काँवड़ धर्म-समाज-संस्कृति और लोकजीवन की पाठशाला: CM की ‘योगी की पाती’ में आत्मसंयम और परस्पर सहयोग का संदेश, यात्रा के प्रति बताई जिम्मेदारी

उत्तर प्रदेश में सावन के महीने में चल रही काँवड़ यात्रा को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के लोगों के नाम पत्र लिखा है। अपनी ‘योगी की पाती’ में उन्होंने काँवड़ यात्रा को महज एक धार्मिक रस्म से कहीं ऊपर बताया है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय संस्कृति, आपसी भाईचारे, अनुशासन और जनकल्याण की एक जीती-जागती परंपरा है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ियों से गुजारिश की है कि वे इस यात्रा को सेवा-भाव, साफ-सफाई और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का जरिया बनाएँ।

सीएम ने कहा कि हमारी परंपराओं में कुछ यात्राएँ समाज को आपस में जोड़ने का काम करती हैं, और सावन के महीने में निकलने वाली काँवड़ यात्रा भी बिल्कुल वैसी ही है। हर साल करोड़ों श्रद्धालु इसमें शामिल होकर शिवभक्ति के एक ही धागे में बंध जाते हैं। भगवा वस्त्र, कंधे पर कांवड़ और भोलेनाथ के प्रति गहरी आस्था ही इन कांवड़ियों की पहचान है।

समुद्र मंथन की कथा का जिक्र

अपने पत्र में मुख्यमंत्री ने समुद्र मंथन की पौराणिक कथा भी याद दिलाई। कहा कि जब भगवान शिव ने पूरी सृष्टि को बचाने के लिए हलाहल विष पी लिया था और नीलकंठ कहलाए, तब देवताओं ने उन्हें गंगाजल से नहलाया था। इसी वजह से सावन में गंगाजल चढ़ाने की परंपरा को खासतौर पर पुण्यदायी माना जाता है।

उन्होंने आगे लिखा कि यह यात्रा तप, सेवा, आत्मसंयम और आपसी सहयोग का पैगाम देती है। उन्होंने कहा, “तप से इंसान का चरित्र निखरता है, सेवा से समाज सुंदर बनता है, और एकजुटता से देश मजबूत होता है।“

दिव्यांग श्रद्धालुओं की हिम्मत को सराहा

सीएम योगी ने खासतौर पर उन दिव्यांग शिवभक्तों का जिक्र किया, जो तमाम मुश्किलों के बावजूद पूरी निष्ठा के साथ यात्रा पूरी करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे भक्तों को देखकर उनका मन खुद-ब-खुद श्रद्धा से भर जाता है, और यही अटूट विश्वास और समर्पण कांवड़ यात्रा की असली ताकत है।

सरकार की ओर से पुख्ता इंतजाम

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि हर शिवभक्त की यात्रा इज्जत के साथ और सुरक्षित तरीके से पूरी हो, इसके लिए राज्य सरकार पूरी तरह जुटी हुई है। कांवड़ियों के स्वागत में फूल बरसाने से लेकर रास्तों की सफाई, व्यवस्थित शिविर, साफ पीने का पानी, मेडिकल सुविधा, शौचालय, रोशनी का इंतजाम, ट्रैफिक की बेहतर व्यवस्था और कंट्रोल रूम के जरिए लगातार निगरानी जैसे तमाम बंदोबस्त किए गए हैं।

श्रद्धालुओं से एक खास गुजारिश

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लोगों से अपील की है कि वे कांवड़ यात्रा को सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का त्योहार बनाएँ। उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल कांवड़ इस्तेमाल करने और प्लास्टिक से दूरी बनाने का संकल्प लेने को भी कहा। साथ ही यह भी याद दिलाया कि अगर रास्ते में एंबुलेंस या स्कूल बस गुजर रही हो, तो उसे पहले जाने दें क्योंकि हमारी थोड़ी सी सूझबूझ किसी की जिंदगी के लिए बहुत बड़ी मदद बन सकती है।

पत्र के आखिर में सीएम ने कहा कि सरकार श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, मगर इस पवित्र परंपरा की गरिमा बनाए रखना समाज के हर इंसान का फर्ज है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा, अनुशासन, संयम और सेवा ही कांवड़ यात्रा की आत्मा है, और यही भगवान शिव के लोककल्याण के संदेश का असली मतलब भी है।