पिछले दो दशकों तक हमने फुटबॉल में दो बहुत बड़े खिलाड़ियों को खेलते देखा। आठ बार के ‘बैलॉं-दी-ओर’ विजेता लियोनेल आंद्रेस मेस्सी और मिस्टर चैंपियन्स लीग क्रिस्टियानो रोनाल्डो। इन दोनों ही खिलाड़ियों की प्रतिद्वंद्विता ने दो दशक से थोड़ा और ज्यादा समय तक हमें इस खेल से बाँधे रखा। लेकिन अब जब यह दोनों ही खिलाड़ी अपने फुटबॉल करियर का सूर्यास्त देख रहे हैं तो स्वाभाविक है कि फुटबॉल जगत अगली प्रतिद्वंद्विता खोजेगा।
ऐसे में नजर आकर टिकती है फ्रेंच सितारे किलिएन एमबाप्पे और युवा स्पेनिश सनसनी लामीन यमाल पर। दोनों ही दो ऐसे क्लबों के लिए फुटबॉल खेलते हैं जिनकी आपसी रंजिश जगजाहिर है। और हाल के वर्षों में तो यह दोनों ही सितारे अपनी अपनी राष्ट्रीय टीमों के लिए खेलते हुए कई बड़े मंचों पर टकरा भी चुके हैं।
लेकिन मंगलवार (14 जुलाई 206) की रात एकबार फिर टक्कर होगी किलिएन एमबाप्पे और युवा स्पेनिश सनसनी लामीन यमाल की। क्योंकि टक्कर होगी फ्रांस व स्पेन की टीमों की।
डलास स्टेडियम में भारतीय समयानुसार रात 12.30 बजे बेहद घातक फ्रेंच जहाज़ी बेड़ा स्पेनिश बंदरगाहों को जीत कर उन्हें कब्जाने की मंशा से इस जंग में उतरेगा। मौका है फीफा विश्व कप के पहले सेमीफाइनल का। यह निश्चित रूप से एक ब्लॉकबस्टर मैच होने जा रहा है।
अब विश्व कप की ट्रॉफी मात्र दो जीत की दूरी पर है। दोनों ही टीमें मैदान में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देंगी। दोनों ही कैसे भी यह मुकाबला जीतने की मंशा मन में लिए मैदान पर उतरेंगी। फ्रांस 1998 और 2018 में दो बार विश्व कप का खिताब जीत चुका है। वह पिछले संस्करण में भी फाइनल मैच का हिस्सा थे। वहीं 2010 में विश्व कप विजेता रही स्पेन मौजूदा यूरो विजेता है। वह अपनी जर्सी में एक और सितारा जड़ कर सदैव के लिए इतिहास में अमर हो जाने के लिए लालायित है।
मंगलवार की रात फाइनल का टिकट पाने के लिए जबरदस्त अटैकिंग फुटबॉल खेल रही और इस टूर्नामेंट की सबसे संतुलित टीम फ्रांस का सामना होगा उनके हालिया वर्षों के चिर प्रतिद्वंद्वी स्पेन से। स्पेन की रक्षापंक्ति ने पूरे टूर्नामेंट में अबतक मात्र एक गोल खाया है। लेकिन वो गोल दागने के लिए भी संघर्षरत नजर आए हैं। वहीं लेस ब्ल्यूज़ तो बेहद घातक तरीके से मैदान के हर छोर से अटैक करते नजर आए हैं।
डलास स्टेडियम में मजबूत अटैकिंग फोर्स एक बेहद मजबूत रक्षापंक्ति की परीक्षा लेती दिखेगी। कई पुराने हिसाब भी चुकता किए जाने हैं। यह बेहद शानदार मैच रहने वाला है।
फ्रेंच कोच दीदीएर देशां शायद अपनी टीम को 4-2-3-1 की फॉर्मेशन में मैदान पर उतारें। अटैकिंग लाइन में घातक फॉर्म में चल रहे एमबाप्पे, डेंबेले और युवा सनसनी देसिरे दोउ रहेंगे। मिडफील्ड का जिम्मा संभालेंगे अब तक टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा असिस्ट दे चुके माइकल ओलीस। उनके संग आद्रियन राबियो और मानू कोने होंगे। रक्षापंक्ति में सलिबा संग उपामेकानो, जूल्स कूंदे और लुका डीने मौजूद रहेंगे। लेस ब्ल्यूज़ की बेंच पर चेर्की, माटेटा, थुर्रम, देसिरे दोऊ जैसे अटैकर्स हैं जो बेंच से आकर भी कुछ ही पलों में मैच का रुख बदलने का माद्दा रखते हैं। यह उन्हें बेहद ही घातक बना देता है।
ऐसा प्रतीत होता है कि यह फ्रेंच टीम विश्व कप का खिताब जीतने के मकसद से ही इस टूर्नामेंट में उतरी है और इनके विजय-रथ को रोकने का दुस्साहस शायद ही कोई टीम कर सकेगी। अभी तक के इनके तमाम मैच तो यही दर्शाते हैं। आप जब उन्हें खेलते हुए देखते हैं तो कुछ भी कमी आपको नजर नहीं आती।
वहीं कोच लुई डे ला फुएन्ते के स्पेन की बात करें तो उनकी फॉरवर्ड लाइन का मिडफील्ड द्वारा प्रदान किए जा रहे मौकों को गोल में न बदल पाना एक बड़ा चिंता का विषय रहा है।
मिडफील्ड में रोड्री के संग फैबियान रुईज़ ऐर दानी ओल्मो मौजूद रहेंगे। आगे अटैकिंग लाइन में सेंट्रल फॉरवर्ड ओयारजाबाल का साथ देने के लिए विंगर्स के रूप में एलेक्स बाएना और लामीन यमाल को मैदान पर उतारा जाना तय है, जबकि नीको, फेरां तोरे, गावी, मिकेल मेरीनो, विक्टर मुनोज़, पेड्री जैसे मजबूत खिलाड़ी बेंच पर मौजूद रहेंगे। चोट से उबर रहे नीको को हमने पुर्तगाल के खिलाफ मैच में कुछ पलों के लिए मैदान पर देखा था। अगर उनको मैच की शुरुआत से मैदान पर उतारा जाता है तो स्पेन की अटैकिंग लाइन को जबरदस्त धार मिल जाएगी।
पाउ कुबार्सी और आयम्रिक लापोर्त के नेतृत्व में स्पेनिश डिफेंस पर बड़ी जिम्मेदारी होगी फ्रेंच अटैक को काबू में रखने की। उन्हें मैच में बने रहने के लिए डेंबेले, एमबाप्पे, देसिरे दोउ और माइकल ओलीस़ की चौकड़ी पर 90 मिनट तक लगाम लगाए रखनी होगी। और इसमें निश्चित ही उन्हें अपने मिडफील्ड का सहयोग भी चाहिए होगा।
अगर फिर एक बार ओयारजाबाल खामोश रह जाते हैं तो कोच लुई डे ला फुएन्ते अपने डैगर मिकेल मेरीनो की ओर एकबार फिर बड़ी उम्मीदों से देख रहे होंगे।
मंगलवार की रात दो अलग विचारधाराओं की भी टक्कर होगी। बेखौफ फ्रेंच अटैक स्पैनिश मिडफील्ड के संपूर्ण नियंत्रण से टकराएगा।
स्पेन अगर अपने मिशन में असफल रहती है तो ‘लेस ब्लूज’ पश्चिमी जर्मनी के पश्चात लगातार तीन बार विश्व कप के फाइनल खेलने वाली पहली टीम बन जाएगी। यह पिछले डेढ़ दशक में वैश्विक मंच पर उनके दबदबे को भी दर्शाता है।
जुलाई माह की इस गर्म रात में आपको बस इतना करना है कि या तो किसी कैफे में या घर पर ही अपना पसंददीदा पेय पदार्थ और पसंदीदा चिप्स लिए इस मैच पर नजरें गड़ाए रखनी हैं और फुटबॉल की खबरों हेतु हमारे साथ बने रहना है।
एक फुटबॉल फैन के लिए ऐसा जादू फिर न जाने कब हो।


