देखते हुए बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व की कमान सौंपी।

‘₹20 की थाली शेयर करते थे’: सहपाठी ने सुनाए नितिन नवीन के छात्र जीवन के किस्से

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के छात्र जीवन से जुड़े कई किस्से भी सामने आए हैं। इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर पीयूष पदमाकर ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि वह नितिन नवीन के सहपाठी रहे हैं। उन्होंने 1998 के दिनों को याद करते हुए बताया कि दोनों ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली में कॉलेज में दाखिले की तैयारी साथ की थी और कुछ समय तक एक ही कमरे में भी रहे थे।

पीयूष पदमाकर के मुताबिक, उस समय नितिन नवीन के पिता बिहार में विधायक थे, लेकिन उन्होंने कभी इसका रौब नहीं दिखाया। उन्होंने बताया कि दोनों कई बार ₹20 की थाली शेयर करके खाना खाते थे ताकि ₹10 बच सकें। ऑटो की जगह डीटीसी बसों में सफर करते थे और खर्च कम रखने की पूरी कोशिश करते थे। उन्होंने लिखा कि नितिन ने कभी यह जताने की कोशिश नहीं की कि वह एक विधायक के बेटे हैं।

पीयूष पदमाकर ने अपने दूसरे पोस्ट में बताया कि कॉलेज शुरू होने के बाद उन्होंने नितिन नवीन और दो अन्य दोस्तों के साथ दिल्ली के पटपड़गंज इलाके में किराए का कमरा तलाशा था। प्रॉपर्टी डीलर को जब पता चला कि नितिन के पिता विधायक हैं तो उसने महँगे फ्लैट दिखाने शुरू कर दिए। हालाँकि, नितिन ने साफ कह दिया कि उनके पास पूरे महीने का बजट सिर्फ ₹2 हजार है और उसी में रहना, खाना और कॉलेज जाना है। इसके बाद चारों दोस्तों ने पश्चिम विनोद नगर के मंडावली इलाके में एक साधारण किराए का कमरा लिया।

उन्होंने दावा किया कि उस दौरान चारों दोस्त मिलकर घर का सारा काम खुद करते थे। कोई नाश्ता बनाता था तो कोई बर्तन धोता था। झाड़ू-पोंछा लगाने से लेकर खाना बनाने तक सभी जिम्मेदारियाँ आपस में बाँट लेते थे। पीयूष पदमाकर के मुताबिक, नितिन नवीन उस समय भी बेहद अनुशासित, सरल और मिलनसार स्वभाव के थे। दोस्तों के बीच जब भी किसी बात पर विवाद होता, तो उसे सुलझाने का काम अक्सर नितिन ही करते थे।

अब जान लेते हैं कि सवाल करने वाले केजरीवाल आखिर कौन हैं?

नितिन नवीन के राजनीतिक सफर, संगठन में उनकी भूमिका और छात्र जीवन के संघर्ष की कहानी तो जान ली। अब उस सवाल के दूसरे पहलू पर भी नजर डाल लेते हैं। आखिर जिस नेता ने नितिन नवीन से पूछा कि आप कौन हैं? वह खुद कौन हैं? अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक सफर की उपलब्धियाँ क्या हैं, कैसे उनके कारनामों के चलते दिल्ली से भागना पड़ा, कैसे अब घोटाले ही केजरीवाल की पहचान बन चुके हैं और ये भी जानेंगे कि अचानक हिंदुओं और राम मंदिर की बात करने वाले केजरीवाल कभी इसी मंदिर को बनवाने के खिलाफ क्या-क्या बोले?

अरविंद केजरीवाल का जन्म 16 अगस्त 1968 को हरियाणा में हुआ था। वे देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर 1993 में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में नौकरी करने लगे। लेकिन राजनीति में हाथ आजमाने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता बने।

साल 2011 के अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोल का प्रमुख चेहरा बने। उसी आंदोलन से उन्हें पहचान मिली और अन्ना हजारे को अलग कर 2012 में अपनी आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया। अब तक हर कोई उन्हें अन्ना हजारे के आंदोलन से ही जानता था और उसी अन्ना हजारे को उन्होंने पूछा तक नहीं।

अब बारी आई दिल्ली में 2013 के विधानसभा चुनावों की, इन चुनावों में पहली बार AAP ने दिल्ली की सत्ता हासिल की और अगले 10 वर्षों तक दिल्ली में राज किया। केजरीवाल का ऐसा राज, जो जनता को लूटकर अपना खजाना भरने में लगे रहे। इन 10 वर्षों में केजरीवाल ने अपना ‘शीशमहल‘ खड़ा किया और जनता के पैसों से कई घोटाले किए। चाहे ₹100 करोड़ का शराब घोटाला हो, दिल्ली के अस्पतालों में ₹382 करोड़ का घोटाला हो, दिल्ली जल बोर्ड अनियमितता का मामला हो या दिल्ली में बस खऱीदने को लेकर करोंड़ो का घोटाला हो।

और केजरीवाल के इन घोटालों का असर यह हुआ कि 2025 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को दिल्ली छोड़नी पड़ी और बीजेपी ने पहली बार सत्ता संभाली। इन चुनावों में वह अपनी नई दिल्ली सीट भी नहीं बचा सके। अब केजरीवाल दिल्ली जैसा हाल पंजाब में करने में लगे हुए हैं। पंजाब में AAP सरकार में अपराध कई गुना बढ़ चुका है, ड्रग्स पर शिकंजा कसने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। यहाँ तक कि हाल ही में सीएम भगवंत मान के ‘बेअदबी’ के वीडियो सामने आने के बाद ‘पंजाबी’ लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा और फूट गया है।

अरविंद केजरीवाल का हिंदू-विरोधी चेहरा

अरविंद केजरीवाल का हिंदू-विरोधी चेहरा भी किसी से छिपा नहीं है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर केजरीवाल ने विरोध किया। उन्होंने कई मौकों पर कहा था कि मंदिरों की देश में जरूरत नहीं है, मंदिर से देश का भलो नहीं हो सकता जैसे कई कथन कहे थे। हिंदू त्योहारों को भी केजरीवाल ने निशाना बनाया और दिल्ली में सत्ता संभालने के दौरान दीवाली पर पटाखों पर बैन लगा दिया था।

बीजेपी भी केजरीवाल का हिंदू विरोधी चेहरा सामने ला चुकी है। बीजेपी ने याद दिलाया कि जब केजरीवाल ने ‘स्वास्तिक’ और भगवान हनुमान का अपमान करते एक्स पोस्ट किया था। बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल के उन पुराने बयानों को भी सामने लाकर रखा जिसमें वह कश्मीरी हिंदुओं का मजाक बना रहे हैं और राम मंदिर का विरोध कर रहे हैं और दूसरे तरफ मस्जिद में नमाज अदा करने पहुँच रहे हैं।

अब यही अरविंद केजरीवाल की आजकल हिंदओं के हित की बात कर रहे हैं। अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा में कथित चोरी मामले में लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं और हिंदुओं की आस्था आहत होने का रोना रो रहे हैं। अब उन्हें मंदिर याद आ रहे हैं। उनकी एक्स की टाइमलाइन देखें तो आजकल उनके पोस्ट में केवल हिंदू और सनातन प्रेम भरा हुआ है और इसकी आड़ में बीजेपी पर निशाना साधने में लगे हुए हैं।

निष्कर्ष: केजरीवाल ने नितिन नवीन को पहचानने से क्यों किया इनकार?

अब नितिन नवीन और अरविंद केजरीवाल, दोनों के राजनीतिक सफर पर नजर डालने के बाद यह सवाल पाठकों के सामने है कि आखिर ‘आप कौन हैं?’ वाला सवाल किस पर ज्यादा भारी पड़ता है। एक तरफ नितिन नवीन हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर पार्टी संगठन और सरकार में अलग-अलग जिम्मेदारियाँ निभाते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक का सफर तय किया। दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से अपनी राजनीति शुरू की, लेकिन बाद में खुद भ्रष्टाचार के आरोपों से लद गए।

इससे निष्कर्ष यह निकलता है कि नितिन नवीन का औदा और उनकी उपलब्धियाँ अरविंद केजरीवाल से कहीं ज्यादा हैं। नितिन नवीन का न तो अब तक किसी घोटाले में नाम सामने आया है, न ही उन्हें केजरीवाल की तरह कोर्ट से कोई लताड़ लगाई जाती है। नितिन नवीन का कानूनी रिकॉर्ड नहीं रहा है, इसीलिए शायद एक ‘भ्रष्टाचारी’ नेता को नहीं मालूम कि नितिन नवीन कौन हैं? और हाँ हिंदुओं की आस्था की चिंता की बात करें तो केजरीवाल का रुख सबके सामने है कि कैसे उन्होंने राम मंदिर का विरोध किया था और अब यूपी में चुनाव करीब आते ही उन्हें राम मंदिर और हिंदुओं के आस्था की चिंता होने लगी है।

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