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फ्रांसीसी राजदूत को निकालने के लिए तहरीक-ए-लब्बाक सड़क पर उतरा, PAK फौजी ने भी लगाए ‘अल जिहाद’ के नारे

साद की गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही बड़ी तादाद में उसके समर्थक सड़कों पर आ गए। पार्टी के डिप्टी हेड सैयद जहीर उल हसन शाह ने कहा, रिजवी की गिरफ्तारी का मतलब है कि सरकार ने फ्रांसीसी राजदूत को निकालने वाले समझौते का उल्लंघन किया है।

पाकिस्तान में फ्रांसीसी राजदूत को हटाने के लिए कट्टरपंथी समूहों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार (अप्रैल 12, 2021) को चरमपंथी दल तहरीक-ए-लब्बाक के नेता साद रिजवी की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद वहाँ उसके सैंकड़ों समर्थक सड़कों पर आ गए। हालात बिगड़ता देख पाकिस्तान पुलिस को कट्टरपंथियों पर आँसू गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

बताया जा रहा है कि चरमपंथी दल का नेता साद 20 अप्रैल को एक मार्च का आयोजन करने जा रहा था, जिसका मकसद फ्रांसीसी राजदूत को पाकिस्तान से निकालने की माँग करना था। मगर, इससे पहले वह ये सब करता, Pak पुलिस ने उसे बिना उसके आरोप बताए गिरफ्तार कर लिया।

साद की गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही बड़ी तादाद में उसके समर्थक सड़कों पर आ गए। पार्टी के डिप्टी हेड सैयद जहीर उल हसन शाह ने कहा, रिजवी की गिरफ्तारी का मतलब है कि सरकार ने फ्रांसीसी राजदूत को निकालने वाले समझौते का उल्लंघन किया है।

बता दें कि पेरिस में एक स्कूल टीचर सैमुअल पैटी की हत्या के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इम्मैनुएल मैक्रो ने कट्टरपंथियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आह्वान किया था। इसके साथ उन्होंने शार्ली एब्दों नाम की व्यंग्य मैगजीन में पैगंबर के कार्टून को प्रकाशित किए जाने का भी समर्थन किया था। लेकिन, उनके इस रवैये ने कट्टरपंथियों को नाराज कर दिया। हर जगह उनकी आलोचना शुरू हो गई। पाकिस्तान में तो तहरीक-ए-लब्बाक दल ने लगातार फ्रांस के विरोध में रैलियाँ भी की। अंत में ये बात सामने आई कि सरकार ने उन्हें आश्वासान दिया है कि 20 अप्रैल से पहले फ्रांस के राजदूत को देश के बाहर निकाल दिया जाएगा।

गौरतलब है कि साद रिजवी, फायरब्रांड मौलवी खादिम हुसैन रिजवी का बेटा है। खादिम के आकस्मिक निधन के बाद साद रिजवी तहरीक ए लब्बाक पाकिस्तान पार्टी का नेता बन गया था। रिजवी के समर्थक, देश के ईशनिंदा कानून को रद्द नहीं करने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। 

इनकी पार्टी चाहती है कि सरकार फ्रांस के सामान का बहिष्कार करे और फरवरी में रिजवी की पार्टी के साथ हस्ताक्षरित करारनामे के तहत फ्रांस के राजदूत को देश से बाहर निकाले। मालूम हो कि पाकिस्तान में इस कट्टरपंथी पार्टी का प्रभाव हुकूमत पर इतना है कि पाकिस्तानी संसद में ही फ्रांसीसी राजदूत को देश से निकालने के लिए प्रस्ताव पेश हुआ है। इस प्रस्ताव को लाने का फैसला पीएम की अध्यक्षता में हुई बैठक में किया गया।

इस बीच पाकिस्तान से एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। इसमें कट्टरपंथी समूहों को PAK सेना का समर्थन मिलता दिख रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि पाकिस्तान सेना का एक जवान तहरीक ए लब्बाक के कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी करता है। वह खुली जिप्सी पर लाइट मशीनगन के साथ खड़ा है और अल जिहाद-अल जिहाद का नारा लगा रहा है। वहीं, नीचे खड़े हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ ‘पाक फौज जिंदाबाद’ की नारेबाजी करती सुनाई दे रही है। कुछ लोग उस जवान का हाथ चूमते भी नजर आते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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