उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ मनसा देवी मंदिर में दान और चढ़ावे की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है। अब मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारी बिना जेब वाले वस्त्र पहनेंगे। मंदिर ट्रस्ट ने दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन भी किया है।
यह फैसला अयोध्या राम मंदिर और बद्रीनाथ धाम में दान और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच लिया गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को खत्म करना और श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करना है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और श्री मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने सोमवार को मंदिर परिसर में हुई बैठक में यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि माँ मनसा देवी मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसलिए दान व्यवस्था में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
नई व्यवस्था के तहत हर श्रद्धालु को दान की अधिकृत रसीद दी जाएगी। प्रतिदिन मंदिर में आने वाली दानराशि और चढ़ावे का पूरा हिसाब तैयार किया जाएगा। सात सदस्यीय समिति इस पूरी प्रक्रिया पर नियमित निगरानी रखेगी। समिति के सदस्यों को जिम्मेदारी निभाने की शपथ भी दिलाई गई है।
मंदिर ट्रस्ट ने यह भी साफ किया है कि मंदिर में चढ़ाए गए नारियल, प्रसाद और फूलों का दोबारा उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अगर कोई पुजारी या कर्मचारी दानराशि में हेराफेरी करता पाया गया तो उसे सेवा से हटाने के साथ उसके खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

