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बांग्लादेश के जैसा असम में हिंसा फैलाने की कोशिश: भगवान गणेश के सिर पर अरबास ने रखा पैर, सोशल मीडिया पर फोटो किया वायरल

बांग्लादेश में कथित कुरान के अपमान के कारण हिंदुओं पर हमले कर कई लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया। बाद में पुलिस की जाँच में पता चला कि दुर्गा पूजा स्थल पर कुरान रखने वाला और कोई नहीं, बल्कि इकबाल हुसैन नाम का एक मुस्लिम ही है।

बांग्लादेश में कट्टरपंथी इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ द्वारा मंदिरों में तोड़फोड़ किए जाने के बाद अब असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले से हिंदू देवता की मूर्ति को अपवित्र करने की एक और घटना सामने आई है। शहर में साम्प्रदायिक उन्माद भड़काने के लिए अरबास खान नाम के आरोपित ने भगवान गणेश की प्राचीन मूर्ति के सिर पर पैर रखकर फोटो ली और उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना असम के नागाँव के पास पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के तेंगालाँगसो क्षेत्र में स्थित एक धार्मिक स्थान पर हुई। यहाँ स्थानीय लोग भगवान गणेश की पूजा करते हैं। मूर्ति को तेंगलाँगसो में अरलोंग कुँड नामक एक धारा के बीच में रखा गया है। उस जगह पर हिंदू देवता को समर्पित एक मंदिर भी है।

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपित भगवान गणेश की मूर्ति के सिर पर अपना एक पैर रखकर पोज देता हुआ नजर आ रहा है। उसने अपने पैरों में जूते भी पहने हैं।

आरोपित अरबास खान द्वारा अपलोड की गई फेसबुक पोस्ट, साभार: फेसबुक यूजर मोनीराम टेरोन कोंगकट

सोशल मीडिया पर अपलोड की गई इस तस्वीर के सामने आने के बाद से हिंदुओं में काफी उबाल है। कई स्थानीय संगठनों समेत बजरंग दल और कार्बी छात्र संघ ने इस कुकृत्य की भर्त्सना की और आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने अरबास खान की गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन भी किया। इस दौरान उन्होंने आरोपित द्वारा अपलोड की गई फोटो की हार्ड कॉपी भी ले रखा था। गणेश मंदिर समिति के सदस्यों ने भी इस घृणित कृत्य की निंदा की और युवक के खिलाफ बैथलांगसो थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

अरबास खान के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन (साभार: ime8 न्यूज)

स्थानीय मीडिया से बात करते हुए मंदिर समिति के एक सदस्य ने कहा, “हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” मंदिर समिति के सदस्य ने कहा कि वे अन्य धर्मों के लोगों के यहाँ पर आने के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई मुस्लिम, ईसाई और कई धर्मों के लोग पिकनिक के लिए यहाँ आते हैं। यह कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई मस्जिदों और चर्चों के साथ-साथ ईद जैसे धार्मिक त्योहारों में भी गए हैं, लेकिन इस तरह के अनैतिक व्यवहार से हिंदू धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है, जिसे माफ नहीं किया जाएगा।

आरोपित गिरफ्तार

इस वारदात के बाद लोगों की शिकायत पर पुलिस ने अरबास खान उर्फ ​​गुलाम अब्बास पटोवारी की तलाश शुरू की और उसे कचुआ गाँव से शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में हमरेन एसपी अजगरावन बसुमतारी ने आरोपित की युवक की तलाश का आदेश दिया था। इसके बाद उसे नगाँव, होजई और कार्बी आंगलोंग पुलिस ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन चलाकर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपित घटना वाली जगह अपने तीन दोस्तों के साथ गया था और इसके बाद उसने मूर्ति पर अपना पैर रखकर फोटो खिंचवाई थी।

वह होजई जिले के जमुनामुख के भेरभेरी गाँव का रहने वाला है। जमुनामुख पुलिस उसकी तलाश में उसके घर गई थी, जहाँ उसके आंगलोंग जिले के ठिकाने का पता चला। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिलहाल पुलिस अरबास खान से पूछताछ कर रही है।

बांग्लादेश में क्या हुआ था?

उल्लेखनीय है कि हाल ही में दुर्गा पूजा समारोह के दौरान बांग्लादेश में कट्टरपंथियों द्वारा मूर्तियों में तोड़फोड़ की कई वारदातों को अंजाम दिया गया। रविवार 10 अक्टूबर को इस्लामिक चरमपंथियों ने बांग्लादेश के चटगाँव के फिरंगी बाजार इलाके में श्री श्मशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा मूर्ति को तोड़ दिया।

फिर 14 अक्टूबर को कई अन्य पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की गई। हिंदुओं पर हमले के अन्य वीडियो के साथ-साथ टूटी हुई मूर्तियों, ध्वस्त किए गए पंडालों और माँ दुर्गा की मूर्ति को तालाब में फेंके जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।

इसके बाद 16 अक्टूबर को 400-500 चरमपंथियों की भीड़ ने इस्कॉन मंदिर पर हमला कर दिया। उनका यह हमला 17 और 18 अक्टूबर को भी जारी रहा। इस दौरान उन्मादियों ने हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। इस हमले में कई हिंदू मारे गए और कई घायल हुए।

मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर ये हमले कथित कुरान के अपमान के कारण किए गए थे। बाद में पुलिस की जाँच में पता चला कि दुर्गा पूजा स्थल में कुरान की प्रति रखने वाला और कोई नहीं, बल्कि इकबाल हुसैन नाम का एक मुस्लिम ही था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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