कॉन्ग्रेस ने ‘वंदे मातरम’ का किया अपमान, कार्यालय में अचानक तीसरा स्टेंजा गाते ही राहुल-सोनिया और खरगे के हावभाव बदल गए, वीडियो हुआ वायरल

कॉन्ग्रेस नेता स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले के प्राचीर से पीएम मोदी के भाषण के दौरान मौजूद नहीं थे। न ही लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और न ही राज्यसभा में कॉन्ग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे। एक तरह से ऐतिहासिक कार्यक्रम और भाषण का उन्होंने बहिष्कार किया। कॉन्ग्रेस के नेताओं ने पार्टी कार्यालय में झँडा फहराया।

दिल्ली स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय पर झँडा फहराते हुए वंदेमातरम का गान शुरू हुआ तो शुरुआत के दो पारा, जो अब तक गाया जाता रहा है, उसके गायन के वक्त तक राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे सावधान की मुद्रा में दिखाई दिए, लेकिन जैसे ही अगला पारा शुरू हुआ तो राहुल गाँधी के चेहरे का भाव बदल गया और मल्लिकार्जुन खरगे और सोनिया गाँधी आपस में बात करने लगे।

वीडियो में देखा जा सकता है कि सोनिया गाँधी के चेहरे से साफ गुस्सा झलक रहा था। उन्होंने सेवादल के व्यक्ति को बुलाया और कुछ कहा। पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने और फिर सोनिया गाँधी ने। ये पूरा वीडियो अब वायरल हो गया है। इससे साफ पता चलता है कि वंदे मातरम के गान के दौरान इनलोगों ने सावधान की मुद्रा तोड़ी और वंदेमातरम का अपमान किया।

माना जा रहा है कि ‘वंदे मातरम’ का पूरा बजना सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी को पसंद नहीं आया और उन्होंने खड़गे की क्लास लगा दी। खरगे ने सेवा दल के व्यक्ति को बुलाया और बात की। सोनिया गाँधी भी उससे बात करती नजर आईं। आखिर इतनी क्या इमरजेंसी थी, कि वंदे मातरम के गान के बीच उन्हें बुला कर बात करना पड़ा।

इस मुद्दे पर पत्रकारों ने जब पार्टी के नेता जयराम रमेश से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वंदे मातरम गाए जाने से कोई नाराजगी नहीं थी, कोई वंदे मातरम को रोकने का प्रयास नहीं था, बल्कि मल्लिकार्जुन खरगे के लंबे वक्त तक खड़े होने को लेकर सोनिया गाँधी को लगा कि उन्हें कुर्सी दी जानी चाहिए, तो उन्होंने सेवादल के व्यक्ति से कुर्सी की डिमांड की। अब सवाल ये उठता है कि दूसरे पारा के बाद जब तीसरा पारा बजना शुरू हुआ तो क्या उस वक्त ही सोनिया गाँधी को याद आया कि खरगे काफी देर से खड़े हैं और उन्हें कुर्सी की जरूरत है।

नए कानून के तहत सजा का प्रावधान

नया वंदे मातरम कानून यानी राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम, 2026, साल 1971 के राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन करके बनाया गया है। अब अगर कोई भी व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम’ गाने से रोकता है या जब राष्ट्रगीत गाया जा रहा हो तब वहाँ किसी तरह की बाधा डालता है, तो इसे एक गंभीर अपराध माना जाएगा। इस तरह के मामलों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की जेल, जुर्माना या फिर जेल और जुर्माना दोनों की सजा मिल सकती है।

आपको बता दें कि साल 1971 के इस पुराने कानून में सिर्फ राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को ही कानूनी सुरक्षा दी गई थी। उस कानून के तहत अगर कोई राष्ट्रगान को गाने से रोकता था या उसमें रुकावट डालता था, तो उसे भी तीन साल तक की जेल या जुर्माने की सजा मिलती थी। अगर कोई व्यक्ति इस अपराध को दोबारा करता था, तो उसके लिए कम से कम एक साल की जेल की सजा तय थी। लेकिन इसमें राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के लिए कोई कड़ा प्रावधान नहीं था, जिसे अब इस नए संशोधन के जरिए जोड़ दिया गया है।