ऑस्ट्रेलियाई पादरी ग्राहम स्टेंस हत्याकांड में करीब 26 साल से ओडिशा की जेल में बंद दारा सिंह रिहा होंगे? कई मीडिया रिपोर्टों में इस बात की संभावना जताई गई है। ओडिशा टीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 अगस्त तक दारा सिंह को रिहा करने का आदेश दिया है। यह बात उनके बाद उनके वकील एपी सिंह ने कही है। हालाँकि इस संबंध जारी विस्तृत आदेश के दस्तावेज खबर लिखे जाने तक सार्वजनिक नहीं हुई थी।
इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, “हम इस मामले को 19 अगस्त तक के लिए स्थगित करना उचित समझते हैं। इस बीच, हम उम्मीद करते हैं कि समिति (समय पूर्व रिहाई पर) अपना निर्णय लेगी।” कोर्ट ने ओडिशा सरकार के वकील पीवी योगेश्वरन से दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई को लेकर चल रही कार्यवाही की मौजूदा स्थिति के बारे में भी पूछा। मंगलवार (14 जुलाई) को हुई सुनवाई में सरकारी वकील योगेश्वरन ने अदालत को बताया कि रिहाई की समीक्षा करने वाली समिति को जिला अदालत से कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता थी, जिन्हें जल्द ही व्यवस्थित कर समिति के पास भेज दिया जाएगा।
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— Prameya News7 (@NEWS7Odia) July 14, 2026
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यह मामला साल 1999 का है, जब ओडिशा के मनोहरपुर में स्थानीय लोगों को कथित तौर पर ईसाई धर्म में परिवर्तित कराने के आरोप के बीच ऑस्ट्रेलियाई पादरी ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटों की जिंदा जलाकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में दारा सिंह मुख्य आरोपित थे, जिन्हें साल 2000 में ओडिशा की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान गिरफ्तार किया गया था। तब से लेकर अब तक वे जेल में ही हैं।
साल 2024 में दारा सिंह के परिवार से ऑपइंडिया की टीम ने मुलाकात की थी। उस समय ऑपइंडिया को पता चला कि दारा सिंह के माता-पिता की मृत्यु के समय भी उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद उनकी रिहाई की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
कैसे रवींद्र पाल बने दारा सिंह
दारा सिंह का मूल नाम रवींद्र कुमार पाल है। रवींद्र पाल के भाई अरविन्द पाल ने ऑपइंडिया को बताया कि उनका परिवार खानदानी तौर पर हिन्दू धर्म को समर्पित है। रवींद्र के पिता भी पूजा-पाठ करके ही अपनी दिनचर्या की शुरुआत करते थे। इंटरमीडियट की पढ़ाई के बाद रवींद्र पाल ने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए नोएडा में नौकरी शुरू कर दी।
रवींद्र कुमार पाल भी जो काम करते थे, उसको सही समय से अपने अंजाम तक पहुँचाते थे। कर्मठता और लगन को देखते हुए कम्पनी के स्टाफ और अधिकारी रवींद्र कुमार पाल को दारा सिंह नाम से बुलाने लगे थे। उस समय देश में दारा सिंह नाम के एक पहलवान हुआ करते थे। उनकी चर्चा देश-विदेश में थी। इस तरह रवींद्र पाल का नाम दारा सिंह पड़ गया।
नोएडा से शिफ्ट हुए ओडिशा
अरविन्द कुमार पाल हमें आगे बताते हैं कि नोएडा में नौकरी करने के ही दौरान उन्हें ओडिशा का एक साथी मिला। उस साथी से दारा सिंह से इतनी अच्छी दोस्ती हो गई कि दोनों एक-दूसरे के घर आने-जाने लगे। दारा सिंह को ओडिशा पसंद आने लगा और वो कुछ दिनों बाद अपने साथी के साथ नोएडा की नौकरी छोड़ कर ओडिशा में बस गए।
ओडिशा में दारा सिंह ने क्योंझर जिले में प्राइवेट तौर पर बच्चों को पढ़ाने की नौकरी कर ली। वे बच्चों को हिंदी भाषा पढ़ाते थे और साथ ही उन्हें हिन्दू धर्म की अच्छाइयाँ बताते थे। यहाँ बताना जरूरी है कि रवींद्र कुमार पाल उर्फ दारा सिंह मूलत: उत्तर प्रदेश के औरैया के रहने वाले थे। हालाँकि, अब वे ओडिशा को अपनी कर्मभूमि बना लिया था।
ऐसे बजरंग दल से जुड़े दारा सिंह
दारा सिंह के परिजनों ने बताया कि उनके द्वारा स्कूल में की जाने वाली धर्म-चर्चा आसपास के गाँवों में फ़ैल गई। इस चर्चा से प्रभावित होकर कई अभिभावक भी दारा सिंह से हिन्दू धर्म के बारे में बातचीत करने लगे। थोड़े ही दिनों में दारा सिंह की ख्याति पूरे क्योंझर और मयूरभंज आदि जिलों में फ़ैल गई।


