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टहलने निकले पूर्व IB अधिकारी की हत्या, किताब लिख कर जिहाद की खोली थी पोल: 35 साल एजेंसी के लिए काम किया था, CCTV वीडियो आया सामने

मैसूर के सिटी पुलिस कमिश्नर डॉक्टर चन्द्रगुप्त ने कहा कि आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। जाँच के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है।

कर्नाटक के मैसूर में IB अधिकारी आरएन कुलकर्णी की मौत को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। असल में ये एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हत्या थी। पुलिस ने भी पाया है कि गाड़ी ने उन्हें जानबूझ कर टक्कर मारी थी। वो शुक्रवार (4 नवंबर,2022) की शाम मैसूर यूनिवर्सिटी (गंगोत्री) स्थित कम्प्यूटर साइंस डिपार्टमेंट के पास टहलने निकले थे, तभी एक अज्ञात गाड़ी ने उन्हें पीछे से धक्का मार दिया। उन्हें एक नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

इस घटना को अंजाम देने वाले अज्ञात लोग इसके बाद भाग खड़े हुए। पुलिस ने पहले इस मामले में ‘हिट एंड रन’ का केस दर्ज किया था। लेकिन, जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखा तो पाया कि ये जानबूझ कर अंजाम दी गई वारदात है। जयलक्ष्मीपुरम पुलिस थाने में इसके बाद हत्या का मामला भी दर्ज कर लिया गया है। हत्या के समय वो टहल नहीं रहे थे, बल्कि सड़क किनारे खड़े हुए थे। कार की कोई नंबर प्लेट भी नहीं थी।

मैसूर के सिटी पुलिस कमिश्नर डॉक्टर चन्द्रगुप्त ने कहा कि आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। जाँच के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम बनाई गई है। आरएन कुलकर्णी 23 वर्ष पहले ही रिटायर हो गए थे। ये हत्या व्यक्तिगत दुश्मनी के कारण हुई है या उनके प्रोफेशनल जीवन से कुछ जुड़ा हुआ है, ये अभी पता नहीं चला है। मनसागंगोत्री में ये घटना शाम के 5:30 बजे हुई। आरएन कुलकर्णी ने 35 साल ‘इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो’ में सेवा दी थी।

उन्होंने जिहाद की पोल खोलते हुए ‘Facets of terrorism in India’ सहित 3 पुस्तकें भी लिखी हैं। इस पुस्तक को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लॉन्च किया था। अपने शुरुआती दिनों में वो बतौर शिक्षक कार्य करते थे। वो RAW ‘(रिसर्च एंड एनालिसिस विंग)’ के साथ भी काम कर चुके थे। वो मैसूर के शारदादेवी नगर में रहते थे। घर बनाने को लेकर पड़ोसी के साथ उनका एक विवाद भी चल रहा था। उनके दामाद ने इस सम्बन्ध में FIR दर्ज कराई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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