राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलियाजी धाम में एक ऐसी अनोखी भेंट सामने आई है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यहाँ डूंगरपुर जिले के आसपुर तहसील के खेड़ा सामोर (खेड़ा डामोर) गाँव निवासी किसान अमरजी गौतम पाटीदार ने अपनी सवा 10 बीघा कृषि भूमि और दो मंजिला मकान भगवान सांवलिया सेठ के नाम कर दिया।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए संपत्ति की रजिस्ट्री मंदिर मंडल के नाम दर्ज कराई गई। बताया जा रहा है कि इस संकल्प को पूरा करने में उन्हें करीब 10 वर्ष लग गए और इस दौरान उन्होंने मंदिर व प्रशासनिक कार्यालयों के 100 से अधिक चक्कर लगाए। अंत में सभी कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद मंदिर मंडल ने अमरजी का सम्मान भी किया।
2016 में लिया था संकल्प, कई अड़चनों के बाद पूरी हुई वर्षों पुरानी इच्छा
अमरजी पाटीदार साधारण जीवन जीते हैं और भगवान श्रीकृष्ण, भगवान राम तथा सांवलिया सेठ के प्रति उनकी गहरी आस्था है। उन्होंने वर्ष 2016 में अपनी संपत्ति भगवान को समर्पित करने का संकल्प लिया था। जमीन पर ऋण, अलग-अलग खातों में दर्ज भूमि और विभिन्न प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण मामला लंबे समय तक अटका रहा।
इस दौरान कई जिला कलेक्टर, मंदिर मंडल के अधिकारी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बदलते रहे, लेकिन अमरजी अपने फैसले पर अडिग रहे। आखिरकार सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद 23 जुलाई को आसपुर तहसील कार्यालय में कृषि भूमि की रजिस्ट्री मंदिर मंडल के नाम कराई गई, जबकि बाद में सांवलियाजी में मकान से जुड़ी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, अमरजी की कुल करीब 16 बीघा भूमि में से फिलहाल 10.15 (सवा 10) बीघा जमीन मंदिर के नाम दर्ज की गई है। उन्होंने भविष्य में शेष भूमि भी दान करने की इच्छा जताई है। रजिस्ट्री के दौरान मंदिर मंडल के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सिंह और संपदा प्रभारी भेरुगिरी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
गाँव वालों ने भी निभाया साथ, अब गोशाला बनते देखने की है इच्छा
दान की प्रक्रिया पूरी कराने, जमीन का कर्ज चुकाने, खातों को एक करने और अन्य औपचारिकताओं में कई लोगों ने सहयोग दिया। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी गिरिजा मैडम, भरत रावल, केवलजी और कुवैत में रहने वाले देवीलाल ने भी सहयोग राशि भेजी, जबकि अधिवक्ता वालजी पाटीदार ने बिना किसी शुल्क के पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराई।
अमरजी पाटीदार की इच्छा है कि दान की गई भूमि पर भविष्य में एक भव्य गोशाला बनाई जाए, ताकि वहाँ गौसेवा और जनसेवा का कार्य हो सके। उनके खेत में लगे करीब 30 आम के पेड़ों के फल भी वे कभी बेचते नहीं हैं। इतना ही नहीं अब वे अपनी माता के करीब एक किलो चाँदी के आभूषण भी भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित करने की तैयारी कर रहे हैं।
देश के समृद्ध मंदिरों में गिना जाता है सांवलियाजी धाम, आस्था की बनी नई मिसाल
श्री सांवलियाजी धाम राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के सबसे समृद्ध मंदिरों में शामिल माना जाता है। यहाँ हर महीने खुलने वाले भंडारों में करोड़ों रुपए की नकदी, सोना-चाँदी और अन्य बहुमूल्य भेंट प्राप्त होती हैं। इससे पहले भी एक श्रद्धालु ने मंदिर में करीब 11 किलो 400 ग्राम चाँदी की सिल्लियाँ भेंट की थीं, जिनकी कीमत 26 लाख रुपए से अधिक आँकी गई थी।
वहीं एक अन्य भक्त ने लगभग 137 ग्राम वजनी सोने की बाँसुरी भी अर्पित की थी। मंदिर समिति के अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है, लेकिन किसी भक्त का अपनी जमीन और मकान जैसी अचल संपत्ति भगवान के नाम कर देना अत्यंत दुर्लभ और प्रेरणादायक है।

