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सुमना हिमस्खलन में अब तक 8 की मौत, सेना ने 384 लोगों को किया रेस्क्यू: BRO का एक कैंप भी मलबे में दबा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस प्राकृतिक आपदा पर कहा है कि इस संबंध में मैने जिला प्रशासन को अलर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि वो लगातार बीआरओ और जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। साथ ही दसरी परियोजनाओं को भी रोकने के आदेश दिए गए हैं।

उत्तराखंड के चमोली जिले के जोशीमठ स्थित सुमना में ग्लेशियर टूट गया है। इसके बाद से सेना की सूर्य कमांड बचाव अभियान चला रही है। सेंट्रल कमांड ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि यहाँ अब तक 8 लोगों के शव मिल चुके हैं। 384 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिसमें से 6 की हालत गंभीर है। फिलहाल सेना का बचाव कार्य लगातार जारी है।

सूर्य कमांड की ओर से जानकारी दी गई है कि हिमस्खलन की चपेट में बीआरओ का एक कैंप भी आ गया है। रेस्क्यू किए गए लोग सुमना में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन के कैंप में थे। ग्लेशियर के टूटने के बाद रात में ही सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था, लेकिन खराब मौसम के चलते इसे दोबारा से सुबह 1:30 बजे से शुरू किया गया।

हादसे के वक्त चल रहा था सड़क निर्माण का कार्य

सीमा सड़क संगठन के कर्नल मनीष कपिल ने जानकारी दी है कि सुमना में सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। उन्होंने ग्लेशियर के टूटने को बर्फबारी का कारण माना है। जोशीमठ-मलारी हाईवे ग्लेशियर के मलबे के नीचे दब गया है।

रिपोर्ट के मुतबिक, चमोली में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाली सुमना-2 के पास हो रही लगातार बर्फबारी के कारण ग्लेशियर टूटने से यह हादसा हुआ है। फिलहाल भापकुंड से सुमना तक के रास्ते की सफाई की जा रही है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इस प्राकृतिक आपदा पर कहा है कि इस संबंध में मैने जिला प्रशासन को अलर्ट जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि वो लगातार बीआरओ और जिला प्रशासन के संपर्क में हैं। साथ ही दसरी परियोजनाओं को भी रोकने के आदेश दिए गए हैं।

इससे पहले 7 फरवरी 2021 को भी चमोली में ग्लेशियर टूटने की जगह से धौलीगंगा नदी में बाढ़ आ गई थी। उस दौरान 54 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता हो गए थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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