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फतवा वाले देवबंद में फिर खिला कमल, हिंदुओं के पलायन के लिए बदनाम कैराना से सपा के नाहिद हसन जीते

कैराना हिंदुओं के पलायन को लेकर बदनाम रहा है। हालाँकि योगी सरकार के जमाने में कई परिवारों ने दोबारा से यहाँ वापसी की है।

सहारनपुर की देवबंद से एक बार फिर बीजेपी जीतने में कामयाब रही है। वहीं कैराना से सपा के नाहिद हसन फिर से जीते हैं। देवबंद सीट से भारतीय जनता पार्टी के बृजेश सिंह को 93890 (38.77%) वोट मिले है। सपा के कार्तिकेय राणा 86786 (35.83%) वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। इस सीट से बहुजन समाज पार्टी के चौधरी राजेंद्र सिंह 52732 (21.77%) वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे हैं। दारुल उलूम से जुड़े मदनी परिवार के उमेर मदनी को महज 3500 (1.45%) वोट मिले हैं। देवबंद का दारुल उलूम अपने फतवों को लेकर जाना जाता है।

चुनाव परिणाम देवबंद, साभार – निर्वाचन आयोग

2017 में भी बृजेश सिंह इसी सीट से 102244 (44%) वोट पा कर जीते थे। तब उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा के माजिद अली को हराया था। माजिद अली को 72844 (32%) वोट मिले थे। तब समाजवादी से माविया अली ने दावेदारी ठोंकी थी, जिन्हें 55385 (24%) वोट मिले थे।

कैराना से भाजपा की हार

शामली की कैराना सीट से एक बार फिर से समाजवादी पार्टी के नाहिद हसन ने 100648 (53.5%) वोट हासिल कर जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा की प्रत्याशी मृगांका सिंह को लगातार दूसरी बार हराया है। मृगांका को 82963 (44.1%) वोट मिले हैं। तीसरे स्थान पर बसपा के राजेंद्र रहे जिन्हे 1683 वोट मिल पाए। कैराना हिंदुओं के पलायन को लेकर बदनाम रहा है। हालाँकि योगी सरकार के जमाने में कई परिवारों ने दोबारा से यहाँ वापसी की है।

परिणाम कैराना विधानसभा, साभार – निर्वाचन आयोग

साल 2017 में इस सीट से सपा प्रत्याशी नाहिद हसन ने 98830 (47.26%) वोट पा कर जीत दर्ज की थी। तब सपा और कॉन्ग्रेस का गठबंधन था। वहीं दूसरे नंबर पर रहीं भाजपा प्रत्याशी मृगांका को 77668 (37.14%) वोट प्राप्त हुए थे। रालोद के अनिल कुमार 19,992 (9.56%) वोट पा कर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार नाहिद हसन को चुनाव से ठीक पहले जेल जाना पड़ा था। माना जा रहा है कि कड़े मुकाबले में उन्हें इसका लाभ मिला है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं। बहुमत का आँकड़ा 202 है। बीजेपी इस बार भी बहुमत प्राप्त करती दिख रही है। 2017 के चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटें जीती थी। उसे 39.67% मत मिले थे। कॉन्ग्रेस और सपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। सपा को 21.82% वोट के साथ 47 तो कॉन्ग्रेस को 6.25% वोटों के साथ 7 सीटें मिली थी। 22.23% वोट हासिल करने के बावजूद बसपा 19 सीटों पर सिमट गई थी। अन्य के खाते में 5 सीटें गई थी। उससे पहले 2012 में सपा और 2007 के विधानसभा चुनावों में बसपा को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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