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अब 15 दिन के युद्ध लायक गोला-बारूद रख सकेगी सेना, ₹50000 करोड़ के हथियार खरीदने की भी योजना

काफी पहले 40 दिनों तक चलने वाले युद्ध के हिसाब से हथियार और गोला-बारूद की तैयारी रखने के लिए कहा गया था। इस अवधि को घटा कर 10 दिन कर दिया गया था। उरी हमले के बाद ऐसी आवश्यकता महसूस हुई कि इतनी अवधि के हिसाब से की गई तैयारी बहुत कम है।

सीमा पर जारी तनाव के बीच एक अहम ख़बर आई है। सरकार ने तीनों सेनाओं को 15 दिनों के युद्ध के अनुसार गोला-बारूद और हथियार का संग्रह करने की छूट दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सेना 15 दिन तक चलने वाले बड़े और सघन युद्ध के हिसाब से ज़रूरी हथियार और सामान एकत्रित कर सकेगी। पहले यह सीमा 10 दिनों की थी। इसके अलावा हथियारों की खरीद पर 50,000 करोड़ रुपए खर्च करने की भी योजना है। 

इंडिया टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया है कि हथियार और गोला-बारूद जमा करने का आदेश कुछ समय पहले जारी किया गया था। फ़िलहाल 15 दिनों तक चलने वाले बड़े युद्ध के मुताबिक़ तैयारियाँ करने का निर्देह दिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार काफी पहले 40 दिनों तक चलने वाले युद्ध के हिसाब से हथियार और गोला-बारूद की तैयारी रखने के लिए कहा गया था। इस अवधि को घटा कर 10 दिन कर दिया गया था। उरी हमले के बाद ऐसी आवश्यकता महसूस हुई कि इतनी अवधि के हिसाब से की गई तैयारी बहुत कम है। 

इसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने तीनों सेनाओं (जल, थल, वायु) का आर्थिक पैकेज 100 करोड़ से बढ़ा कर 500 करोड़ कर दिया था। तीनों सेनाओं को 300 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी, जिससे युद्ध संबंधी आवश्यक हथियार और गोला-बारूद खरीदे जा सकें। इस आर्थिक सहायता के बाद सेना ने तमाम हथियार, मिसाइल, गोला बारूद और अन्य ज़रूरी उपकरण खरीदे थे। 

वहीं सीमा के उस पर चीनी सेना ने भी भारतीय सेना से मोर्चा लेने के लिए तैयारियाँ बढ़ा दी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ चीनी सेना ने कई मिलिट्री कैम्प बना लिए हैं। चीन की सेना ने वास्तविक नियंत्रण रेखा के गहराई वाले क्षेत्रों में अभी तक लगभग 20 मिलिट्री कैम्प बना लिए हैं। इन मिलिट्री कैम्प के पीछे चीन की सेना का इकलौता उद्देश्य भारतीय सेना के विरुद्ध युद्ध की तैयारियों को मज़बूत करना था। 

गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच सीमा पर कई महीनों से सैन्य गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ चीन ने सीमा पर भारी संख्या में सैनिक तैनात किए हैं तो दूसरी तरफ भारत भी पूरी तरह डटा हुआ है। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर वार्ता का लंबा दौर चला लेकिन अभी तक उसका ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।       

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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