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आदिवासी लड़की और मुस्लिम पुरुष: झारखंड में ST का दर्जा पाने के लिए खेल, आरक्षित सीट पर यूनुस ने पत्नी नीलम को बनाया मुखिया

एक मुस्लिम से निकाह करने के बाद नीलम टिग्गा क्षेत्र की मुखिया इसलिए बनीं क्योंकि वो पहले अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं और निकाह के बाद भी उनका नाम जाति पहले वाला ही रहा।

झारखंड में दशकों से आदिवासी लड़कियों (ST) के साथ चल रहे घिनौने खेल का पर्दाफाश करती एक न्यूज 18 की रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि झारखंड में आदिवासी लड़कियों के एसटी (ST) स्टेटस का लाभ पाने के लिए लड़कियों के साथ प्रेमजाल का गंदा खेल खेला जा रहा है। कथिततौर पर, वहाँ मु्स्लिम उन्हें सीधे-सीधे धर्मांतरण के लिए अपने प्रेम जाल में नहीं फँसाते बल्कि आरक्षण का लाभ लेने के लिए वह उनका इस्तेमाल करते हैं और इस तरह उनका ब्रेनवॉश होता है कि वो न तो अपनी जाति छोड़ती हैं और न ही हिंदू धर्म में विश्वास कायम रख पाती हैं। 

रिपोर्ट में टुंडुल उत्तरी पंचायत की मुखिया नीलम टिग्ग की कहानी को उजागर किया गया है जिन्होंने साल 2003 में यूनुस अंसारी से अपनी मर्जी से निकाह किया था और अब वह 11 साल से गाँव की मुखिया हैं। गौर देने वाली बात ये है एक मुस्लिम से निकाह करने के बाद नीलम टिग्गा क्षेत्र की मुखिया इसलिए बनीं क्योंकि वो पहले अनुसूचित जनजाति से संबंध रखती थीं और निकाह के बाद भी उनका नाम जाति पहले वाला ही रहा। इस तरह वह एसटी आरक्षण का लाभ पाकर और यूनुस से शादी कर मुसलमानों का वोट पाकर सीट पर काबिज हो गईं।

रिपोर्ट बताती है कि नीलम जब क्लास लेने के लिए बाहर जाती थीं तो यूनुस वहीं गाड़ी चलाते थे, इसके बाद दोनों में बातचीत बढ़ी और एक दिन दोनों ने निकाह कर लिया। यूनुस ITI पास हैं। उन्होंने नीलम से शादी के बाद उन्हें मुखिया चुनाव में उतारा और खुसकिस्मती से वह इन चुनावों को जीत भी गईं। अब यूनुस अपनी बीवी को कहीं पर मसला होने पर वहाँ छोड़ने और वहाँ से घर वापस लाने का काम करते हैं।

बता दें कि टुंडुल उत्तरी गाँव में 6 हजार की आबादी है और घर लगभग 100 हैं। इनमें 3 हजार सरना आदिवासी रहते हैं जबकि 2500 मुस्लिम रहते हैं और करीब 500 लोग दूसरी जाति और धर्म के लोग हैं। गाँव में सरना आदिवासियों का पूजा स्थल भी है लेकिन साथ में पाँच मस्जिदें भी हैं। टिग्गा की जेठानी तरन्नुम परवीन का कहना है कि नीलम ने भले ही धर्मांतरण नहीं किया लेकिन वह कभी सरना के मंदिर नहीं जातीं। घर में रहकर ही नमाज पढ़ती है। उन्हें कलमा पढ़ना आता है।

उल्लेखनीय है कि नीलम टिग्गा की ये कहानी अकेली नहीं है जब आरक्षण का लाभ पाने के लिए आदिवासी लड़कियों को फँसाया गया हो। यहाँ पर आदिवासी बेटियों के साथ चल रहे इस घिनौने खेल से सरना समाज के लोगों में खासी नाराजगी है जो बताता है कि ये खेल काफी पुराना है। राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश महासचिव रवि तिग्गा की मानें तो क्षेत्र में मासूम लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे निकाह किया जा रहा है और निकाह के बाद उनको मुखिया चुनावों में उतारकर आदिवासी हितों को नुकसान पहुँचाया जा रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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