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कॉन्ग्रेस सहित 21 विपक्षी दलों को लताड़: EVM-VVPAT मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘बार-बार क्यों सुनें हम?’

सीजेआई गोगोई ने कहा कि वो इस मामले में दखलअंदाज़ी नहीं करना चाहते हैं। अदालत ने समीक्षा याचिका में दिए गए तर्कों को योग्य नहीं समझा। इसके बाद चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वह फिर से चुनाव आयोग जाएँगे।

ईवीएम-वीवीपैट को लेकर 21 विपक्षी दलों की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी है। इससे बीच लोकसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियों को तगड़ा झटका लगा है। इन दलों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। इसमें टीडीपी, कॉन्ग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस सहित कई अहम दल शामिल थे। इन सभी दलों ने अदालत से चुनाव आयोग को 50% वीवीपैट पर्चियों की ईवीएम से मिलान करने का आदेश देने की माँग की थी, जिसे नकार दिया गया। सुनवाई के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला मौजूद रहे। याचिका को ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पूछा कि अदालत इस मामले को बार-बार क्यों सुने?

सीजेआई गोगोई ने कहा कि वो इस मामले में दखलअंदाज़ी नहीं करना चाहते हैं। विपक्षी दलों की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने ज़िरह की। जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने विपक्षी दलों द्वारा दायर की गई समीक्षा याचिका को ख़ारिज कर दिया। 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हर विधानसभा क्षेत्र (असेंबली सेगमेंट) में 1 के बदले 5 ईवीएम-वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाएगा। विपक्षी दलों द्वारा 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग पर अदालत ने यह निर्णय लिया था।

वहीं अभिषेक मनु सिंघवी ने बाद में कहा कि मुख्य याचिका में 50% ईवीएम और वीवीपैट पर्चियों के मिलान की बात कही गई है, लेकिन अदालत इसे 33% भी कर दे तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जब अदालत ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया तो सिंघवी ने 25% ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों के मिलान की माँग रखी, जिसे नकार दिया गया। विपक्षी दलों का कहना था कि इस प्रक्रिया को वास्तविक, असरदार और अर्थपूर्ण बनाने के लिए ज़रूरी है कि आधे ईवीएम व वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया जाए। अदालत ने समीक्षा याचिका में दिए गए तर्कों को योग्य नहीं समझा।

अदालत के फ़ैसले के बाद नाराज़ टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वह फिर से चुनाव आयोग जाएँगे। उन्होंने कहा कि तीसरा व चौथा फ्रंट, सब विपक्ष का ही हिस्सा है और वे सभी मिलकर चुनाव बाद प्रधानमंत्री का नाम तय करेंगे। बता दें कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव आयोग को 20625 ईवीएम की वीवीपैट पर्चियाँ गिननी हैं, अर्थात प्रति विधानसभा क्षेत्र में पाँच ईवीएम की जाँच होगी। लेकिन, 21 राजनीतिक दलों के नेताओं ने लगभग 6.75 लाख ईवीएम की वीवीपीएटी पेपर स्लिप के मिलान की माँग की थी, जो कि एक कठिन, उबाऊ और विवाद पैदा करने वाली प्रक्रिया हो सकती थी।

चंद्रबाबू नायडू का सवाल है कि ईवीएम को 190 से भी अधिक देशों में से मात्र 18 देशों ने ही क्यों अपनाया है? इनमें से शीर्ष के 3 देश 10 सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश हैं। आंध्र के मुख्यमंत्री ने भाजपा पर ईवीएम को प्रोग्राम करने का आरोप मढ़ते हुए पूछा कि नए वीवीपैट में वोट स्लिप सिर्फ़ 3 सेकंड ही क्यों दिखाई देता है, जबकि इसे 7 सेकंड दिखाई देना चाहिए था? उन्होंने ईवीएम में छेड़छाड़ व गड़बड़ी किए जाने की बात कही। सुनवाई के समय वामपंथी नेता डी राजा भी अदालत में मौजूद थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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