कर्नाटक में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर अभियान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल कई जगह पर बूथ लेवल ऑफिसर चुनाव आयोग के निर्धारित घर-घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे हैं, बल्कि लोगों को सामूहिक कैंपों में बुलाकर फॉर्म भरवा रहे हैं। कुछ स्थानों पर लोगों को कहा गया कि वे स्वयं कैंप में आकर फॉर्म भरें और जमा करें।
यह चुनाव आयोग के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। आयोग ने अपने निर्देश में साफ कहा है कि एसआईआर के लिए बीएलओ घर-घर जाएँगे और वोटर वेरिफिकेशन करेंगे, लेकिन कर्नाटक में कई जगहों पर बीएलओ घर-घर जाने के बजाय मैरिज हॉल, कम्युनिटी हॉल, स्कूल, मस्जिद जैसे स्थानों पर कैंप लगाकर लोगों को वहीं बुला रहे हैं।
कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में SIR प्रोटोकॉल की उड़ रही धज्जियां
— OpIndia.tv (@OpIndia_tv) July 4, 2026
घर-घर सत्यापन छोड़ मैरिज हॉल और मस्जिदों में कैंप लगा रहे हैं BLO pic.twitter.com/NO32hq9GTC
मैरिज हॉल और मस्जिदों में भरे जा रहे SIR फॉर्म
विजयपुरा में कथित तौर पर स्टार वेडिंग हॉल में SIR कैंप लगाया गया। लोगों का घर-घर जाकर सत्यापन नहीं हुआ। बेंगलुरु में एक मस्जिद के बाहर और एक निजी कार्यालय के पास BLO ने कैंप लगाकर लोगों को बुलाया। इस पर जब सवाल उठाए गए तो प्रक्रिया रोक दी गई। इतना ही नहीं रामनगर, मंड्या और बेंगलुरु के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की शिकायतें मिलीं हैं।
जेडीयू ने कर्नाटक में एसआईआर रोकने और पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करने की माँग की है। इसका कहना है कि फॉर्म मस्जिदों में भरवाए गए हैं। पार्टी के नेता कृष्णप्पा ने आरोप लगाया कि SIR फॉर्म सीधे घरों में बांटने के बजाय मस्जिदों, शादी हॉल और चौराहों में भरे जा रहे थे। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी पहले ही एक वीडियो दिखा चुके हैं जिसमें कथित तौर पर ऐसी जगहों पर SIR फॉर्म भरे जाते हुए दिखाए गए।
कृष्णप्पा ने कहा, “वे नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हर BLO को हर घर जाना चाहिए और ग्राम पंचायत के जरिए हर घर को कवर किया जाना चाहिए। इसलिए हाल ही में बांटे गए सभी SIR फॉर्म तुरंत रोके जाने चाहिए। हर BLO को घर-घर जाना चाहिए और पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी चाहिए।”
वहीं पूर्व सीएम और केन्द्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने चुनाव आयोग से कर्नाटक में अब तक किए गए इलेक्टोरल रोल के पूरे SIR को रद्द करने और नए SIR काम की निगरानी के लिए राज्य के बाहर से एक काबिल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया, “कर्नाटक में इलेक्टोरल रोल में बदलाव में बहुत ज्यादा गड़बड़ियाँ हो रही हैं। राज्य सरकार इसे आसान बनाने के लिए पूरे प्रशासनिक तंत्र का गलत इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि मौजूदा एसआईआर पर भरोसा नहीं बचा है। राज्य चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा दी है और भारत के चुनाव आयोग को भी शिकायत भेजी है। राज्य चुनाव अधिकारियों ने कहा है कि वे आयोग से मिले निर्देशों के अनुसार काम करेंगे। हमारी पार्टी की साफ माँग है कि अब तक किए गए एसआईआर को रद्द किया जाना चाहिए।
नेताओं ने चुनाव आयोग से शिकायत की
एनडीए का एक प्रतिनिधिमंडल कर्नाटक के मुख्य चुनाव आयुक्त से मिला और अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार पाए गए सभी अधिकारियों और राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की।
इस प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, BJP के केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शोभा करंदलाजे, कर्नाटक विधानसभा और परिषद में विपक्ष के नेता आर. अशोक और चलावदी नारायणस्वामी शामिल थे। इनलोगों राज्य के मुख्य चुनाव आयुक्त अंबुकुमार से मुलाकात की और शिकायत सौंपी।
पत्र में नेताओं ने कर्नाटक में वोटर लिस्ट के वेरिफिकेशन यानी एसआईआर में भारी गड़बड़ियों पर चिंता जताई। इसमें कहा गया है कि SIR के लिए जाने वाले अधिकारी तय प्रक्रिया का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावनाओं को नुकसान पहुँच रहा है।
नेताओं ने कहा कि SIR गाइडलाइंस के मुताबिक, डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO/DC) के निर्देशों पर बूथ लेवल ऑफिसर्स को घर-घर जाकर जरूरी वेरिफिकेशन करना होता है और हर घर के सदस्यों की पहचान की व्यक्तिगत रूप से पुष्टि करनी होती है। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा है। इसके सबूत सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं और न्यूज चैनल्स ने भी इसे दिखाया है।
व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए भेज रहे मस्जिदों पर भीड़
NDA नेताओं ने आरोप लगाया कि कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और BLOs के घरों में बैठकर एन्यूमरेशन फॉर्म भरे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए WhatsApp ग्रुप भी बनाए गए हैं और लोगों को SIR प्रक्रिया के लिए इन कम्युनिटी हॉल और मस्जिदों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
बीजेपी का कहना है कि कॉन्ग्रेस अधिकारियों पर दबाव बना रही है और वोट शेयर बढ़ाने के लिए घुसपैठियों और अयोग्य लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल करने की कोशिश में जुटी हुई है। ये लोग एक बार देश के वोटर बन गए, तो कॉन्ग्रेस का वोट बैंक भी बड़ा हो जाएगा। स्थानीय बीएलओ को ‘एक साथ काम खत्म’ करने का दबाव है। ये लोग मुस्लिमों का वोट शेयर बढ़ाना चाहते हैं, इसलिए मस्जिदों और दूसरी जगहों पर एक साथ नाम डाले जा रहे हैं। इससे एसआईआर का असली मकसद काफी पीछे रह गया है। लोगों को खास जगहों पर जमावड़ा किया जा रहा है।
इसको लेकर बीजेपी विधायक कृष्णाप्पा ने कहा, “कई जगहों पर शिकायतें आई हैं कि कुछ BLO और सरकारी अधिकारी मस्जिदों और खुली जगहों पर बहुत भीड़ जमा कर रहे हैं, खासकर माइनॉरिटी की भीड़… मुझे लगता है कि वे कॉन्ग्रेस पार्टी के कहने पर ऐसा कर रहे हैं। वे इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के दिए गए निर्देशों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं… हर भारतीय नागरिक को वोट देने का हक होना चाहिए।”
BJP नेता के मुताबिक, बूथ लेवल ऑफिसर को हर बूथ में घर-घर जाकर घर के दरवाजे पर एक स्टिकर चिपकाना था, ताकि यह पक्का हो सके कि उन्होंने फॉर्म भर दिया है। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। गैर कानूनी तरह से देश में घुस आए घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के बजाए उन्हें वोटिंग का अधिकार दिया जा रहा है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार इसके लिए बीएलओ पर दबाव बना रही है।
उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि एंटी-नेशनल, देश के बाहर के लोगों और गैर-कानूनी इमिग्रेंट्स को वोटिंग का अधिकार दिया जाए… मुझे लगता है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार इन BLOs को उकसा रही है और उन पर दबाव डाल रही है कि वे अपना वोट शेयर बढ़ाने के लिए गैर-कानूनी इमिग्रेंट्स का एनरोलमेंट करें।”
एक अनुमान के मुताबिक, राज्य में कुल जनसंख्या का करीब 12-18 फीसदी मुस्लिम आबादी है। हाल ही सरकार ने जो सर्वे करवाई थी वह लीक हो गई। इसमें मुस्लिम आबादी करीब 12.87 फीसदी से लेकर 18 फीसदी तक होने का अनुमान है। लगातार तटीय क्षेत्रों और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या बढ़ रही है। इससे इन इलाकों में डेमोग्राफी बदलाव की आशंका जताई जा रही है। ये मुद्दा राज्य की सुरक्षा व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
बेंगलुरु पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी समय-समय पर अवैध बस्तियों, कचरा बीनने वाले क्षेत्रों और निर्माण स्थलों पर छापेमारी करती है। जाँच में सामने आया है कि कई घुसपैठियों ने स्थानीय दलालों की मदद से फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड बनवा लिए हैं। इसी वजह से चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR के दौरान केवल आधार कार्ड देना पर्याप्त नहीं होगा, मतदाताओं को नागरिकता या निवास स्थापित करने के लिए अन्य 11 वैकल्पिक वैध दस्तावेजों में से साक्ष्य देने होंगे।
कर्नाटक सरकार ने बेंगलुरु के पास ‘नेलमंगला’ में एक डिटेंशन सेंटर स्थापित किया है। यहाँ अवैध रूप से रह रहे उन विदेशियों को रखा जाता है जिनकी पहचान हो चुकी है और जिनके निर्वासन की कानूनी प्रक्रिया संबंधित दूतावासों के साथ चल रही है। लेकिन इसमें काफी वक्त लगता है। बांग्लादेश अपने नागरिकों को ‘अपना’ कहने से इनकार करता है। रोहिंग्याओं को तो न ही बांग्लादेश और न ही म्यांमार ‘अपना’ मानता है। स्थिति यह है कि भारत के टुकड़ों पर पल रहे ये रोहिंग्या देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए काफी बड़ा खतरा बनते जा रहा है।
यही वजह है कि एनडीए नेता कर्नाटक कॉन्ग्रेस नेता और सरकार पर एसआईआर में गड़बड़ी को लेकर चुप्पी साधने पर सवाल खड़ी कर रही है। पूर्व सीएम कुमारस्वामी ने तो वीडियो सबूत देते हुए एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने राज्य प्रशासन पर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने के लिए मशीनरी का ‘इस्तेमाल’ करने का आरोप लगाया और मौजूदा एसआईआर प्रक्रिया तुरंत खत्म करने की माँग की। उन्होंने यशवंतपुर और रामनगर समेत कई चुनाव क्षेत्रों में SIR की गाइडलाइंस का उल्लंघन करने पर हमला किया और कहा कि सीधे राजनीतिक असर में किया जा रहा है।
कुमारस्वामी ने इस मुद्दे पर चुप्पी को लेकर KPCC प्रेसिडेंट बीके हरिप्रसाद और होम मिनिस्टर प्रियांक खड़गे पर तीखा हमला किया। अपने घर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “बेचारे। मुझे नहीं पता कि KPCC प्रेसिडेंट कहाँ गायब हो गए हैं। इतनी सारी अफरा-तफरी के बावजूद, वह कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। वह लगभग हर मुद्दे पर, हर दिन कमेंट करते हैं। राज्य के होम मिनिस्टर भी लगभग हर चीज पर बयान देते हैं। क्या उन्हें SIR प्रोसेस में गड़बड़ियों के बारे में नहीं बोलना चाहिए? जो लोग सबको डिसिप्लिन और कंट्रोल के बारे में लेक्चर देते हैं, उन्हें इस बारे में भी जरूर कुछ कहना चाहिए।”
दरअसल चुनाव आयोग से एनडीए नेताओं की मुलाकात और एसआईआर पर सवाल के बाद पूरी प्रक्रिया को नए सिरे से काम करने की जरूरत है। इसकी निगरानी केंद्र करे, क्योंकि एसआईआर कराना लोकतंत्र के लिए काफी अहम है। क्योंकि गायब, मृत और स्थायी रूप से राज्य से बाहर जा चुके लोगों के नाम हटने ही चाहिए, लेकिन किसी भी हाल में घुसपैठियों और अयोग्य लोगों के हाथों में वोटर आईकार्ड न पहुँचे इसकी निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।


