अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर बड़ा सैन्य हमला किया है। दोनों देशों ने मिलकर इराक के अलग-अलग इलाकों में कई ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ये कार्रवाई उन लगातार ड्रोन हमलों के जवाब में की गई, जिनमें पिछले 3 दिनों के दौरान अमेरिका और सऊदी अरब को 30 से ज्यादा ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। हालाँकि, अमेरिका का दावा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले के बाद इराक के पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) ने बताया कि इस कार्रवाई में उसके कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हुई है, जबकि 32 लोग घायल हुए हैं। PMF ईरान समर्थित कई सशस्त्र गुटों का गठबंधन है। संगठन ने अमेरिका और सऊदी अरब की इस कार्रवाई को ‘खतरनाक हमला’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।
वहीं अमेरिकी सेना का कहना है कि जिन ठिकानों पर हमला किया गया, वहाँ से ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के समर्थन से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। अमेरिका का दावा है कि फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच ईरान समर्थित गुट अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर 600 से ज्यादा हमले कर चुके हैं।
इस बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। इसी दिन ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दागीं। अमेरिका का कहना है कि इन मिसाइलों को भी हवा में ही रोक दिया गया। इसके बाद अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में जवाबी कार्रवाई की।
उधर, इराक की सरकार ने इस घटना के बाद सुरक्षा हालात की समीक्षा के लिए आपात बैठक बुलाई है। वहीं, अमेरिका और सऊदी अरब ने साफ कहा है कि अगर उनके सैनिकों या अहम ठिकानों पर फिर हमला हुआ, तो आगे भी इसी तरह की सैन्य कार्रवाई की जाएगी।

