अयोध्या के राम मंदिर में पिछले दिनों सामने आए दान चोरी प्रकरण (Donation Embezzlement Scam) के बाद मंदिर की पवित्रता को फिर से बहाल करने के लिए आयोजित किया गया 10 दिवसीय प्रायश्चित अनुष्ठान (Atonement Ritual) शुक्रवार (24 जुलाई) को पूर्णाहूति के साथ संपन्न हो गया। यह अनुष्ठान 15 जुलाई को शुरू हुआ था, जिसका मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर की धार्मिक मर्यादा और शुचिता को बनाए रखना था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुष्ठान के अंतिम दिन मंदिर परिसर में विशेष पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें ट्रस्ट के प्रमुख न्यासियों महंत दिनेंद्र दास और कृष्ण मोहन ने मुख्य आहुतियाँ दीं। पूजा संपन्न होने के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें अयोध्या के स्थानीय ब्राह्मणों को श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया।
महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि इस 10 दिवसीय धार्मिक प्रक्रिया में अयोध्या के लगभग 70 वैदिक आचार्यों (Vedic acharyas) ने हिस्सा लिया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, हवन, रुद्राभिषेक और रामार्चा पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान लगातार किए गए। मंदिर के मुख्य पुजारी पूरे अनुष्ठान के दौरान नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते रहे।
न्यास के कोषाध्यक्ष (Treasurer) स्वामी गोविंद देव गिरि के दिशा-निर्देशों पर यह प्रायश्चित अनुष्ठान आयोजित किया गया। सनातन परंपराओं के अनुसार, किसी भी मंदिर में चोरी या किसी प्रकार की अशुद्धता (Ritual Impurity) होने पर परिसर का दोबारा शुद्धिकरण करना अनिवार्य माना जाता है।
क्या था अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी से जुड़ा पूरा मामला?
बता दें कि पिछले महीने राम मंदिर में चढ़ावे और दान के हिसाब-किताब में गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया था। दान के रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने के बाद मंदिर प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया।
एसआईटी की नौ पन्नों की शुरुआती जाँच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि यह चोरी केवल एकाध बार की नहीं थी, बल्कि सुरक्षा, निगरानी (Supervision) और नकदी संभालने की व्यवस्था में गंभीर खामियों के कारण लंबे समय से चल रही थी। जाँचकर्ताओं ने पाया कि कर्मचारी अपने कपड़ों और जूतों में पैसे छिपाकर बाहर ले जाते थे और कुछ अन्य साथी कर्मचारी इसमें उनका साथ देते थे।
जाँच में यह भी सामने आया कि कैश काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले कर्मचारियों की तलाशी सही से नहीं ली जाती थी और ड्रेस कोड के नियमों की अनदेखी की जा रही थी। इस मामले में नकदी गिनने वाले लगभग 30 अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी अब जाँच के दायरे में है और उनके वित्तीय रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की रिपोर्ट देखने के बाद मामले की जाँच के लिए नए सिरे से एसआईटी गठित करने का आदेश दिया था। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करेंगे ताकि दान चोरी की जाँच किसी ठोस नतीजे तक पहुँच सके।

