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ख़ुशी से मौत देने वाले ‘सुसाइड कैप्सूल’ को स्विट्जरलैंड सरकार की मंजूरी: ऐसे करता है काम

'फिजिशियन असिस्टेड सुसाइड' का मतलब ये हुआ कि कोई व्यक्ति डॉक्टर की मदद से आत्महत्या करे। इसके लिए डॉक्टर ही प्रिस्क्रिप्शन में उसके लिए दवा लिखता है। ये दवा कोई ऐसा खतरनाक ड्रग्स होता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है।

आपने साई-फाई फिल्मों में देखा ‘असिस्टेड सुसाइड बूथ्स’ के बारे में देखा-सुना होगा, लेकिन स्विट्जरलैंड में अब ये चीज एक वास्तविकता बन सकती है। वहाँ की एक कंपनी ने 3D प्रिंटेड ‘असिस्टेड सुसाइड पॉड’ का निर्माण किया है, जिसे ‘सार्को कैप्सूल’ नाम दिया गया है। स्विट्जरलैंड की सरकार ने इसके प्रयोग के लिए कानूनी अनुमति भी प्रदान कर दी है। हालाँकि, स्विट्जरलैंड में डॉक्टर की मदद से आत्महत्या एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसके रास्ते में कुछ कानूनी अड़चनें भी आती हैं।

इनमें से अधिकतर वो लोग होते हैं, जो असहनीय और असाध्य रोगों से पीड़ित होते हैं। वो अपने जीवन को ख़त्म करने के लिए मेडिकल तकनीकों का सहारा लेते हैं। अब तक सैकड़ों लोग वहाँ पर ऐसा कर चुके हैं। सिर्फ स्विट्जरलैंड ही नहीं, बल्कि बल्जियम, जर्मनी, लग्जमबर्ग और नीदरलैंड्स जैसे यूरोपीय देशों में भी फिजिशियन की मदद से आत्महत्या के लिए कानूनी रास्ता उपलब्ध कराया जाता है। वहीं कुछ अन्य देश ऐसे हैं, जहाँ अन्य प्रकार की तकनीक अपनाई जाती है।

उदाहरण के तौर पर ‘Passive Euthanasia’ को ही ले लीजिए। इसके तहत एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के ‘हित’ में उसकी जान लेने के लिए उसका मेडिकल लाइफ सपोर्ट हटा देता है, जैसे वेंटिलेटर्स इत्यादि। इसी तरह कुछ परिस्थितियों में मरीज अपना इलाज ही बंद करा देते हैं, ताकि उनकी मौत हो जाए। ‘फिजिशियन असिस्टेड सुसाइड’ का मतलब ये हुआ कि कोई व्यक्ति डॉक्टर की मदद से आत्महत्या करे। इसके लिए डॉक्टर ही प्रिस्क्रिप्शन में उसके लिए दवा लिखता है।

ये दवा कोई ऐसा खतरनाक ड्रग्स होता है, जिससे मरीज की मौत हो जाती है। वहीं ‘Euthanasia’ के अंतर्गत एक मेडिकल प्रोफेशनल मरीज के जीवन का अंत करने के लिए ऐसा तरीका अपनाता है, जिसमें दर्द नहीं हो। वहीं जब तरीका ‘पैसिव’ हो जाता है, तब उन दवाओं को ही बंद कर दिया जाता है जिससे मरीज का जीवन बचा रहता है। इसी तरह ‘सार्को सुसाइड कैप्सूल’ भी बनाया गया है, जिसके बारे में ऑस्ट्रेलिया के NGO ‘एग्जिट इंटरनेशनल’ ने बताया है कि ये ‘मन की शांति’ को ध्यान में रख कर बनाया गया है।

बताया गया है कि ये वातावरण को नाइट्रोजन से भर देता है और ऑक्सीजन की मात्रा कम होती चली जाती है – 21% से सीधा 1%। इससे व्यक्ति थोड़ा अलग महसूस करता है और खुश भी रहता है। फिर Hypoxia (ऑक्सीजन की कमी) और Hypocapnia (कार्बन डाइऑक्साइड) की कमी से व्यक्ति की मौत हो जाती है। उससे पहले आदमी बेहोश हो जाता है। अकेले 2020 में स्विट्जरलैंड में 1300 ‘फिजिशियन असिस्टेड आत्महत्याएँ’ हुईं। अब कंपनी आदमी के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक ‘आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस (AI)’ सिस्टम पर काम कर रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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