पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दो महीने से ज्यादा समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए सुरक्षा बलों की सख्ती और हिंसक कार्रवाई के बाद अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के सुर बदले हुए नजर आ रहे हैं।
जिस अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) को पाकिस्तान ने प्रतिबंधित कर रखा है और जिसके नेतृत्व में महंगाई, बिजली की ऊँची दरों, आर्थिक उपेक्षा और विवादित चुनावी व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन चल रहा है, अब उसी के साथ बातचीत की बात की जा रही है।
शाहबाज शरीफ ने कहा है कि किसी भी समस्या का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर बैठकर किया जाना चाहिए। वहीं उनके करीबी सहयोगी और सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने प्रदर्शनकारियों को ही ‘देशभक्त’ बताते हुए बातचीत का भरोसा दिया है।
घबराए शाहबाज, बोले- बातचीत ही समस्या का समाधान
PoK में लगातार बढ़ते असंतोष के बीच शाहबाज शरीफ ने अब बातचीत को समाधान का रास्ता बताया है। शरीफ ने कहा, “अगर कोई मुद्दा है, तो उसे बातचीत की मेज पर बैठकर और बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा, “आज भी मेरा मानना है कि नई सरकार सत्ता में आएगी, तो प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ेगा।”
दरअसल PoK में तीन चरणों में हो रहे चुनाव के बीच पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) सबसे मजबूत स्थिति में उभरी है और उपलब्ध नतीजों के मुताबिक पार्टी 45 निर्वाचित सीटों में से 25 सीटें जीत चुकी है। ऐसे में नई सरकार के गठन के बाद JAAC के साथ बातचीत की जिम्मेदारी भी PML-N पर आने की संभावना है।
बातचीत की पेशकश के साथ शाहबाज शरीफ ने शांतिपूर्ण अपनी बुनियादी माँगें रखने वालों लोगों को चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि जो लोग धैर्य, शांति और सहनशीलता के साथ अपनी शिकायतें सामने रखना चाहते हैं, उनके लिए बातचीत का रास्ता खुला रहेगा, लेकिन क्षेत्र में अशांति और अराजकता फैलाने की कोशिश करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शाहबाज के सलाहकार बोले- JAAC के 99% लोग देशभक्त
शाहबाज शरीफ का नरम रुख अचानक सामने नहीं आया है। इससे पहले उनके करीबी सहयोगी और सलाहकार राणा सनाउल्लाह भी JAAC के प्रदर्शनकारियों को लेकर सुलह वाला रुख अपना चुके हैं। उन्होंने संगठन से जुड़े लोगों को बड़ी संख्या में ‘देशभक्त’ बताते हुए कहा कि PML-N की आने वाली सरकार उनके साथ बातचीत करेगी।
राणा सनाउल्लाह ने शनिवार (8 अगस्त 2026) को एक रैली में कहा, “जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े 99 प्रतिशत लोग हमारे देशभक्त भाई हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बनने के बाद PML-N के प्रतिनिधि JAAC के सदस्यों के साथ बैठेंगे और इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश करेंगे।
यानी जिस संगठन को पाकिस्तान की क्षेत्रीय सरकार ने जून में प्रतिबंधित कर दिया था, उसके नेताओं और समर्थकों को अब PML-N के वरिष्ठ नेता बातचीत के जरिए मनाने की बात कर रहे हैं। यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले पाकिस्तान की तरफ से प्रदर्शनकारियों को लेकर बेहद सख्त रवैया अपनाया गया था।
महंगाई-बिजली से लेकर 12 शरणार्थी सीटों तक, क्यों भड़का है PoK?
PoK में चल रहा आंदोलन केवल किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। JAAC के नेतृत्व में छात्र, व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता समेत समाज के कई वर्ग लंबे समय से सड़कों पर हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगों में महंगाई पर नियंत्रण, बिजली की ऊँची कीमतों में राहत और क्षेत्र के आर्थिक शोषण एवं उपेक्षा को खत्म करना शामिल है।
इसके अलावा PoK विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करने की माँग भी आंदोलन का अहम हिस्सा है। JAAC का आरोप है कि इन 12 सीटों के जरिए पाकिस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान PoK की राजनीति और सरकार के गठन को प्रभावित करने की स्थिति में रहता है।
इसी वजह से समिति इन सीटों को विवादित बताते हुए इन्हें समाप्त करने की माँग कर रही है। इसी बीच PoK में तीन चरणों में हुए चुनाव भी विवादों से घिर गए। पहले दो चरण 27 जुलाई और 3 अगस्त को हुए, जिनमें PML-N ने बढ़त हासिल की।
तीसरे और अंतिम चरण में चार सीटों के लिए सोमवार को मतदान होना था, जबकि सात अन्य विधानसभा क्षेत्रों में मतदान अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है। चुनाव के दौरान धांधली, बैलेट पेपर लूटने, झड़प और सुरक्षा बलों के साथ टकराव जैसे आरोप सामने आए। JAAC ने चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए विरोध किया है।
आंदोलनकारियों की ओर से चुनाव के बाद हिंसा को लेकर बेहद गंभीर दावे किए गए हैं। JAAC का कहना है कि चुनाव शुरू होने के बाद 40 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। समिति ने जून के पहले सप्ताह से अब तक करीब 400 प्रदर्शनकारियों के मारे जाने का भी दावा किया है।
दमन के बाद भी जारी है प्रदर्शन
PoK में पाकिस्तान की कार्रवाई के बावजूद असंतोष खत्म नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई, इंटरनेट और संचार व्यवस्था से जुड़ी पाबंदियों, सुरक्षा बलों की तैनाती और हिंसा के आरोपों ने पूरे क्षेत्र की स्थिति को बेहद तनावपूर्ण बना दिया है। स्थानीय नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा सीधे गोलियाँ चलाई जा रही हैं।
आंदोलन को दबाने के लिए बल प्रयोग के आरोपों के बीच मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने हिंसा की घटनाओं की जाँच कराने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है।

