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केवल 90 दिनों में… ₹36,877 करोड़ की परियोजनाएँ, 43 जिलों का तूफानी दौरा और 1.77 लाख बूथों पर तैयारी: जानिए 2027 की हैट्रिक के लिए कैसे मैदान सजा रहे हैं CM योगी

उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव को अभी थोड़ा वक्त बाकी है, लेकिन सूबे की राजनीति में सरगर्मी अभी से अपने चरम पर है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीति की इस बिसात पर एक तरफ मुख्यमंत्री खुद ताबड़तोड़ दौरे कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी का मजबूत संगठन हर एक बूथ तक अपनी गहरी पैठ बना रहा है।

अगर पिछले कुछ महीनों के आँकड़ों पर नजर डालें, तो साफ पता चलता है कि सरकार ने उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए खजाने का मुँह खोल दिया है। विकास के इन पहियों और संगठन की ताकत के आगे विपक्ष फिलहाल केवल बयानबाजी में ही उलझा नजर आ रहा है।

मुख्यमंत्री के तूफानी दौरे और ताबड़तोड़ रैलियाँ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले कुछ महीनों के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों का लगातार और तूफानी दौरा किया है। इसमें कुल 43 जिले शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने मई 2026 में गोरखपुर, प्रयागराज, बिजनौर, वाराणसी, देवरिया, महाराजगंज, मऊ और सहारनपुर का दौरा किया। इसके अलावा, जून में हाथरस, आजमगढ़, अलीगढ़, बलरामपुर, गौतम बुद्ध नगर, पीलीभीत, अयोध्या, देवरिया, गोंडा, फिरोजाबाद, कुशीनगर, महोबा, संत कबीर नगर, उन्नाव, झांसी, हमीरपुर, ललितपुर, वाराणसी, मुरादाबाद और गाजियाबाद का दौरा किया।

बात करें जुलाई की तो मुख्यमंत्री ने वाराणसी, बांदा, चित्रकूट, मैनपुरी, अमरोहा, बहराइच, बाराबंकी, बिजनौर, बुलंदशहर, इटावा, कुशीनगर, शामली, प्रतापगढ़, अयोध्या, सुल्तानपुर, बस्ती, आगरा, फतेहपुर, संभल, प्रयागराज, गाजियाबाद और श्रावस्ती का दौरा करने करोड़ों की सौगात और विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

इन तमाम जनसभाओं और दौरों के दौरान सिर्फ भाषण ही नहीं दिए गए, बल्कि जनता को सीधे तौर पर लाभ भी पहुँचाया गया। स्थानीय कार्यक्रमों में जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं के तहत चेक, घरों की चाबियाँ, लैपटॉप, आयुष्मान कार्ड और तमाम तरह के प्रमाण पत्र बाँटे गए। इन मंचों से मुख्यमंत्री ने हमेशा से कानून-व्यवस्था की तारीफ करते हुए एक बहुत बड़ा और लोकप्रिय नारा दिया- ‘नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में अब सब चंगा।’

हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं की ऐतिहासिक सौगात

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इन दौरों का सबसे बड़ा उद्देश्य उत्तर प्रदेश के हर कोने तक विकास की रोशनी पहुँचाना रहा है। पिछले कुछ महीनों में जितने भी जिलों का दौरा किया गया, वहाँ हजारों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। अगर इन सभी बड़ी परियोजनाओं की लागत को जोड़ा जाए, तो यह आँकड़ा लगभग 36,877 करोड़ रुपए के आसपास बैठता है।

इसमें गौतमबुद्धनगर में अकेले 6,750 करोड़ रुपए के भारी-भरकम निवेश वाली इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण परियोजनाओं को शामिल कर लिया जाए, तो कुल सौगात और निवेश का यह आँकड़ा 19,200 करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो जाता है। इन पैसों से राज्य में शानदार सड़कें, आधुनिक अस्पताल, बेहतरीन कनेक्टिविटी, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते तैयार हो रहे हैं। इसके अलावा, शिक्षकों के लिए करोड़ों का बीमा, होमगार्ड्स के लिए मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं और स्टार्टअप फंड जैसे बड़े कदम उठाकर सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उसका फोकस समाज के हर वर्ग के उत्थान पर है।

सुरक्षा का मजबूत माहौल

जनसभाओं के दौरान मुख्यमंत्री योगी विपक्षी दलों, खास तौर पर समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस पर पूरी तरह आक्रामक नजर आए। उन्होंने पुरानी सरकारों के दौर की याद दिलाते हुए जनता को बताया कि कैसे पहले गरीबों के हक पर डाका डाला जाता था और त्योहारों के समय दंगे कराए जाते थे। मुख्यमंत्री ने बड़े साफ शब्दों में कहा कि आज का उत्तर प्रदेश माफियाओं से मुक्त है और यहाँ कानून का राज है।

उन्होंने युवाओं के भविष्य, किसानों की खुशहाली और महिलाओं की सुरक्षा को अपनी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। विपक्ष के पास आज जनता को गिनाने के लिए कोई ठोस काम नहीं बचा है, इसलिए वे केवल झूठे नैरेटिव गढ़ने में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर, योगी सरकार ने अपने विकास कार्यों और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दम पर आम जनता के दिलों में एक अटूट विश्वास पैदा कर दिया है।

भाजपा संगठन की ताकत: बूथ स्तर तक सक्रियता का मेगा प्लान

सरकार के विकास कार्यों के साथ-साथ पार्टी का संगठन भी 2027 के चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता है। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका अनुशासित और मजबूत संगठन है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर एक साथ ऐतिहासिक बूथ सम्मेलनों का आयोजन किया था। इस मेगा अभियान के जरिए राज्य के 1,77,516 मतदान केंद्रों को सीधे तौर पर कवर किया गया, जो अब तक का सबसे बड़ा बूथ-स्तरीय संगठनात्मक अभियान माना जा रहा है।

इस अभियान की कमान खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने संभाली थी। पार्टी लगातार अपने बूथ अध्यक्षों, शक्ति केंद्र प्रमुखों और मंडल स्तर के पदाधिकारियों को ट्रेनिंग, संवाद और समीक्षा बैठकों के जरिए अपडेट रख रही है। हर बूथ पर एक ऐसा मजबूत कार्यकर्ता तंत्र तैयार किया जा रहा है जो घर-घर जाकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दे सके और नए मतदाताओं को पार्टी के साथ जोड़ सके।

कमजोर सीटों पर विशेष फोकस और मजबूत डेटाबेस

पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को धार देते हुए राज्य की सभी 403 सीटों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बाँटा है। इनमें से उन लगभग 61 सीटों पर विशेष नजर रखी जा रही है जहाँ पिछले कुछ चुनावों में पार्टी को सफलता नहीं मिल पाई थी। इन सभी सीटों पर नए सिरे से बूथ मैनेजमेंट तैयार किया जा रहा है, स्थानीय जातीय समीकरणों का बारीकी से अध्ययन हो रहा है और संभावित उम्मीदवारों का सर्वे कराया जा रहा है।

इसके अलावा, भाजपा अपने करीब 2.5 करोड़ प्राथमिक सदस्यों का एक बहुत ही सटीक और सत्यापित डेटाबेस तैयार कर रही है। प्रदेश स्तर से लेकर बूथ स्तर तक लगातार रिपोर्ट मँगाई जा रही है। वृक्षारोपण अभियानों, डिजिटल ट्रेनिंग कैंपों और कारगिल विजय दिवस जैसे आयोजनों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को लगातार मैदान में सक्रिय रखा जा रहा है ताकि चुनावी मशीनरी में कभी भी सुस्ती न आने पाए।

क्या है 2027 के चुनाव की पूरी तस्वीर?

उत्तर प्रदेश का यह राजनीतिक परिदृश्य इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि भारतीय जनता पार्टी साल 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बेहद गंभीर है और वह किसी भी मोर्चे पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार जिलों के चक्कर काटकर विकास कार्यों की झड़ी लगा रहे हैं और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ पार्टी का अनुशासित संगठन बूथ स्तर पर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत कर रहा है।

विपक्ष के खेमे में आज भी आपसी बिखराव और मजबूत मुद्दों की भारी कमी साफ दिखाई देती है, जबकि NDA सरकार ने बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था, धार्मिक पर्यटन और महिला-युवा-शिक्षक कल्याणकारी योजनाओं के जरिए अपनी जमीन बेहद मजबूत कर ली है। हालाँकि महँगाई या स्थानीय स्तर की कुछ छोटी-मोटी समस्याओं जैसे मुद्दे विपक्ष उठाता जरूर है, लेकिन जिस तरह से भाजपा ने समय से पहले अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक दी है और ताबड़तोड़ विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतार दिया है, उससे यह साफ हो जाता है कि 2027 की यह राजनीतिक लड़ाई बेहद रोमांचक होगी। सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है और अब देखना यह होगा कि जनता इस दमदार विकास और सुशासन के मॉडल पर कितनी बड़ी मुहर लगाती है।

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मीडिया में 7+ वर्षों का सफर। ETV भारत, इंडिया न्यूज़, सुदर्शन न्यूज़, MH1 और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया। डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, एंकरिंग और सोशल मीडिया, हर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में ऑपइंडिया के साथ जुड़ी हूँ।

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