झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से आयोजित फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद गहराता ही जा रहा है। परीक्षा में शामिल हुए संथाल समुदाय (Santhal community) के अभ्यर्थियों ने संथाली भाषा के प्रश्न पत्र को आउट ऑफ सिलेबस (Out of Syllabus) बताते हुए परीक्षा रद्द कर फिर से कराने की माँग उठाई है।
छात्रों का आरोप है कि आयोग ने मैट्रिक स्तर (Class 10 level) का पाठ्यक्रम तय किया था, लेकिन परीक्षा में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) के स्तर के कठिन सवाल पूछ लिए गए।
झारखंड में 510 फील्ड वर्कर पदों (Field Worker posts) पर भर्ती के लिए यह परीक्षा 19 जुलाई 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में कम उपस्थिति (low attendance), दूर-दराज के परीक्षा केंद्र और प्रवेश पत्र (Admit Card) के देरी से मिले ई-मेल जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ही नाराजगी देखने को मिल रही थी। अब पर्चे के स्तर और पाठ्यक्रम को लेकर उठे नए सवालों ने इस पूरे मामले को और गरमा दिया है।
लगभग 40 प्रतिशत सवाल आउट ऑफ सिलेबस होने का दावा
छात्रों और अभ्यर्थी संगठनों का दावा है कि संथाली भाषा के पर्चे में करीब 40 फीसदी सवाल तय पाठ्यक्रम से पूरी तरह बाहर थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब भर्ती विज्ञापन में साफ तौर पर 10वीं कक्षा (Matric level) का सिलेबस बताया गया था, तो इतने कठिन और अप्रासंगिक सवाल क्यों पूछे गए?
छात्रों ने कुछ सवालों का उदाहरण देते हुए बताया कि संथाली भाषा के पर्चे में ‘महुआ’ शब्द का संस्कृत अनुवाद (Sanskrit translation) पूछ लिया गया। इसके अलावा ‘हिंदी’ शब्द की उत्पत्ति से जुड़ा सवाल भी पूछा गया, जिनका संथाली भाषा के मैट्रिक स्तर के पर्चे से कोई लेना-देना ही नहीं था।
छात्रों ने कहा- पर्चा यूपीएससी और यूजीसी-नेट स्तर का था
झारखंड संथाल स्टूडेंट यूनियन (Jharkhand Santhal Student Union) के सचिव और बोकारो के छात्र हरीश मरांडी ने आरोप लगाया कि पर्चे में भारी गड़बड़ी की गई है। उन्होंने कहा, “विज्ञापन में मैट्रिक स्तर लिखा गया था, लेकिन सवाल यूपीएससी और यूजीसी-नेट के स्तर के थे। चार प्रश्नों और उनके उत्तर के विकल्पों में गलतियाँ भी थीं। हमने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा दोबारा आयोजित करने की गुहार लगाई है।”
वहीं गिरिडीह के अभ्यर्थी गोपाल हंसदा ने बताया कि उन्होंने जेएसएससी अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्ति जताई है। हंसदा के अनुसार, कई सवाल ऐसे लेखकों के जीवन और रचनाओं पर आधारित थे जो 10वीं के पाठ्यक्रम का हिस्सा ही नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमारी आपत्ति उत्तर कुंजी (answer key) से नहीं, बल्कि सीधे प्रश्नों के चयन से है। यह सवाल राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) के भी नहीं, सीधे यूपीएससी स्तर के थे।”
धनबाद के उम्मीदवार किशोर मुर्मू ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड में 33 जनजातीय समुदाय (tribal communities) हैं और बाकी किसी भाषा के पर्चे में ऐसी समस्या नहीं आई। लेकिन संथाली भाषा का पर्चा बेहद कठिन बनाए जाने से संथाल समुदाय के अभ्यर्थियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
आयोग ने दिया भरोसा- उत्तर कुंजी के बाद दर्ज कराएँ आपत्ति
इस विवाद पर जेएसएससी के सचिव सुधीर गुप्ता ने अभ्यर्थियों से धैर्य रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा अनंतिम उत्तर कुंजी (Provisional Answer Key) जारी करने के बाद छात्र अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
आयोग के सचिव ने कहा, “शुरुआती उत्तर कुंजी (Answer Key) जारी होने के बाद अभ्यर्थी साक्ष्यों के साथ अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। घबराने की कोई जरूरत नहीं है, सभी आपत्तियों की जाँच की जाएगी और उचित समाधान निकाला जाएगा।” हालाँकि छात्र इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं और लगातार री-टेस्ट (re-test) की माँग पर अड़े हुए हैं।

