दिल्ली सरकार ने राजधानी में जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वर्षा जल संचयन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) की एक बड़ी पहल शुरू की है। इस परियोजना के पहले चरण में 75 सीएम श्री स्कूलों को शामिल किया गया है।
इसके बाद पहले चरण के नतीजों के आधार पर इसे दिल्ली सरकार के करीब 800 स्कूलों और नगर निगम (MCD) के स्कूलों तक भी बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल दिल्ली को अधिक हरित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
उन्होंने कहा कि पानी बचाना सिर्फ पर्यावरण की जरूरत नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी बेहद जरूरी है।
दिल्ली सचिवालय में हुआ MoU पर हस्ताक्षर
इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को दिल्ली सचिवालय में एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर के साथ हुई। यह समझौता केंद्र सरकार की ‘कैच द रेन’ पहल के तहत मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में किया गया।
MOU पर इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL), शिक्षा निदेशालय और एहसास NGO के बीच हस्ताक्षर हुए। इस परियोजना को IGL अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के तहत लागू करेगा।
परियोजना में क्या-क्या होगा
इस पहल के तहत चुने गए सभी 75 स्कूलों में पहले से मौजूद वर्षा जल संचयन प्रणालियों का ऑडिट किया जाएगा। जो सिस्टम पुराने या खराब हो चुके हैं, उनकी मरम्मत कर उन्हें दोबारा चालू किया जाएगा। वहीं जिन स्कूलों में ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहाँ नई रूफटॉप रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएँगे।
इस परियोजना का एक अहम हिस्सा जागरूकता फैलाना भी है। छात्रों और शिक्षकों के लिए जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे, ताकि बच्चों को पानी बचाने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के महत्व को बेहतर तरीके से समझाया जा सके।
भूजल रिचार्ज में होगा सुधार
दिल्ली सरकार के अनुसार, इस परियोजना से जुड़ने वाला हर स्कूल हर साल करीब दो लाख लीटर भूजल रिचार्ज करने में मदद करेगा। नए वर्षा जल संचयन सिस्टम के जरिए जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और राजधानी के अलग-अलग इलाकों में भूजल स्तर सुधारने में भी मदद मिलेगी।
अधिकारियों का मानना है कि स्कूलों के जरिए भूजल रिचार्ज बढ़ाने की यह पहल दिल्ली की लंबे समय से चली आ रही पानी की समस्या से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही इससे जल संसाधनों के टिकाऊ उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
शिक्षा और पर्यावरण साथ-साथ
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की शुरुआत के लिए स्कूल सबसे बेहतर जगह हैं, क्योंकि यहीं से बच्चों में कम उम्र से ही जागरूकता पैदा की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘कैच द रेन’ मुहिम के विजन को आगे बढ़ाती है। स्कूलों में वर्षा जल संचयन व्यवस्था लागू होने से छात्र सिर्फ किताबों में ही जल संरक्षण नहीं पढ़ेंगे, बल्कि अपने स्कूल परिसर में इसे होते हुए भी देखेंगे और उससे सीखेंगे।
हरित और स्वच्छ दिल्ली की ओर एक कदम
मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि यह परियोजना दिल्ली में जल संरक्षण के प्रयासों को नई गति देगी। उन्होंने कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी और राजधानी को अधिक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यदि पहले चरण के नतीजे सकारात्मक रहे, तो इस योजना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से दिल्ली सरकार के अन्य स्कूलों और MCD स्कूलों तक किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में राजधानी के सभी शैक्षणिक संस्थानों में वर्षा जल संचयन को नियमित व्यवस्था बनाया जाए और व्यापक स्तर पर भूजल संरक्षण को बढ़ावा दिया जाए।

