यूरोप एक बार फिर अवैध शरणार्थियों के नाम से काँप रहा है। दरअसल अफ्रीकी देश मोरक्को से बड़ी संख्या में अवैध शरणार्थी स्पेन में घुस गए हैं। ये लोग समुद्र तैर कर या जमीनी बॉर्डर के जरिए अवैध तरीके से स्पेन में घुस रहे हैं। सेउटा में घुसने से माइग्रेंट स्पेन के इलाके और आगे चलकर EU के इलाके में आ सकते हैं, जहाँ वे शरण माँग सकते हैं।
इन शरणार्थियों ने 8 साल पहले सीरिया संकट की याद ताजा कर दी है, जब यूरोप में बड़े पैमाने पर कट्टरपंथी शरणार्थी के तौर पर आए थे। स्पेन, फ्रांस, स्वीडन, जर्मनी समेत कई देशों में इनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि प्रशासनिक व्यवस्था चरमराने लगी। इसकी याद दिलाते हुए इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने शरणार्थियों के नए दौर पर चिंता जाहिर की है और कहा है कि वे स्पेन के साथ शेंगेन समझौता रद्द कर सकते हैं।
क्या है मामला
सेउटा मोरक्को के उत्तरी तट पर स्पेन के कंट्रोल वाला एक छोटा सा इलाका है। इससे सटे मेलिला एन्क्लेव में अफ्रीका और यूरोपियन यूनियन का जमीनी बॉर्डर है। सेउटा में हजारों शरणार्थी ब्रेकवॉटर के आस-पास तैरकर या बॉर्डर की बाड़ तोड़कर घुस गए हैं, जिससे छोटा-सा यूरोपियन देश स्पेन पर काफी दबाव बढ़ गया है। यहाँ तक कि स्पेन को सेना और ज्यादा पुलिस बल तैनात करनी पड़ी है।
अवैध तरीके से घुस आए बेलगाम शरणार्थियों के चलते बवाल मच गया है। यहाँ बड़ा मानवीय और सुरक्षा संकट पैदा हो गया है। दरअसल अचानक हजारों शरणार्थी सीमा पार कर घुसने लगे। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, हजारों शरणार्थी मोरक्को की सीमा पार कर स्पेन के शहर सेउटा में दाखिल हुए। नए जत्थे में 1500 से ज्यादा शरणार्थी हैं, जो समुद्र के रास्ते शहर में दाखिल हो रहे हैं। सेउटा के प्रशासनिक अधिकारी जुआन जीसस विवास के मुताबिक, पिछले हफ्ते भर से शरणार्थियों का आना काफी बढ़ गया है और संसाधनों की कमी हो रही है।
Thousands of migrants from Morocco poured over the country's border with Spain and into the country’s African enclave of Ceuta after swimming around border barriers to reach the territory.
— Fox News (@FoxNews) July 30, 2026
The latest wave comes after more than 1,500 migrants arrived in Ceuta by sea over the past… pic.twitter.com/kETfPOPTbO
स्पेन में घुस रहे शरणार्थियों का वीडियो भी सामने आया है। सैकड़ों लोग इन्फ्लेटेबल ट्यूब और दूसरे फ्लोटेशन डिवाइस का इस्तेमाल करके ब्रेकवाटर के आसपास तैरते हुए दिखे। हजारों लोग जमीनी सीमा के गेट से घुसते दिखाई दिए। इससे घबरा कर सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी घबरा कर भाग गए।
🇪🇸 Insane footage from the Moroccan border with Spain: thousands of migrants are gathering at the border
— Visegrád 24 (@visegrad24) July 30, 2026
This is exactly what Spanish Prime Minister Sanchez was aiming for. pic.twitter.com/Fb1pEKU0jj
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पेन के सरकारी ब्रॉडकास्टर TVE ने अंदाजा लगाया है कि करीब 3000 लोग इस इलाके में घुसे हैं। समुद्र पार करते वक्त 9 शरणार्थियों की लाश भी पुलिस ने बरामद की है। इन शरणार्थियों में ज्यादातर मोरक्को के नागरिक हैं। दरअसल यूरोप में जमीन से घुसने का एकमात्र रास्ता मोरक्को और स्पेन की सीमा है। यहाँ तक कि सबसे आसान समुद्री रास्ता भी स्पेन तक ही जाता है। इसलिए 2021 के बाद 30 जुलाई 2026 को सबसे ज्यादा शरणार्थी स्पेन में घुस आए हैं। इसके साथ ही लगातार इनके आने का सिलसिला जारी है।
स्थानीय प्रशासन ने केन्द्र को आर्मी तैनात करने और नेशनल इमरजैंसी घोषित करने की माँग की है। स्पेन में आर्मी की हलचल तेज है। बख्तरबंद गाड़ियाँ घूमने लगी हैं। हालाँकि आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है।
क्या कहा मेलोनी ने
स्पेन में बॉर्डर पर बवाल के बाद इटली भी सचेत हो गया है। अवैध शरणार्थियों के आने पर इटली ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने कहा कि वह ‘कड़े उपायों’ पर विचार कर रही हैं। उन्होंने स्पेन के साथ शेंगेन समझौते (Schengen Agreement) को अस्थायी रूप से निलंबित करने की चेतावनी दी है।
यूरोपीय देशों के बीच सीमा खुला रखने से जुडा शेंगेन समझौता इसके सदस्य देशों के बीच 1985 में हुई थी। जिसके तहत सदस्य देशों ने अपनी आपसी सीमाओं पर नियंत्रण समाप्त कर दिया है यानी इटली ने अपनी सीमा सील करने की चेतावनी दी है।
मेलोनी ने X पर लिखा, “सेउटा से आ रही तस्वीरें चौंकाने वाली हैं और एक बार फिर दिखाती हैं कि बिना कंट्रोल के अवैध घुसपैठ यूरोप के बॉर्डर की सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा खतरा है।”
Le immagini che arrivano da Ceuta sono impressionanti e dimostrano, ancora una volta, che l’immigrazione clandestina fuori controllo rappresenta una minaccia concreta per la sicurezza dei confini europei.
— Giorgia Meloni (@GiorgiaMeloni) July 30, 2026
Mi sono confrontata con il Ministro dell’Interno Matteo Piantedosi.…
उन्होंने कहा कि इटली इस पर विचार कर रहा है कि वह स्पेन के साथ शेंगेन एरिया को सस्पेंड कर दिया जाए। हालाँकि मेलोनी ने यह नहीं बताया कि ऐसा कैसे किया जाएगा।
स्पेन के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आई शरणार्थियों की बाढ़
शरणार्थियों को लगता है कि यहाँ पहुँचने पर स्पेन के मुख्य भाग में एंट्री हो जाएगी और फिर यूरोपीय यूनियन के देशों तक पहुँचना आसान हो जाएगा।
स्पेन का मानना है कि मोरक्को और दूसरे अफ्रीकी देशों से जो शरणार्थी आ रहे हैं, उसके पीछे तस्करी करने वाले नेटवर्क का हाथ है। हाल ही में स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने बिना सही प्रक्रिया के समुद्र के रास्ते सेउटा में आने वाले शरणार्थियों को तुरंत वापस लौटने पर रोक लगा दी थी। स्पेन के सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मोरक्को के रास्ते सेउटा-मेलिला आने वाले शरणार्थियों को पकड़े जाने पर बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीधा मोरक्को नहीं भेजा जा सकता है। इससे तस्करी करने वाले नेटवर्क को बढ़ावा मिला है।
शरणार्थी सेउटा पहुँचने से पहले मोरक्को के शहर फनीडेक में इकट्ठा हो रहे हैं। मोरक्को के सुरक्षा बल इन पर काबू पाने की कोशिश कर रहे हैं और इन पर पानी की बौछारें की जा रही हैं, लेकिन ये टस से मस नहीं हो रहे।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज और गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का के शुक्रवार को सेउटा जाकर लोकल अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों से मुलाकात की है। साथ ही मोरक्को के साथ कोऑर्डिनेट कर जो लोग अवैध तरीके से आए हैं, उन्हें वापस भेजने को लेकर वार्ता करेंगे।
2011-21 के बीच सेउटा में घुस आए थे शरणार्थी
स्पेन के साथ डिप्लोमैटिक विवाद के बीच मई 2021 में मोरक्को ने सीमा पर ढील दे दी थी, जिससे मात्र दो दिनों में हजारों लोग सेउटा घुस आए थे। इन अवैध शरणार्थियों में कई नाबालिग शामिल थे। नई शरणार्थियों की घुसपैठ से स्पेन और मोरक्को के रिश्तों पर असर पड़ने की आशंका है। हालाँकि अभी तक दोनों देशों ने सहयोग करने की बात कही है।
साल 2011 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध और आईएसआईएस के आतंक से बचने के लिए लाखों सीरियाई यूरोपीय यूनियन के देशों में शरणार्थी बन कर आए। इनके यूरोप पहुँचने के कई मार्ग थे, जिनमें मोरक्को से होते हुए स्पेन तक पहुँचना भी एक था। उस वक्त भी इनलोगों ने समुद्री और जमीनी रास्ते को वैसे ही चुना था, जैसा अभी हो रहा है।
यहाँ से यूरोप के दूसरे देशों में ये पहुँचे। जर्मनी, स्वीडन, ऑस्ट्रिया, नीदरलैंड जैसे अमीर यूरोपीय देशों ने इनके लिए अपनी ‘मानवीयता’ दिखाई। इनलोगों को शरण दी गई। इसके बाद 2015 में यूरोप का प्रवासी संकट भी आया और यूरोप के ज्यादातर देशों में कट्टरपंथियों की जमात बढ़ गई। हालात ये है कि इंग्लैंड, फ्राँस, जर्मनी समेत सारे देश अब क्राइम काफी बढ़ गया है। इस्लामी ग्रूमिंग गैंग लगातार स्थानीय नाबालिग लड़कियों को अपना निशाना बना रहे हैं। रेप, लूट-पाट, नशे की तस्करी जैसे क्राइम से निपटना स्थानीय सुरक्षा बलों के लिए मुश्किल हो रहा है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में घुसपैठियों को लेकर कहा है कि अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों से आने वाले घुसपैठिए यूरोपीय देशों और यूके के लिए खतरा हैं। ये लोग यूरोप की पहचान और संस्कृति को नष्ट कर रहे हैं। उन्होंने इसको लेकर यूरोपीय नेताओं की आलोचना भी की थी कि उन्होंने नरमी बरती और कड़े कदम नहीं उठाए।
यूरोप की इस समस्या से भारत भी दो चार होता रहा है। यहाँ अवैध घुसपैठियों की वजह से दशकों से कई दिक्कतें पेश आ रही हैं। असम से पश्चिम बंगाल तक बांग्लादेशी घुसपैठियों से सिर्फ आबादी ही नहीं बढ़ी है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में जबरदस्त तरीके से डेमोग्राफी भी बदली है।
संसद में विदेश मामलों की स्थाई समिति ने बांग्लादेश से भारत में होने वाली अवैध घुसपैठ पर चिंता जताते हुए इस पर ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप तैयार करने की बात कही है। ताकि बांग्लादेशी घुसपैठियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होने और उनके प्रत्यर्पण पर निगरानी रखने में आसानी हो। समिति के मुताबिक, अभी 2369 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि के मामले बांग्लादेश सरकार के पास लंबित हैं।
ये तो उन नागरिकों की बात है, जिनके मामले सामने आए हैं। लेकिन भारत में ऐसे अवैध घुसपैठियों के मामले अक्सर सामने आते हैं, जिनका पता सालों बाद चलता है। इनके वजह से भारत के संसाधनों पर असर पड़ता है और रोजगार प्रभावित होते हैं। चुनाव में ये लोग पार्टियों के वोट बैंक बन जाते हैं और उनके पास भारत के वोटर कार्ड से लेकर आधार कार्ड तक पहुँच जाता है। ये लोग रोजगार पर बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं। चुनावों में इसका असर भी दिखता है।
न सिर्फ राजनीतिक- सामाजिक तौर पर बल्कि आर्थिक तौर पर भी इससे देश कमजोर होता है। घुसपैठियों के खिलाफ अभियान चलाने के दौरान कई बार मानवाधिकार की बात की जाती है। सुप्रीम कोर्ट तक में कई ऐसे मामले दर्ज हैं। कोर्ट ने घुसपैठियों को लेकर कहा है कि उनके पास कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
लेकिन स्थानीय स्तर पर मिलने वाले फर्जी दस्तावेज और कानूनों की कुछ सीमाएं उन्हें अनौपचारिक सुरक्षा प्रदान करती हैं। स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और मिलीभगत से आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे कागजात बन जाने के कारण पुलिस या प्रशासन के लिए तुरंत पहचान करना मुश्किल होता है। अगर पहचान हो भी गई तो कोर्ट में मामला लंबित रहता है। बड़े बड़े वकील से लेकर पूरा लिबरल इकोसिस्टम उन्हें बचाने में लग जाता है।


