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टोक्यो ओलंपिक में भारत को तीसरा मेडल: बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन ने जीता कांस्य पदक, जानिए असम के छोटे से गाँव से यहाँ तक का सफर

इसी साल लवलीना की माँ मैमोनी बोरगोहेन का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। अस्पताल में समय व्यतीत करने के कारण लवलीना को कोरोना वायरस संक्रमण ने भी अपनी चपेट में ले लिया था, फिर भी वो यहाँ तक पहुँचीं।

भारतीय महिला बॉक्सर लवलीना बोरगेहेन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक प्राप्त हुआ है। हालाँकि, सेमीफाइनल में उन्हें तुर्की की बुसेनज सुरमैनेली ने हरा दिया। 23 वर्ष की लवलीना बोरगेहेन ने पहले ही भारत के लिए मेडल सुनिश्चित कर लिया था। उन्हें वीमेंस वेल्टरवेट (69 किलोग्राम) वर्ग में ये ख़िताब प्राप्त हुआ। पहले दोनों राउंड में लवलीन ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन तुर्की की खिलाड़ी ने अंतिम कुछ सेकेंड्स में वापसी की।

बता दें कि वो असम के गोलाघाट स्थित एक छोटे से गाँव की रहने वाली हैं। एक और बात जानने लायक है कि ये साल भी लवलीना बोरगोहेन के लिए काफी संघर्ष भरा रहा है। इसी साल लवलीना की माँ मैमोनी बोरगोहेन का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। डॉक्टरों ने बताया था कि उनकी दोनों किडनियाँ काम करने लायक नहीं बची हैं। इसके बाद लवलीना ने खुद डोनर खोजा था और अपनी कैश प्राइज से माँ का इलाज कराया। इस दौरान वो प्रैक्टिस भी करतीं और अस्पताल में माँ की सेवा भी। किडनी ट्रांसप्लांट में 25 लाख रुपए लग गए थे

अस्पताल में समय व्यतीत करने के कारण उन्हें कोरोना वायरस संक्रमण ने भी अपनी चपेट में ले लिया था। इसी बीच उन्हें 52 सदस्यीय दल के साथ ओलंपिक गेम्स की ट्रेनिंग के लिए यूरोप भी जाना था। कोरोना ने दुनिया भर में जैसा आतंक मचाया, भारत में भी उसका असर देखने को मिला। बॉक्सरों को प्रैक्टिस के लिए समय नहीं मिल पाया, इसीलिए ये ट्रेनिंग कैम्प ज़रूरी था। सरकार ने लवलीना बोरगोहेन की मदद की और असम में उनके लिए एक व्यक्तिगत ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया।

लवलीना की दोनों बहनें लीचा और लीमा भी किक बॉक्सर्स हैं। कम संसाधन होने के बावजूद माता-पिता तीनों बेटियों को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए पूरा प्रोत्साहन देते रहे हैं। तीनों बेटियों के सपने को पूरा करने के लिए माँ स्थानीय कोऑपरेटिव से लोन लिया करती थीं। अब टिकेन के पास एक छोटा सा चाय का बागान भी है। लेकिन, कभी वो मात्र 2500 रुपए का महीना ही कमाते थे। उन्होंने कहा कि फिर भी वो कभी रुपयों की कमी को बेटियों के करियर के आड़े नहीं आने देना चाहते थे। अब लवलीना बोरगेहेन को टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक मिला है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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