POK में पाकिस्तानी फौज ने प्रदर्शनकारियों पर बरसाई गोलियाँ, 6 की मौत: मुजफ्फराबाद तक पदयात्रा निकलने पर अड़े प्रदर्शनकारी, कई जगहों पर झड़प

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जबरदस्त हिंसा हो रही है। पाकिस्तानी फौज ने रावल कोट और बलूच सेक्टरों में स्थानीय नागरिकों पर गोलियाँ चलाई है, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई है। इससे पहले फौज और लोगों के बीच भिड़ंत हो गई।

मृतकों की पहचान जाहिद मुगल, जफर मुगल, अरसलान अकबर, रकीब आबिद और इहसानुल्लाह के रूप में हुई है, जिनकी मौत सुधनोटी के बलूच इलाके में हुई, जबकि वाजिद हयात को रावलकोट के मति अलमैरा बस टर्मिनल पर गोली मारकर हत्या कर दी गई।

लोगों ने इसके विरोध में मृतकों के शवों के साथ जुलूस निकाला। भारी भीड़ के बीच शवों को सड़कों पर घुमाया गया। इस दौरान सड़क के दोनों किनारों पर लोगों का जमावड़ा था। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ते विद्रोह को दबाने के लिए पीओके के स्थानीय पुलिस प्रशासन और पाकिस्तानी फौज ने मिल कर सभी प्रमुख रास्तों और राजमार्गों को बंद कर दिया है। इससे पीओके में खाने-पीने की दिक्कत हो गई है। स्थानीय लोगों के साथ फौज और पुलिस की टीम की झड़पें आम हैं। दो पाकिस्तानी रेंजर्स भी इस दौरान मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।

प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 15 जुलाई को मुजफ्फराबाद तक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इसको लेकर इलाके में काफी तनाव है। पाकिस्तानी पुलिस ने लोगों को घरों में रहने की सलाह दी है। पाकिस्तान ने पहले ही JAAC संगठन को आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। यह संगठन लगातार पीओके में हो रहे अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाता रहा है।

पदयात्रा को देखते हुए लोगों को चेतावनी दी गई है कि इलाके में लॉकडाउन तोड़ने और सड़कों पर निकलने की कोशिश की गई तो गंभीर परिणाम होंगे। स्थानीय पुलिस ने पोस्टर चस्पा कर नाकाबंदी तोड़ने या पीओके के मुजफ्फराबाद तक पहुँचने की कोशिश करने पर सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी है।

हालाँकि जेएएसी मुजफ्फरबाद को घेरने का मन बना चुका है। इसको देखते हुए कत्लेआम होने की आशंका बढ़ गई है।

जेएएसी नेता जावेद इकबाल ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “78 वर्षों तक उन्होंने हमें ‘श्रीनगर मुक्ति’ का झूठा प्रचार बेचा। वह झूठा प्रचार अब पुराना हो चुका है। कश्मीरी अब उस पर विश्वास नहीं करते। जब हम आटा माँगते हैं, तो हमें गोलियाँ मिलती हैं, जब हम बिजली माँगते हैं, तो हमें गोलियाँ मिलती हैं और जब हम पानी माँगते हैं, तो हमें गोलियाँ मिलती हैं,” उन्होंने घोषणा की, “हर बच्चा अपनी जान की बाजी लगाकर लड़ेगा, लेकिन कश्मीर (POK)पाकिस्तान का प्रांत नहीं बनेगा।”

सभा में बड़ी संख्या में छात्र, नौजवान, शिक्षक और दूसरे लोग हाथों में सफेद झंडे लेकर रावलकोट के ईदगाह मैदान पहुँचे और पाकिस्तानी फौज के अत्याचारों का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियाँ ले रखी थी, जिन पर लिखा था, “अंतर्राष्ट्रीय मीडिया हमें कवरेज दे।” वे नारे लगा रहे थे, “ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।” गौरतलब है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने छात्र आंदोलन में शामिल होने पर ही जेएएसी पर कानूनी कार्रवाई करने की धमकी दी थी।

दूसरी ओर अमेरिका में रह रहे हैं पीओके के लोग व्हाइट हाउस से सामने जमा हुआ। इन लोगों में महिलाएँ, बच्चे और कौम के नेता शामिल थे। इन लोगों ने पीओके में हो रहे अमानवीय हरकतों की ओर दुनिया का ध्यान खींचा। इन्होंने पीओके को पाकिस्तान से बचाने की गुहार भी दुनिया से लगाई।

इनलोगों ने पीओके के रिहायशी इलाकों से पाकिस्तानी फौज को हटाने की माँग की। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लंबे समय तक चले इंटरनेट व्यवधान के कारण लगभग चार मिलियन लोग बाहरी दुनिया से कट गए हैं। स्थानीय लोगों ने भारत से मानवीय सहायता उपायों के साथ आगे आने और लोगों की जान बचाने की गुहार भी लगाई। उन्होंने प्रभावित लोगों को मानवीय सहायता देने की माँग करते हुए पुंछ और डोडा क्षेत्रों की नियंत्रण रेखा खोलने की भी माँग की।

भारत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने में पुलिसिया बर्बरता, जरूरी सामानों को पहुँचने से रोकने के लिए रास्तों को बंद करने और इंटरनेट प्रतिबंध लागू करने के लिए पाकिस्तान की कड़ी निंदा की। हालाँकि उम्मीद भी जताई है कि दुनिया इस इस्लामी देश को ‘घोर दुर्व्यवहार और कुकर्म’ के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 14 जुलाई को कहा, “पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (पीओजेके) में चल रहे विरोध प्रदर्शन पाकिस्तान द्वारा दशकों से किए जा रहे व्यवस्थित शोषण, मौलिक अधिकारों से वंचित करने और उसके अवैध और जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रशासनिक उत्पीड़न का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “स्थानीय जनता की जायज शिकायतों को दूर करने के बजाय, पाकिस्तानी सरकार ने असहाय महिलाओं और बच्चों सहित अन्य लोगों के खिलाफ पुलिसिया बर्बरता का सहारा लिया। वहाँ भोजन और दवा सहित आवश्यक आपूर्ति को रोक दिया और इंटरनेट भी बंद कर दी। पाकिस्तानी फौज की गोलियों से लोगों की हुई मौत काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।”

POK में एक महीने से अधिक समय से अशांति फैली हुई है। यहाँ बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ रहे लोग आसमान छूती महँगाई का विरोध कर रहे है। ये स्वायत्तता की माँग कर रहे हैं लेकिन उनपर अत्याचार किया जा रहा है। पुलिसिया बर्बरता की वजह से असहाय जनता की लगातार मौतें हो रही हैं।