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कौन हैं प्रो कामकोटी? जिन्हें प्रियंका गाँधी ने कहा ‘गोमूत्र एक्सपर्ट’: दिग्गज वैज्ञानिक, स्वदेशी ‘शक्ति’ प्रोसेसर के जनक और NSAB के सदस्य, जानिए उनके बारे में सब कुछ

प्रियंका गाँधी के 'गौमूत्र एक्सपर्ट' बयान से चर्चा में आईआईटी मद्रास डायरेक्टर प्रो. वी. कामकोटि। देश के दिग्गज कंप्यूटर वैज्ञानिक, स्वदेशी 'शक्ति' प्रोसेसर के जनक और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य, जानिए प्रियंका-राहुल की शैक्षणिक योग्यता...

देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के डायरेक्टर प्रोफेसर वी. कामकोटि इन दिनों अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। वजह उनका कोई नया वैज्ञानिक शोध या तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक तीखा राजनीतिक विवाद है। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी द्वारा प्रोफेसर कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ (Gaumutra Expert) कहे जाने के बाद से पूरे देश में शैक्षणिक और राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है। दरअसल, पीएम मोदी ने परीक्षा में सुधार के लिए एक हाई पॉवर्ड कमेटी बनाने का ऐलान किया, जिसकी कमान उन्होंने नंदन नीलकेणि को सौंपी। इस कमेटी में प्रोफेसर कामकोटि का भी नाम है।

इसी बात को लेकर लोकसभा में कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा ने तंज कसा था। उन्होंने कमेटी में शामिल प्रोफेसर कामकोटि को गौमूत्र विशेषज्ञ कह कर उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश की। एक तरफ जहाँ कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता के इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग यह सवाल भी पूछ रहे हैं कि आखिर प्रोफेसर कामकोटि हैं कौन? वे देश की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति में क्या भूमिका निभाते रहे हैं और उनके पास क्या-क्या डिग्रियाँ व अनुभव हैं?

कौन हैं प्रोफेसर वी. कामकोटि?

प्रोफेसर वी. कामकोटि का पूरा नाम वेझिनाथन कामकोटि है। वे भारत के अग्रणी और सबसे सम्मानित कंप्यूटर वैज्ञानिकों में से एक गिने जाते हैं। वर्तमान में वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) के डायरेक्टर (Director) के पद पर कार्यरत हैं। जनवरी 2022 में उन्होंने आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर के रूप में कमान संभाली थी।

आईआईटी मद्रास देश का वह संस्थान है जो शिक्षा मंत्रालय की एनआईआरएफ (NIRF) रैंकिंग में लगातार कई सालों से भारत का नंबर वन इंजीनियरिंग और ओवरऑल शैक्षणिक संस्थान बना हुआ है। ऐसे विश्वस्तरीय संस्थान का नेतृत्व करना अपने आप में यह साबित करता है कि प्रोफेसर कामकोटि की क्षमताएँ और उनका अनुभव कितना ऊँचा है।

वे न केवल कंप्यूटर साइंस के विद्वान हैं, बल्कि भारत सरकार की कई महत्वपूर्ण नीतियों, राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों और डिजिटल पहलों में सलाहकार के रूप में भी जुड़े रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता और आईआईटी मद्रास से जुड़ाव

प्रोफेसर कामकोटि की पूरी शैक्षणिक यात्रा असाधारण योग्यताओं और शोध से भरी रही है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग (Computer Science and Engineering) विषय में अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त की है। आइए उनके शैक्षणिक सफर को संक्षेप में जानते हैं-

एम.एस. (M.S.) और पीएचडी (Ph.D.): प्रोफेसर कामकोटि ने आईआईटी मद्रास से ही कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग में अपनी एम.एस. और पीएचडी की डिग्रियाँ हासिल कीं। उनका शोध मुख्य रूप से जटिल गणनाओं, कंप्यूटर आर्किटेक्चर और सिस्टम सुरक्षा पर आधारित था।
फैकल्टी के रूप में शुरुआत: वर्ष 2001 में वे आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बतौर फैकल्टी सदस्य शामिल हुए।
प्रशासनिक जिम्मेदारियाँ: डायरेक्टर बनने से पहले उन्होंने आईआईटी मद्रास में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और शैक्षणिक पदों को संभाला। वे जेईई (JEE) के चेयरमैन रह चुके हैं, जिसके तहत देशभर के लाखों छात्रों के लिए आईआईटी में प्रवेश की परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके अलावा उन्होंने इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च (ICSR) के एसोसिएट डीन के रूप में भी काम किया।

कंप्यूटर आर्किटेक्चर और ‘शक्ति’ माइक्रोप्रोसेसर के जनक

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रोफेसर कामकोटि का सबसे बड़ा योगदान भारत को सेमीकंडक्टर और माइक्रोप्रोसेसर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना माना जाता है।

  • माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम: प्रोफेसर कामकोटि आईआईटी मद्रास के ‘माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का नेतृत्व करते हैं।
  • स्वदेशी ‘शक्ति’ (SHAKTI) प्रोसेसर: उनके ही मार्गदर्शन में भारत का पहला व्यावसायिक स्तर का स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ विकसित किया गया था। इस सफलता ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में ला खड़ा किया जो खुद का माइक्रोप्रोसेसर डिजाइन करने में सक्षम हैं।
  • इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी: वे कंप्यूटर आर्किटेक्चर के साथ-साथ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी (सूचना सुरक्षा) और वीएलएसआई (VLSI) डिजाइन के विशेषज्ञ हैं। वे आईआईटी मद्रास में ‘इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी एजुकेशन एंड अवेयरनेस प्रोग्राम’ का भी नेतृत्व कर रहे हैं।

आज जब पूरी दुनिया सेमीकंडक्टर चिप्स की किल्लत और साइबर सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रही है, तब प्रोफेसर कामकोटि का शोध भारत को डिजिटल रूप से सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और सरकारी समितियों में प्रोफेसर कामकोटि की भूमिका

प्रोफेसर कामकोटि केवल प्रयोगशालाओं और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि भारत सरकार ने उनके अनुभव का उपयोग देश की सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को तय करने में भी किया है:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB): प्रोफेसर कामकोटि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। यहाँ वे साइबर सुरक्षा, डिजिटल सर्विलांस और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर महत्वपूर्ण सुझाव देते रहे हैं।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टास्क फोर्स के चेयरमैन: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा गठित ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टास्क फोर्स’ के वे चेयरमैन रह चुके हैं। इस टास्क फोर्स का मुख्य काम यह तय करना था कि भारत में एआई का इस्तेमाल आर्थिक विकास, रक्षा और जन-कल्याण के लिए कैसे किया जा सकता है।

बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में देते हैं योगदान

डिजिटल तकनीक और सुरक्षा में अपनी पकड़ के कारण देश की शीर्ष वित्तीय संस्थाएं भी प्रोफेसर कामकोटि के मार्गदर्शन पर भरोसा करती हैं:

  • नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE): वे एनएससी की टेक्नोलॉजी कमेटी के सदस्य के रूप में काम करते हैं, ताकि देश का सबसे बड़ा शेयर बाजार तकनीकी रूप से सुरक्षित और तेज बना रहे।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI): वे आरबीआई की विभिन्न तकनीकी समितियों से भी जुड़े रहे हैं, जो देश के बैंकिंग नेटवर्क और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए नीतियाँ बनाती हैं।

शोध, रिसर्च पेपर्स और R&D प्रोजेक्ट्स

अगर उनके शोध और अकादमिक योगदान की बात करें तो आँकड़े हैरान करने वाले हैं-

  • 150 से अधिक रिसर्च पेपर्स: अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित जर्नल्स और सम्मेलनों में उनके 150 से अधिक शोध पत्र (Research Papers) प्रकाशित हो चुके हैं।
  • पीएचडी और मास्टर स्कॉलर्स का मार्गदर्शन: उन्होंने दर्जनों पीएचडी और मास्टर डिग्री के छात्रों को रिसर्च गाइड के रूप में मार्गदर्शन दिया है। उनके पढ़ाए छात्र आज दुनिया भर की टेक कंपनियों और रिसर्च लैबों में ऊँचे पदों पर हैं।
  • 50 से अधिक प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व: उन्होंने उद्योग जगत और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित लगभग 50 अनुसंधान एवं विकास (R&D) परियोजनाओं का सफल नेतृत्व किया है।

प्रोफेसर कामकोटि को मिल चुके हैं ढेरो पुरस्कार और राष्ट्रीय सम्मान

विज्ञान और शिक्षा क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें देश-विदेश में कई प्रमुख पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है-

  • डीआरडीओ अकादमिक एक्सीलेंस अवॉर्ड (DRDO Academic Excellence Award): रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा उनके योगदान को मान्यता देने के लिए।
    आईईएसए टेक्नो विजनरी अवॉर्ड (IESA Techno Visionary Award): इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अभूतपूर्व काम के लिए।
    अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप: तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए मिलने वाली यह देश की बेहद प्रतिष्ठित फेलोशिप है।
    एसीसीएस लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (ACCS Lifetime Achievement Award): कंप्यूटर और कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी में जीवनभर के योगदान के लिए।
  • इसके अलावा आईबीएम फैकल्टी अवॉर्ड (IBM Faculty Award) और वासविक इंडस्ट्रियल रिसर्च अवॉर्ड (VASVIK Award) भी उन्हें मिल चुके हैं।

प्रियंका गाँधी के बयान से उपजा विवाद

इतने शानदार और विशाल वैज्ञानिक रिकॉर्ड वाले एक शीर्ष शोधकर्ता पर राजनीति का यह तंज तब शुरू हुआ जब कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने अपने एक बयान में प्रोफेसर कामकोटि को ‘गौमूत्र एक्सपर्ट’ कहकर संबोधित कर दिया।

इस बयान के बाद मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। लोगों ने सवाल उठाया कि देश के एक शीर्ष वैज्ञानिक और आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर के लिए इस तरह की शब्दावली का प्रयोग करना कितना सही है? विवाद बढ़ते ही कई प्रमुख समाचार चैनलों, अखबारों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रोफेसर कामकोटि की डिग्रियों और प्रियंका गाँधी की टिप्पणी के बीच तुलनात्मक रिपोर्टें प्रकाशित होने लगीं।

राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी का शैक्षणिक बैकग्राउंड भी जानना अहम

विवाद के तूल पकड़ने के बाद अब लोग गाँधी परिवार के प्रमुख नेताओं की शैक्षणिक योग्यताओं की चर्चा भी कर रहे हैं। अगर प्रियंका गाँधी की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने दिल्ली के जीसस एंड मैरी कॉलेज से मनोविज्ञान (Psychology) में स्नातक (Bachelor’s Degree) किया है। इसके बाद उन्होंने बौद्ध अध्ययन (Buddhist Studies) में स्नातकोत्तर (Master’s Degree) की डिग्री प्राप्त की।

निजी जीवन में बात करें तो प्रियंका गाँधी किस धर्म (हिंदू-पारसी-क्रिश्चियन) को मानती हैं, यही साफ नहीं है और वो विदेश से बौद्ध अध्ययन पढ़कर लौटी हैं जबकि खुद भारत बौद्ध धर्म का केंद्र है। ऐसे में उनका हिंदू वैज्ञानिक पर टिप्पणी हिंदूफोबिया या हिंदुओं से नफरत से भी जोड़कर देखा जा सकता है।

वहीं उनके भाई राहुल गाँधी की शिक्षा की बात करें तो उन्होंने शुरुआती पढ़ाई भारत में करने के बाद विदेश का रुख किया था। राहुल गाँधी ने सेंट स्टीफंस कॉलेज (दिल्ली) में दाखिला लिया था, लेकिन सुरक्षा कारणों से उन्हें वहाँ से हटना पड़ा। इसके बाद वे अमेरिका के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी गए और बाद में रोलोन्स कॉलेज से उन्होंने 1994 में अपनी बैचलर डिग्री पूरी की। इसके बाद वर्ष 1995 में उन्होंने ब्रिटेन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के ट्रिनिटी कॉलेज से डेवलपमेंट स्टडीज में एम.फिल (M.Phil) किया।

जिन्हें साइंस का ‘S’ भी नहीं पता वो उड़ा रहे विद्वान का उपहार

अब सवाल यह उठ रहा है कि जिस व्यक्ति ने अपनी पूरी जिंदगी कंप्यूटर आर्किटेक्चर, वीएलएसआई डिजाइन, सेमीकंडक्टर और साइबर सिक्योरिटी जैसे जटिल वैज्ञानिक विषयों को समझने और सिखाने में बिता दी, जिसने देश को पहला स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ दिया, उसे नीचा दिखाने के लिए ‘गौमूत्र विशेषज्ञ‘ जैसा तंज कसा जा रहा है।

देखा जाए तो राजनीति और मीडिया के गलियारों में अब इस बात का खुलकर उपहास उड़ाया जा रहा है कि जिन नेताओं ने विज्ञान और मॉडर्न टेक्नोलॉजी की ‘एबीसीडी’ भी नहीं पढ़ी है, जिनकी पूरी पढ़ाई साइकोलॉजी, बुद्धिस्ट स्टडीज या डेवलपमेंट स्टडीज जैसे विषयों में हुई है, वे भारत के एक शीर्ष कंप्यूटर वैज्ञानिक और आईआईटी डायरेक्टर की काबिलियत पर तंज कस रहे हैं और उन्हें गौमूत्र एक्सपर्ट बता रहे हैं।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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