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कनाडा-यूरोप में भारतीय गैंगस्टरों की दहशत, अमेरिका को शुरू करना पड़ा ऑपरेशन हार्ड बॉल: कौन हैं FBI का मोस्ट वांटेड नीतीश कौशल, कैसे काम करता है भगवानपुरिया गैंग और क्यों लॉरेंस बिश्नोई-गोल्डी बराड़ का भी आया नाम

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (14 जुलाई 2026) को कहा, "हमने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी घोषणाएँ देखी हैं। ये घोषणाएँ कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ लगाए गए आरोपों और की गई कार्रवाई से संबंधित हैं।"

अमेरिका की संघीय जाँच एजेंसी (FBI) ने गैंगस्टर नीतीश कौशल को अपनी मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल कर लिया है। FBI ने नीतीश कौशल पर आरोप लगाया है कि वह एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन की गतिविधियों में शामिल था। यह संगठन हत्या, अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी, जबरन वसूली, हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी समेत कई अपराधों में शामिल था।

FBI ने अपने बयान में कहा, “यह संगठन जग्गू भगवानपुरिया ऑर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप (Bhagwanpuria OCG) के नाम से जाना जाता है। इसकी शुरुआत भारत के पंजाब राज्य में हुई थी और यह अमेरिका के कैलिफोर्निया के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट तथा अन्य स्थानों पर सक्रिय था।”

कौन है नीतीश कौशल?

FBI का नीतीश कौशल पर आरोप है कि उसने भगवानपुरिया OCG की ओर से हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। इनमें अपहरण और हमले समेत अन्य हिंसक कृत्य शामिल हैं।

FBI ने आगे बताया, “25 जून 2026 को अमेरिका के कैलिफोर्निया के लॉस एंजिल्स स्थित यूनाइटेड स्टेट्स डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफोर्निया ने कौशल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह वारंट उसके खिलाफ रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गनाइजेशंस कॉन्सपिरेसी यानी संगठित अपराध से जुड़ी साजिश का आरोप लगाए जाने के बाद जारी किया गया है।”

कौन है कुख्यात ड्रग डीलर जग्गू भगवानपुरिया?

FBI ने नीतीश कौशल पर जग्गू भगवानपुरिया गैंग में शामिल होने का आरोप लगाया है। यह गैंग कुख्यात ड्रग तस्कर जग्गू भगवानपुरिया द्वारा चलाया जाता है। जग्गू भगवानपुरिया का असली नाम जगदीप सिंह है। वह पंजाब के बटाला स्थित भगवानपुर गाँव का रहने वाला है। गाँव के नाम के कारण ही वह अपराध की दुनिया में जग्गू भगवानपुरिया के नाम से पहचाना जाने लगा। वह वर्ष 2012 से खुलकर अपराध की दुनिया में सक्रिय हुआ था।

जग्गू के खिलाफ 2012 से अब तक करीब 128 आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। इनमें हाई प्रोफाइल हत्याएँ, अपहरण, जबरन वसूली, हाईवे पर लूट, हथियारों की तस्करी और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले शामिल हैं। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत भी करीब 12 मामले दर्ज हैं।

पुलिस ने जग्गू भगवानपुरिया को वर्ष 2015 में गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में बंद है। हालाँकि, गिरफ्तारी के बाद भी उसके अपराधों का नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। बताया जाता है कि वह जेल के भीतर से ही अपने गैंग के सदस्यों को निर्देश देता रहा और आपराधिक गतिविधियों को संचालित करता रहा।

जग्गू भगवानपुरिया गैंग को पंजाब के सबसे सक्रिय आपराधिक गिरोहों में गिना जाता है। कहा जाता है कि उसके गिरोह में 50 से अधिक अपराधी शामिल हैं। इस गैंग का मुख्य काम अपहरण, जबरन वसूली, हाईवे पर लूट, हथियारों की तस्करी और नशीले पदार्थों का कारोबार रहा है।

लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ से रहा करीबी रिश्ता

जग्गू भगवानपुरिया का संबंध एक समय लॉरेंस बिश्नोई और कनाडा में बैठे गोल्डी बराड़ से बेहद करीबी था। बताया जाता है कि लॉरेंस बिश्नोई ने अपराध की दुनिया के कई तरीके जग्गू भगवानपुरिया से ही सीखे थे। शुरुआत में तीनों मिलकर पंजाब में अपना आपराधिक नेटवर्क चला रहे थे।

सिद्धू मूसेवाला की हत्या के समय तक भी लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़ और जग्गू भगवानपुरिया एक साथ बताए जाते थे। मूसेवाला हत्याकांड में जग्गू की भूमिका पर भी संदेह जताया गया था। आशंका व्यक्त की गई कि जग्गू भगवानपुरिया ने लॉरेंस बिश्नोई के कहने पर इस हत्या के लिए शार्प शूटर उपलब्ध कराए थे।

बाद में जग्गू भगवानपुरिया और लॉरेंस बिश्नोई के बीच विवाद शुरू हो गया। बताया जाता है कि जग्गू ने बड़े स्तर पर ड्रग्स का कारोबार शुरू कर दिया था जबकि लॉरेंस गैंग नशीले पदार्थों के कारोबार से दूरी बनाए रखने का दावा करता था।

लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने कथित तौर पर जग्गू को कई बार ड्रग्स का धंधा छोड़ने के लिए कहा लेकिन वह नहीं माना। जग्गू का गैंग लगातार नशीले पदार्थों की तस्करी करता रहा और धीरे-धीरे उसके पुराने साथी ही उसके दुश्मन बन गए। दोनों गैंग के बीच हथियारों के बँटवारे को लेकर भी विवाद होने लगा। इसके बाद लॉरेंस और जग्गू ने अपने रास्ते अलग कर लिए।

लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ ने जग्गू पर यह आरोप भी लगाया कि उसने सिद्धू मूसेवाला की हत्या में शामिल दो शूटरों की जानकारी पंजाब पुलिस को दी थी। इस आरोप ने दोनों गिरोहों के बीच दुश्मनी को और अधिक बढ़ा दिया।

अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार, भगवानपुरिया के कथित तौर पर भारत, कनाडा, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में फैले 1,000 से अधिक सदस्य और सहयोगी हैं। जाँचकर्ताओं का आरोप है कि उनका प्रभाव केवल अंडरवर्ल्ड तक ही सीमित नहीं था। 2019 में उत्तर भारत सर्कल स्टाइल कबड्डी फेडरेशन ने तत्कालीन DGP को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उन्होंने विदेशों में होने वाले टूर्नामेंटों के लिए टीम चयन में दखल दिया था।

कैसे बना ग्लोबल नेटवर्क और कैसे करता है भर्ती?

अमेरिकी चार्जशीट के मुताबिक, जग्गू भगवानपुरिया का नेटवर्क भी लॉरेंस बिश्नोई गैंग की तरह पंजाब से विदेश जाने वाले लोगों के रास्ते पर आगे बढ़ा। गैंग के भरोसेमंद सदस्य कनाडा और अमेरिका में जाकर बस गए और वहीं से ड्रग्स की तस्करी, हथियारों की सप्लाई, रंगदारी की रकम जुटाने और अपराध से कमाए पैसे को ठिकाने लगाने का काम करने लगे। इस तरह पंजाब से शुरू हुआ नेटवर्क धीरे-धीरे कई देशों तक फैल गया।

अमेरिका का कैलिफोर्निया इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनकर सामने आया। जाँच एजेंसियों का आरोप है कि कोकीन, मेथामफेटामाइन और हेरोइन जैसी ड्रग्स को अमेरिका के अलग-अलग हिस्सों में पहुँचाया जाता था और बाद में कनाडा भेजा जाता था। आरोप है कि गैंग ने वहाँ रियल एस्टेट कारोबारियों, शराब ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और स्थानीय व्यापारियों को रंगदारी के लिए निशाना बनाया।

मई 2024 में FBI के सैक्रामेंटो कार्यालय ने पंजाबी समुदाय से रंगदारी और धमकी से जुड़े मामलों की जानकारी देने की अपील भी की थी। इससे पता चलता है कि जाँच एजेंसियों को विदेश में सक्रिय इस नेटवर्क की गतिविधियों की जानकारी मिलने लगी थी।

गैंग आर्थिक रूप से कमजोर, नाराज या अपराध से प्रभावित युवाओं और नाबालिगों को निशाना बनाता था। उन्हें जल्दी पैसा कमाने, समाज में पहचान बनाने और गैंग में ताकतवर स्थान मिलने का लालच दिया जाता था। जो युवा गैंग के प्रति वफादारी साबित करते थे, उन्हें बाद में कनाडा, अमेरिका या ब्रिटेन भेजने का अवसर देने का वादा किया जाता था। विदेश पहुँचने के बाद इन्हीं लोगों को गैंग के अंतरराष्ट्रीय कामों में शामिल कर लिया जाता था।

इंस्टाग्राम इस भर्ती का एक बड़ा माध्यम था। पंजाब पुलिस ने भी पहले बताया था कि भगवानपुरिया से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल के तीन सदस्यों को इंस्टाग्राम के जरिए गैंग में शामिल किया गया था। सोशल मीडिया पर गैंग के सदस्यों की तस्वीरें, धमकियाँ, हत्याओं की जिम्मेदारी और अपराधियों का महिमामंडन करने वाली पोस्ट डालकर डर फैलाया जाता था। साथ ही, ऐसी पोस्ट का इस्तेमाल नए युवाओं को आकर्षित करने के लिए भी किया जाता था।

US में भगवानपुरिया नेटवर्क पर आरोप और उसमें शामिल पंजाब पुलिस का कॉन्स्टेबल

अमेरिका के कैलिफोर्निया सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत में दाखिल ग्रैंड जूरी चार्जशीट में जेल में बंद गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। FBI के अनुसार, भगवानपुरिया गैंग ने पंजाब में कुछ पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर वसूली का एक पूरा तरीका तैयार किया था।

गैंग के सदस्य अपने विरोधियों, पुलिस के संभावित मुखबिरों और रंगदारी के लिए चुने गए लोगों की जानकारी भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को देते थे। इसके बाद उन लोगों या उनके परिवार के सदस्यों को हत्या जैसे गंभीर मामलों में झूठा फँसाने की धमकी दी जाती थी।

FBI का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई और जेल भेजे जाने का डर दिखाने के बाद पीड़ित परिवारों से संपर्क किया जाता था। उनसे कहा जाता था कि पैसे देने पर उनके नाम मुकदमे से हटा दिए जाएँगे। अमेरिकी एजेंसी ने इसे एक-दो घटनाओं के बजाय भगवानपुरिया गैंग की बार-बार अपनाई जाने वाली संगठित रणनीति बताया है।

चार्जशीट में पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर गुरिंदरजीत सिंह नागरा का नाम प्रमुखता से शामिल है। FBI के अनुसार, नागरा भगवानपुरिया गैंग से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में थे। यह मामला 15 जनवरी 2026 को पंजाब के होशियारपुर जिले के मियानी गाँव में हार्डवेयर कारोबारी बलविंदर सिंह की हत्या से जुड़ा है। हत्या के बाद भगवानपुरिया गैंग ने सोशल मीडिया पर इसकी जिम्मेदारी भी ली थी।

चार्जशीट के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 से पहले गैंग से जुड़े गुरलाल सिंह ने एक व्यक्ति (चार्जशीट में विक्टिम-2) की जानकारी इंस्पेक्टर नागरा को दी। आरोप है कि इसका उद्देश्य उस व्यक्ति को बलविंदर सिंह की हत्या में झूठा फँसाना था। इसके बाद 13 अप्रैल को इंस्पेक्टर ने विक्टिम-2 के पिता से संपर्क कर उन्हें भी हत्या के मामले में आरोपित बनाने की बात कही। 16 अप्रैल को विक्टिम-2 से कहा गया कि भुगतान नहीं होने पर उसे, उसके पिता और उसकी बहन को हत्या के केस में शामिल कर दिया जाएगा।

24 मई 2026 को पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विक्टिम-2 और उसके पिता पर हत्या की सुपारी देने का आरोप लगाया। अगले दिन इंस्पेक्टर ने कथित रूप से परिवार से कहा कि तय रकम पूरी नहीं दी गई है और गुरलाल उसके साथ है। FBI के मुताबिक, भुगतान मिलने पर तीन आरोपितों में से दो के नाम हत्या केस से हटाने की पेशकश भी की गई।

इसी आधार पर इंस्पेक्टर नागरा पर धमकी, भय और सरकारी पद का इस्तेमाल कर रंगदारी वसूलने की कोशिश का आरोप लगाया गया है। आरोप है कि अप्रैल से जून 2026 के बीच यह दबाव बनाया गया। अमेरिकी चार्जशीट सामने आने के बाद पंजाब पुलिस ने नागरा को टांडा थाने के SHO पद से हटाकर पुलिस लाइंस भेज दिया और विभागीय जाँच के आदेश दिए हैं।

भारतीय गैंगस्टरों का US-कनाडा-यूरोप में नेटवर्क और उन पर अमेरिका में एक्शन

अमेरिका में भारत से जुड़े गैंगस्टर नेटवर्क पर पिछले कुछ समय से कड़ी कार्रवाई चल रही है। अमेरिका के न्याय विभाग के अनुसार, ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत कुल 24 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इनमें 11 कैलिफोर्निया, एक इंडियाना और एक जॉर्जिया से पकड़ा गया। 3 गिरफ्तारियाँ कनाडा और एक स्पेन में हुई जबकि सात आरोपित पहले से हिरासत में थे।

तीन अलग-अलग चार्जशीट में कुल 37 लोगों को आरोपित बनाया गया है। इनमें बंद लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया भी शामिल हैं। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि दोनों जेल में रहते हुए मोबाइल फोन और इंटरनेट से विदेशों में अपने गिरोह चला रहे थे। कार्रवाई के बाद भी दस आरोपित फरार बताए गए हैं। इनमें सात अमेरिका, दो भारत और एक यूरोप में है।

न्याय विभाग के अनुसार, जाँच के दौरान करीब 1,000 किलोग्राम कोकीन, एक किलोग्राम हेरोइन, 40 हजार डॉलर नकद और 12 हथियार जब्त किए गए। सैक्रामेंटो क्षेत्र में 23 और लॉस एंजिलिस क्षेत्र में 11 ठिकानों पर तलाशी ली गई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये गिरोह हत्या, सुपारी देकर हत्या करवाने, गोलीबारी, अपहरण, रंगदारी, नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियारों के अवैध कारोबार और मानव तस्करी में शामिल थे। इनकी गतिविधियों का सबसे अधिक असर विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय पर पड़ा।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग पर हत्या और रंगदारी के आरोप

लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ 9 आरोपों वाली चार्जशीट 1 जुलाई को दाखिल की गई थी। अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि बिश्नोई ने सोशल मीडिया पर खुद को देशभक्त, राष्ट्रवादी और धार्मिक व्यक्ति के रूप में पेश किया। इसी छवि का इस्तेमाल भारत, अमेरिका और दूसरे देशों में युवाओं को अपने गिरोह से जोड़ने के लिए किया गया।

दूसरी ओर, वह जेल से अवैध मोबाइल फोन के जरिए राजनीतिक हत्याओं, गोलीबारी, अपहरण, रंगदारी, ड्रग तस्करी और मानव तस्करी जैसे अपराधों को निर्देशित करता था। कनाडा ने सितंबर 2025 में बिश्नोई गिरोह को आतंकवादी संगठन घोषित किया था।

अमेरिकी चार्जशीट के अनुसार, गोल्डी बराड़ उत्तरी अमेरिका और रोहित गोदारा यूरोप में बिश्नोई गैंग की गतिविधियाँ संभालता था। उन पर 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का भी आरोप है। अमेरिकी न्याय विभाग ने अपने दस्तावेजों में उसे प्रमुख भारतीय राजनीतिक और धार्मिक व्यक्ति बताया है और उसकी पहचान ‘HSN’ के रूप में दी है।

गैंग पर लॉस एंजिलिस और थाउजेंड ओक्स में लोगों से रंगदारी माँगने के आरोप भी हैं। एक मामले में पाँच मिलियन डॉलर की माँग की गई थी। गिरोह पर ड्रग्स की तस्करी के साथ दूसरे गिरोहों की ड्रग्स लूटने का भी आरोप है। नवंबर 2024 में अमेरिका से कनाडा भेजी जा रही 49 किलोग्राम कोकीन पकड़ी गई थी। मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच गैंग ने कथित रूप से लॉस एंजिलिस क्षेत्र में दूसरे गिरोहों से करीब 520 किलोग्राम कोकीन लूटी।

भगवानपुरिया गैंग के एक हजार से अधिक सदस्य होने का दावा

जग्गू भगवानपुरिया और उसके साथियों के खिलाफ सात आरोपों वाली चार्जशीट 25 जून को दाखिल की गई। इसमें 17 लोगों को आरोपित बनाया गया है। भगवानपुरिया गैंग के सदस्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक फैले बताए गए हैं। चार्जशीट का दावा है कि इस गिरोह से दुनिया भर में एक हजार से अधिक और अकेले अमेरिका में सौ से अधिक लोग जुड़े हैं।

रविंदर सिंह ढांडा के खिलाफ तीसरी चार्जशीट

तीसरी चार्जशीट रविंदर सिंह ढांडा और उसके साथियों के खिलाफ है। आरोप है कि यह नेटवर्क अमेरिका से कनाडा तक हर सप्ताह बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामाइन पहुँचाता था। ड्रग्स को लंबे रास्ते वाले ट्रकों और कभी-कभी खेतों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों में छिपाया जाता था।

जुलाई 2023 से नवंबर 2024 के बीच करीब 430.1 किलोग्राम कोकीन भेजने का आरोप है। जाँच में FBI, लॉस एंजिलिस पुलिस, कनाडा की RCMP और अमेरिका-कनाडा सीमा पर तैनात एजेंसियों के साथ स्पेन और दूसरे देशों की एजेंसियाँ भी शामिल रहीं।

अमेरिकी न्याय विभाग ने स्पष्ट किया है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपितों को निर्दोष माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर कई आरोपितों को कम से कम दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।

भारत ने क्या कहा?

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार (14 जुलाई 2026) को कहा, “हमने अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से जारी घोषणाएँ देखी हैं। ये घोषणाएँ कई देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय संगठित आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ लगाए गए आरोपों और की गई कार्रवाई से संबंधित हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “भारत लगातार यह कहता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध, आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध हथियारों की तस्करी और इनसे जुड़े आपराधिक नेटवर्क हमारे समाजों के लिए गंभीर खतरा हैं। आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटने के मामले में भारत और अमेरिका के बीच मजबूत, प्रभावी और लगातार बढ़ता सहयोग है। भारत और अमेरिका, दोनों देशों की एजेंसियाँ पिछले कई वर्षों से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रही हैं। यह सहयोग लगातार मजबूत और गहरा होता जा रहा है।”

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